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दरबारी राजनीति: चंद्रन्ना की चपेट में चंद्रबाबू नायडू

ए एस शेखर | Updated on: 26 May 2016, 8:44 IST
QUICK PILL
  • दो साल पहले आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बने चंद्रबाबू नायडू ने अपने कई सहयोगियों को उनके नाम पर साार्वजनिक कार्यक्रम का नामाकरण किए जाने की आजादी दे दी है.
  • नायडू के समर्थक मंत्रियों की चापलूसी उस वक्त हद पार कर गई जब कापू समुदाय के लिए चलाई जाने वाली विशेष योजना का नाम चंद्रन्ना रख दिया गया. चंद्रन्ना दो शब्द चंद्रबाबू नायडू और उनके बड़े भाई के नाम से मिलकर बना है जिन्हें अन्ना बुलाया जाता है.
  • बेहतर महसूस करने के लिए कुछ लोग मंदिरों का रुख करते हैं जबकि कुछ कला, सेवा या धर्म की तरफ मुड़ते हैं. कुछ लोग दिव्यता महसूस करने के लिए अपनी पसंद के धार्मिक स्थलों की तरफ जाते हैं. जबकि कुछ लोेग इसके लिए अपने भीतर झांकते हैं.

    सार्वजनिक कार्यक्रमों का नामाकरण करने के मामले नेता अक्सर आत्ममुग्धता का परिचय देते हैं. दो साल पहले आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बने चंद्रबाबू नायडू ने अब अपने कई सहयोगियों को उनके नाम पर सार्वजनिक कार्यक्रम का नामाकरण किए जाने की आजादी दे दी है. 

    नायडू ने अपने सहयोेगियों को नायक पूजा की आजादी दे रखी है. ऐसा नहीं है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है या फिर वह किसी दूसरे काम में मशगूल थे, जब उनके नाम पर धड़ाधड़ सार्वजनिक योजनाओं का नामाकरण किया जा रहा था.

    नायडू के समर्थक मंत्रियों की चापलूसी उस वक्त हद पार कर गई जब कापू समुदाय के लिए चलाई जाने वाली विशेष योजना का नाम चंद्रन्ना रख दिया गया. 

    चंद्रन्ना दो शब्द चंद्रबाबू नायडू और उनके बड़े भाई के नाम से मिलकर बना है जिन्हें प्यार से अन्ना बुलाया जाता है. हालांकि सरकार पर यह दांव भारी पड़ गया. कापू समुदाय के नेता नायडू सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं क्योंकि नायडू खुद कापू समुदाय से ताल्लुक नहीं रखते हैं.

    लेकिन नायडू के सहयोगियों ने इस मामले में बचाव की बजाय और अधिक आक्रामक हो गए हैं. नायडू की पार्टी (टीडीपी) के नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक योजनाओं का नामाकरण किए जाने में कोई बुराई नहीं है. खासकर तब तो बिल्कुल भी नहीं जब कापू समुदाय के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं उनके 'मसीहा' की तरफ से शुरू की गई हैं.

    वहीं दूसरी तरफ कापू समुदाय से ताल्लुक रखने वाले और विजयवाड़ा से मौजूदा विधायक उमामहेश्वर राव और निगम प्रशासक पी नारायण ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू ने जितना कापू समुदाय के लिए किया है, उतना किसी अन्य नेता ने नहीं किया. हालांकि उनका सहयोग सरकार के काम नहीं आया. राज्य सरकार फिलहाल इस मामले में बैकफुट पर नजर आ रही है.

    हालांकि ऐसा लगता है कि इस मामले में चंद्रबाबू नायडू को अंधेरे में रखा गया. मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से सभी विभागों और मंत्रालयों को जारी निर्देश में कहा गया था कि वह किसी भी सरकारी योजना के नाम में चंद्रन्ना शब्द का इस्तेमाल नहीं करे.  

    हालांकि इसमें यह साफ नहीं किया गया कि यह बदलाव पहले से शुरू हो चुकी योजना पर लागू होगा या फिर भविष्य में शुरू होने वाली योेजना पर. सरकार में इसे लेकर किसी भी स्तर पर स्पष्टता नहीं है.

    मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश में किसी भी सरकारी कार्यक्रम का नाम चंद्रन्ना नहीं रखने की अपील की गई है

    सीएमओ की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया है, 'सीएमओ की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी सरकारी योजना के आगे चंद्रन्ना शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.' 

    इसका यह मतलब निकलता है कि सीएमओ किसी मामले में चंद्रन्ना शब्द के इस्तेमाल का अधिकार रखता है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो चंद्रन्ना शब्द के इस्तेमाल पर पाबंदी नहीं लगाई गई है, बल्कि इसके इस्तेमाल के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत होगी.

    सरकार की यह आलोचना उम्मीद के मुताबिक ही है. इससे पहले टीडीपी नेताओं ने कापू भवन का नाम चंद्रन्ना भवन रख दिया था. इस फैसले के विरोध से नेताओं ने कोई सबक नहीं लिया. 

    कापू नेता बोचा सत्यनारायण और वाईएसआर कांग्रेस के अंबाती रामबाबू ने कहा कि 'सरकार की यह कोशिश कुछ और नहीं बल्कि कापू नेताओं और नायकों की बेइज्जती है.'

    मुख्यमंत्री ने इस मामले को संभालने की कोशिश करते हुए एक आधिकारिक कार्यक्रम में कहा कि किसी भी योेजना के साथ उनका नाम जोड़ देना सही नहीं है. वास्तव में इन सबकी शुरुआत चंद्रन्ना संक्रांति कानुका से हुई. चंद्रन्ना संक्रांति कानुका गिफ्ट हैंपर था जिसे इस साल जनवरी में सिविल सप्लाइज डिपार्टमेंट ने गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों में वितरित किया. 

    शुरुआत में इस योजना का नाम एनटीआर के नाम पर रखा जाना था लेकिन सिविल सप्लाई मिनिस्टर पारिताला सुनीता ने इसका नाम बदलकर चंद्रन्ना कर दिया. 

    फैसलेे का कोई विरोध नहीं हुआ तो सीएमओ को भी इससे कोई आपत्ति नहीं हुई. लेकिन जब क्रिसमस के मौके पर ईसाई समुदाय के बीपीएल परिवार को चंद्रन्ना क्रिसमस कानुका गिफ्ट हैंपर दिया गया तो बवाल होते देर नहीं लगी.

    चंद्रन्ना के नाम से शुरू हुई अन्य योजनाओं  पर एक नजर:

    चंद्रन्ना के नाम से शुरू हुई अन्य योजनाओं  पर एक नजर:

  • चंद्रन्ना व्यावसाया क्षेत्रम
  • चंद्रन्ना विद्या दीपम
  • चंद्रन्ना रायडू क्षेत्रम
  • चंद्रन्ना संचारा चिकित्सा
  • चंद्रनना भीमा
  • चंद्रन्ना दलित बाता
  • चंद्रन्ना गिरिजन बाता
  • चंद्रन्ना रुना मेला
  • चंद्रन्ना पशु सेवा
  • चंद्रन्ना विदेशी विद्या दीवाना
  • चंद्रन्ना पदोन्नति
  • चंद्रन्ना स्वयम उपाधि
  • वादा वदालो चंद्रनना बाता
  • चंद्रन्ना चेयुथा
  • चंद्रन्ना उद्योग मेला
  • पूर्व कृषि मंत्री वाडे शोभांद्रासेवारा राव को लगता है कि यह लोगों की स्मृति से एनटीआर को मिटाने की कोशिश है. उनकी कोशिश मौजूदा मुख्यमंत्री के नाम पर योजनाओं का नामाकरण कर नई परंपरा को स्थापित करने की है. लेकिन लोगों की स्मृति से एनटीआर की यादों को मिटाना असंभव है.

    केवल दो योजनाओं का नाम टीडीपी के संस्थापक के नाम पर रखा गया है. एनटीआर आरोग्य सेवा और एनटीआर भरोसा. लेकिन वास्तव में चंद्रबाबू नायडू के नाम पर कई योजनाओं का नाम रखा जा रहा है. बोचा सत्यनारायण का कहना है कि उन्हें योजनाओं के नामाकरण के बारे में जानकारी है. सरकार ने बाद में जो निर्देश दिया, वह महज टीडीपी सरकार का चेहरा बचाने की कवायद है.

    विजयवाड़ा बीजेपी के प्रेसिडेंट उमा माहेश्वर राजू ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने कुछ केंद्रीय योजनाओं का नाम चंद्रबाबू नायडू के नाम पर रख दिया. पूर्व मंत्री और कापू समुदाय की नेता मुद्रगडा पद्मनाभन ने इस मामले में कड़ा प्रतिरोध जताया. वह पूछते हैं कि आखिर किसी सार्वजनिक योजना का नाम मुख्यमंत्री के  नाम पर कैसे रखा जा सकता है.  

    First published: 26 May 2016, 8:44 IST