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Chandrayaan 2: तकनीकी खामी की वजह से लॉन्चिंग से 56 मिनट पहले रोका गया मिशन चंद्रयान

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 July 2019, 8:11 IST
(ISRO/Twitter)

Chandrayaan 2: आज तड़के सुबह करीब एक घंटे पहले चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग टाल दी गई. लॉन्चिंग को टालने की वजह तकनीकी खराबी बताई जा रही है. चंद्रयान 2 को रात 2 बजकर 51 पर GSLV Mark-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाना था, लेकिन लॉन्चिंग से 56 मिनट 24 सेकेंड पहले इसमें तकनीकी खामी आ गई. इसके बाद इसरो ने इसका काउंटडाउन रोक दिया. चंद्रयान 2 के प्रक्षेपण की नई तारीख 10 दिन बाद तय की जाएगी.

चंद्रयान 2 के रोके जाने पर इसरो का कहना है कि क्रायोजेनिक ईंधन भरते वक्त रॉकेट में खामी का पता चला. उसके बाद काउंटडाउन रोक दिया गया. इसरो का कहना है कि अब पूरे टैंक का ईंधन निकाल कर खाली किया जाएगा. उसके बाद इसकी दोबारा जांच की जाएगी. जिसमें करीब 10 दिनों का समय लगेगा. इसके बाद ही आगे का शेड्यूल तय किया जाएगा.

मिशन से पहले इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने कहा था कि हमारे काम का सबसे बड़ा उद्देश्य देश, समाज और वैज्ञानिक समुदाय के लिए लाभकारी चीजें तैयार करना है. उन्होंने कहा कि हम पुरानी हासिल ख्यातियों के भरोसे नहीं रहना चाहते, हम लगातार भविष्य की ओर देखना चाहते हैं और उन चुनौतियों की पहचान करना चाहते हैं जो हमारे काम में आड़े आ सकती हैं.

बता दें कि चंद्रयान-2 को को स्वदेशी तकनीक से निर्मित किया गया है जिसमें कुल 13 पेलोड लगाए गए है. इसमें 8 ऑर्बिटर में तीन पेलोड लैंडर 'विक्रम' और दो पेलोड रोवर 'प्रज्ञान' में हैं. पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया का है. लैंडर 'विक्रम' का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है. वहीं दूसरी ओर 27 किलोग्राम 'प्रज्ञान' का मतलब संस्कृत में 'बुद्धिमता' से है.

भारत पहला ऐसा देश है जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुप पर अपना कोई अंतरिक्ष यान उतारेगा. इससे पहले किसी देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना कोई यान नहीं उतारा है. इसरो के मिशन चंद्रयान 2 से चांद के बारे में समझ सुधारने में मदद मिलेगी. साथ ही ये ऐसी नई खोज होंगी. जिनका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा. 3,850 किलोग्राम वजनी यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ उड़ान भरेगा.

भारत ने 'चंद्रयान-2' को बनाने में करीब 978 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसरो का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित मिशन माने जाने वाले 'चंद्रयान-2' की लॉन्चिंग के बाद भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बन जाएगा.

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First published: 15 July 2019, 8:11 IST
 
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