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Chandrayaan 2: आम आदमी की तरह ही वैज्ञानिक भी निभाते हैं लॉन्चिंग से पहले ये धार्मिक परंपराएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2019, 14:36 IST

अब से कुछ देर बार भारत अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान की लॉन्चिंग करने जा रहा है. भारत का ये दूसरा चंद्र मिशन है. आज हम आपको कुछ ऐसी धार्मिक मान्यताओं के बारे में बताने जा रहे हैं. जिन्हें कोई भी देश अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम के शुरु करने या लॉन्चिंग से पहले करता है. भारत ही नहीं विदेशों में भी इसी तरह की कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं.

बता दें इसरो 13 अंक को शुभ नहीं मानता. इसीलिए उसने रॉकेट PSLVC-12 के बाद रॉकेट PSLVC-14 को अपना सारथी बनाया है. भारत ही नहीं बल्कि तमाम अंतरिक्ष एजेंसियां 13 अंक को अशुभ मानती है. इसी लिए वह किसी भी अंतरिक्ष प्रोग्राम में 13 अंक को शामिल नहीं करती. इसके पीछे की वजह चांद की सतर पर उतरने वाले अपोलो-13 की विफलता से जुड़ी है.

कि अमेरिका का अपोलो-13 फेल हो गया. उसके बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने उस संख्या के नाम पर किसी अन्य मिशन का नाम नहीं रखा. यही नहीं मंगलवार को भी किसी अंतरिक्षयान की लॉन्चिंग नहीं की जाती. हालांकि 450 करोड़ रुपये लागत वाले मार्स ऑर्बिटर मिशन ने मंगलवार को ही उड़ान भरी थी. उसके बाद ये परंपरा टूट गई थी.

इसके अलावा किसी भी लांचिंग से पहले इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर की पूजा करना नहीं भूलते. पूजा के दौरान वैज्ञानिक मंदिर में रॉकेट का एक छोटा मॉडल भी चढ़ाते हैं. ताकि उन्हें उनके मिशन में सफलता मिल सके. सिर्फ भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ही नहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, रूसी वैज्ञानिक समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक अपने अभियान की सफलता के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं.

इसके अलावा रॉकेट लांचिंग के दिन संबंधित प्रोजेक्ट निदेशक नई शर्ट पहनता है. यही नहीं इसरो की सभी मशीनों और यंत्रों पर कुमकुम से त्रिपुंड बनाया जाता है. जैसा भगवान शिव के माथे पर दिखाई देता है.

 

बता दें कि रूसी अंतरिक्ष यात्री जिस रॉकेट से यात्रा करने जा रहे होते हैं, उसे तब तक नहीं देखते, जब तक कि वह उसमें बैठ नहीं जाते. इस तरह की परंपरा पिछले कई दशकों से चली आ रही है. वहीं राहु कालम के समय इसरो के वैज्ञानिक रॉकेट लांच करने के लिए उलटी गिनती शुरू नहीं करते हैं.

इसरो के मुताबिक डेढ़ से दो घंटे का यह समय किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है. हालांकि दो ग्रहों के बीच किए जा रहे किसी अभियान के मामले में, रॉकेट के लांचिंग के लिए शुभ समय संभव नहीं होता. इसलिए इसके लिए उस समय को लिया जाता है जब रॉकेट गंतव्य ग्रह की कक्षा में प्रवेश करता है. उसी के हिसाब से लॉन्चिंग की उल्टी गिनती शुरु की जाती है.

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First published: 22 July 2019, 14:12 IST
 
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