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भारत के लिए बड़ी खुशखबरी, पृथ्वी की कक्षा छोड़ चंद्रमा के ऑर्बिट की ओर बढ़ा चंद्रयान-2

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 August 2019, 11:27 IST

चंद्रयान-2 चंद्रमा की ओर तेजी से बढ़ता जा रहा है. मंगलवार रात 2.21 बजे चंद्रयान पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के लिए निकल गया है. बता दें कि चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने की प्रक्रिया को TLI यानि ट्रांस लूनर इंसर्शन कहा जाता है. इस प्रक्रिया में इसरो ने सफलता हासिल कर ली है. इससे पहले चंद्रयान-2 पृथ्वी की कक्षा में 23 दिन रहा और सात ही पृथ्वी के चार चक्कर लगाए. बता दें कि इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा से 22 जुलाई को चंद्रयान को लॉन्च किया था.

इसरो के चेयरमैन के.सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 को चंद्रमा तक पहुंचने में 6 दिन का समय लगेगा. चंद्रयान-2 ने सफलतापूर्वक लूनर ट्रांसफर ट्राजेक्टरी सिस्टम में प्रवेश कर लिया है. अब 20 अगस्त को चंद्रयान-2, चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा. बता दें कि पृथ्वी से चंद्रमा के बीच की दूरी 3.84 लाख किलोमीटर है. इसरो के मुताबिक, पृथ्वी की अंतिम कक्षा छोड़ने के दौरान यान के इंजन में 1203 सेकंड्स के लिए आग प्रज्जवलित हुई थी.

बता दें कि चंद्रयान-2 को पहले 14 जुलाई को लॉन्च किया जाना था, लेकिन कुछ खामी आने की वजह से इसे सात दिन देरी के साथ 22 अगस्त को लॉन्च किया गया था. एक सप्ताह की देरी से लॉन्च होने के बावजूद चंद्रयान चंद्रमा पर 7 सितंबर को ही पहुंचेगा. अगर चंद्रयान-2को 14 जुलाई को लॉन्च किया जाता तब भी ये सात सितंबर को ही चंद्रमा की सतह पर पहुंचता.

चंद्रयान-2 को समय पर पहुंचाने का इसरो का मकसद यही है कि लैंडर और रोवर तय शेड्यूल के हिसाब से काम कर सकें. समय बचाने के लिए चंद्रयान ने पृथ्वी का एक चक्कर कम लगाया. पहले इसे पृथ्वी के पांच चक्कर लगाने थे, पर बाद में इसका एक चक्कर कम कर दिया गया और इसने पृथ्वी के चार चक्कर ही लगाए. चंद्रयान-2 चंद्रयान पर ऐसी जगह पर लैंड करेगा जहां सूरज की रोशनी ज्यादा है. रोशनी 21 सितंबर के बाद कम होनी शुरू होगी. लैंडर-रोवर को 15 दिन काम करना है, इसलिए समय पर पहुंचना जरूरी है.

बता दें कि चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर GSLV Mark-III रॉकेट से लॉन्च किया गया था. इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं. इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारने की योजना है. चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो है. यह चंद्रयान-1 मिशन का वजन 1380 किलो था. लैंडर के अंदर मौजूद रोवर की रफ्तार 1 सेमी प्रति सेकंड है.

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First published: 14 August 2019, 11:27 IST
 
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