Home » इंडिया » Jayalalitha's stickers on food packets made online world angry
 

चेन्नई बाढ़ः राहत सामग्री पर जबरी चिपकाई जा रही है जयललिता की तस्वीर

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 8 December 2015, 12:19 IST
QUICK PILL
  • तमिलनाडु में बाहर से आने वाले बाढ़ राहत सामग्री भरे ट्रकों को रोककर उनमें रखे पैकेटों-बॉक्सों पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता की जबरन फोटो लगाई जाती है. इसके बाद  इसे सरकारी शिविरों में भेजा जा रहा है. 
  • मुख्यमंत्री की इस हरकत से नाराज लोगों ने सोशल मीडिया के जरिये जाहिर किया अपना गुस्सा. फेसबुक-ट्विटर पर फोटो-पोस्ट के जरिये सामने लाई जा रही है सच्चाई.

एक तरफ सेना, नौसेना और बचाव दल एक साथ मिलकर चेन्नई में आई विनाशकारी बाढ़ में फंसे हजारों लोगों को बचाने और राहत पहुंचाने में जुटे हैं. वहीं, आसपास के शहरों-राज्यों से भी लोग यहां पर मदद के लिए पहुंच रहे हैं. 

चेन्नई, कोच्चि, कोयंबटूर और यहां तक की पुणे के लोग सोशल मीडिया के जरिये राहत सामग्री जुटाकर खुद से ही इसे चेन्नई भेजवाने में जुटे हैं. लेकिन, यह राहत सामग्री पीड़ितों तक सीधी नहीं पहुंच रही है. पहले कहीं से भी आने वाली राहत सामग्री से भरे ट्रकों को कुछ जगहों पर रोककर उनमें रखे पैकेटों-बॉक्सों पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता की फोटो लगाई जाती है. इसके बाद राहत सामग्री को निर्धारित स्थानों की जगह सरकारी शिविरों में भेजा जा रहा है. 

एक व्यक्ति ने फेसबुक पर पोस्ट किया, "कोयंबटूर से आने वाले छह ट्रकों को श्रीपेरमबुदूर में रोका जाता है और हर पैकेट पर अम्मा के स्टिकर्स चिपकाए जाते हैं. राहत सामग्री के साथ कुड्डालोर गए मेरे कई मित्रों ने शिकायत की है कि तमाम ठग और गुंडों द्वारा हर पैकेट पर अम्मा के स्टिकर चिपकाने के बाद ही वाहनों को आगे जाने दिया जा रहा है. बेशर्म राजनीतिक रणनीति. मुझे इस बारे में बात करते हुए बहुत शर्म आ रही है लेकिन सोचता हूं कि दूरदराज में पीड़ित आंख मूंदकर यह विश्वास करेंगे कि यह अम्मा का काम है."

चेन्नई के लोगों की पसंदीदा मुख्यमंत्री नहीं चाहतीं कि शहर से होकर जाने वाली राहत सामग्री उनकी फोटो के बगैर पीड़ितों तक पहुंचाई जाए. ऐसे में लोगों को अपना गुस्सा उतारने और उसे ट्विटर पर जाहिर करने में कहां ज्यादा वक्त लगता है.

Jaylalita
Jaylalita
Jaylalita

कोच्चि से राहत सामग्री की आपूर्ति चेन्नई के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए वाहन के साथ जाने वाले अजय अप्पाडेन ने कैच को बताया कि उनसे पहले जा चुके वाहनों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि रास्ते में तमाम गुंडे वाहनों को सरकारी शिविरों की ओर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं. 

अजय ने कहा, "जब मेरे दोस्तों को पता चला कि मैं प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने वाले आपूर्ति वाहन के साथ जा रहा हूं, मुझे बचाव और राहत कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े कई लोगों ने चेतावनी दी कि कुछ गुंडे वाहनों को रोककर उनमें रखे पैकेटों पर मुख्यमंत्री की फोटो चिपकाकर उन्हें जबरन सरकारी शिविरों की तरफ भेज रहे हैं. मुझे यह भी चेतावनी दी गई कि जो लोग उन गुंडों की बात नहीं मानते हैं, उनकी राहत सामग्री को पानी में फेंक दिया जाता है."

विपक्ष ने पहले ही राज्य के राहत उपायों की आलोचना करते हुए कहा है कि तमाम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है. 

तमाम जिलों के प्रभावित लोगों को तत्काल मुआवजा न मिलने पर डीएमके और पीएमके के प्रमुखों ने अपनी आवाज उठाई थी. 

इस बीच सैकड़ों सैन्य कर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और राहत दल हजारों जरूरतमंदों और बाढ़ में फंसे लोगों को खाद्य सामग्री, स्वास्थ्य किट, पानी और कंबल वितरित कर रहे हैं. 

अजय कहते हैं कि वो अभी भी गुंडों से बातचीत करके राहत सामग्री पहुंचाने की ख्वाहिश रखे हुए हैं. अच्छी बात है कि इस तरह की हरकतें अभी भी भले लोगों को नहीं रोक पा रही हैं 

First published: 8 December 2015, 12:19 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

पिछली कहानी
अगली कहानी