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Chandrayaan 2: दुखी होने की जरूरत नहीं, मिशन चंद्रयान पूरी तरह से नहीं हुआ फेल

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 September 2019, 10:30 IST

भारत के 11 साल से प्रतीक्षित चंद्रयान मिशन को उस समय झटका लगा, जब लैंडर विक्रम का चंद्रमा के सतह से महज 2.1 किलोमीटर पहले ISRO से संपर्क टूट गया. इसके साथ ही चंद्रयान-2 मिशन का भविष्य अंधेरे में चला गया. इसरो चीफ के. सिवन ने संपर्क टूटने की घोषणा करते हुए कहा कि चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी पहले तक लैंडर का प्रदर्शन हमारी योजना के अनुरूप था. लेकिन इसके बाद उसका संपर्क टूट गया.

इसके बाद चर्चा हो रही है कि चंद्रयान 2 मिशन फेल हो गया. हालांकि यह पूरी तरह सत्य नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि अभी इस मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता. हो सकता है कि लैंडर से पुन: संपर्क स्थापित हो जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लैंडर विफल भी हो गया होगा तब भी चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर एकदम सामान्य है. 

ऑर्बिटर चांद की ऑर्बिट पर लगातार परिक्रमा कर रहा है, इसलिए 978 करोड़ रुपये लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है. मीडिया को इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत ही नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर के नुकसान के बाद भी मिशन का 95 प्रतिशत हिस्सा सफल रहा.

अधिकारी ने बताया कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है. यह ऑर्बिटर एक साल तक चंद्रमा की तस्वीरें इसरो को भेजेगा. ऑर्बिटर कुछ समय बाद लैंडर की तस्वीरें भी भेज सकता है. इससे लैंडर की स्थिति के बारे में पता चल सकता है. 3.8 टन वजन वाला ऑर्बिटर अभी भी देश की उम्मीदों पर काम कर रहा है.

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First published: 7 September 2019, 10:12 IST
 
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