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चंद्रमा से ISRO के लिए आई बहुत बड़ी खुशखबरी, सही सलामत है विक्रम लैंडर, नहीं हुई कोई टूट-फूट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 September 2019, 16:10 IST

चंद्रमा से ISRO के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. खबर है कि चांद पर लैंडर विक्रम सुरक्षित है और उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है. इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग करने के बावजूद भी चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम में कोई टूट-फूट नहीं हुई है.

ऑर्बिटर द्वारा भेजे गए चित्र में भी यह एक ही टुकड़े के रूप में दिखाई दे रहा है. इसके बाद इसरो की टीम लैंडर विक्रम के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश में लगी हुई है. हालांकि चित्र में लैंडर विक्रम एक तरफ झुका दिखाई दे रहा है. कम्युनिकेशन लिंक वापस जोड़ने के लिए जरूरी है कि लैंडर का ऐंटीना ऑर्बिटर की तरफ या ग्राउंड स्टेशन की दिशा में हो.

इससे पहले इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डी ससीकुमार ने बताया था कि इसरो का विक्रम लैंडर से संपर्क क्रैश लैंडिंग के कारण नहीं टूटा होगा. ये क्रैश लैंडिंग नहीं थी क्योंकि लैंडर और ऑर्बिटर के बीच संपर्क चैनल अब भी चालू है. उन्होंने बताया था कि संपर्क डाटा खोने का विश्लेषण किया जा रहा है.

बता दें कि 7 सिंतबर की सुबह चंद्रमा पर लैंडिंग के दौरान इसकी सतह से मात्र 2.1 किमी ऊपर लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था. इसकी वजह से उस समय विक्रम का कोई पता नहीं चल पाया था. अब ऑर्बिटर द्वारा चित्र में पता चल है कि विक्रम लैंडर रास्ता भटककर अपने निर्धारित जगह से लगभग 500 मीटर की दूरी पर पाया गया है. ऑर्बिटर ने रविवार को लैंडर विक्रम की थर्मल इमेज भेजी थी.

इससे यह उम्मीद जगी है कि अगर विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित हो जाता है तो प्रज्ञान दोबारा अपने मिशन के लिए चालू हो जाएगा. इसरो टीम इसके लिए इसरो टेलिमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) में लगातार काम कर रही है.

लैंडर के चंद्रमा की सतह पर गिरने से उसका एंटीना दबा हुआ है, जिस कारण इसरो को संपर्क स्थापित करने में कठिनाई हो रही है. विक्रम लैंडर में ऑबोर्ड कम्प्यूटर सिस्टम लगा हुआ है. कमांड मिलने पर वह अपने थस्टर्स के जरिए अपने पैरों पर फिर से खड़ा हो सकता है.

बता दें कि चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं. ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान. ऑर्बिटर से लैंडर-रोवर को दो सिंतबर को अलग किया गया था. ऑर्बिटर अभी भी अपना काम बखूबी कर रहा है और वह चांद की सतह से करीब 100 किलोमीटर ऊंचाई पर अपनी कक्षा में चक्कर लगा रहा है.

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First published: 9 September 2019, 16:10 IST
 
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