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Chandrayaan 2: इसरो ने जारी की ऑर्बिटर से भेजी गईं चांद की तस्वीरें, लैंडर विक्रम के बारे पता चली ये बात

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 October 2019, 9:11 IST

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने Chandrayaan-2 के ऑर्बिटर के हाई रिजोल्यूशन कैमरे से ली गईं तस्वीरें जारी की हैं. ऑर्बिटर ने हाल ही में चंद्रमा की सतह की ये तस्वीरें खींचकर इसरो को भेजी थीं. इन तस्वीरों में चंद्रमा की सतह पर मौजूद बड़े और छोटे गड्ढे नजर आ रहे हैं, इसरो ने कहा है कि, आर्बिटर में मौजूद आठ पेलोड ने चांद की सतह पर मौजूद तत्वों को लेकर कई सूचनाएं भी भेजी हैं.

बता दें कि आर्बिटर चांद की सतह पर मौजूद आवेशित कणों का पता लगा रहा है. ऑर्बिटर के पेलोड क्लास ने अपनी जांच में चांद की मिट्टी में मौजूद कणों के बारे में पता लगाया. अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि जब सूरज की तेज रोशनी में मौजूद एक्स किरणें जब चांद की सतह पर पड़ती हैं तो चांद की सतह चमक उठती है.

इसी के साथ चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद बेसुध पड़े चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को लेकर फिर से उम्मीदें जागी हैं. इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि अपने सौर पैनलों की मदद से विक्रम फिर काम शुरू कर सकता है. दरअसल, चांद पर आज यानी शनिवार से दिन की शुरुआत हो रही है.

ऐसे में विक्रम को लेकर कोई अच्छी खबर आने की संभावना भी बढ़ गई है. इसरो का कहना है कि चांद के आसमान में चक्कर लगा रहा चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सोडियम, कैल्शियम, एल्युमीनियम, सिलिकॉन, टाइटेनियम और लोहे जैसे महत्वपूर्ण खनिज तत्वों का पता लगाने के लिए काम कर रहा है.

इसरो ने कहा है कि, ऑर्बिटर का पेलोड अपने तय मकसद के लिए बेहतर तरीके से काम कर रहा है. वहीं, विक्रम की तलाश और उससे संपर्क करने की कोशिशों में जुटी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि अब तक विक्रम से कोई आंकड़ा प्राप्त नहीं हुआ है. खगोलविद् स्कॉट टायली ने ट्वीट कर विक्रम से संपर्क की प्रबल संभावना जताई है. उन्होंने कहा है कि विक्रम को खोजने में कामयाबी जरूर मिलेगी. बताया जा रहा है कि दिन होने के साथ ही विक्रम से संपर्क करने की कोशिशें तेज हो जाएंगी.

इसरो के एक वैज्ञानिक ने बताया कि हालांकि अब विक्रम से संपर्क करना बेहद मुश्किल होगा, लेकिन कोशिश करने में कोई परेशानी नहीं है. वहीं रात के समय चंद्रमा पर बहुत अधिक ठंड होने की वजह से विक्रम के सही सलामत होने के सवाल के जवाब में कहा कि, सिर्फ ठंड ही नहीं, बल्कि झटके से हुआ असर भी चिंता की बात है. हार्ड लैंडिंग के चलते विक्रम तेज गति से चांद की सतह पर गिरा होगा. इस झटके के चलते विक्रम के भीतर मौजूद उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. चांद के चक्कर लगा रहे नासा के लुनर रिकॉनिएसेंस ऑर्बिटर ने जो तस्वीरें भेजी थीं.

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First published: 5 October 2019, 9:11 IST
 
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