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अजित जोगी: धमाका तो अभी बचा हुआ है, लेकिन धमाका होगा जरूर

राजकुमार सोनी | Updated on: 6 July 2016, 8:10 IST

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए रायपुर पहुंचे हैं. इसमें वित्तमंत्री अरुण जेटली, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित अन्य कई दिग्गज नेताओं को भी हिस्सा लेना है. जेटली पहुंचने के साथ ही सबसे पहले जोगी से हाथ मिलाते हैं और पूछते हैं, "अरे... आप भी यहां है? कैसे हैं आप? क्या धमाका कर रही है आपकी पार्टी?" 

जोगी अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ उत्तर देते हैं, "धमाका तो अभी बचा हुआ है, लेकिन धमाका होगा जरूर."

जेटली के पहले भाजपा के एक पूर्व मंत्री जोगी से मिलकर कहते हैं, "कांग्रेस को तो आपने आईसीयू वार्ड में भेज दिया है. अब हमारी पार्टी के लिए भी कुछ करिए."

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जोगी बगैर लाग-लपेट के कहते हैं, "भाजपा ने अपने चिंतन शिविर में मेरी पार्टी की उपस्थिति को लेकर बेहद चिंता जताई है. जब आप सब लोग मेरी चिंता कर ही रहे हैं तो भेजिए उन सबको मेरे पास जिनका जनाधार है, और वे हाशिए पर हैं." 

पूर्व मंत्री हंसते हुए कहते हैं, "जल्द ही भेजता हूं दो-चार को. जोगी कहते हैं- दो-चार क्यों पूरी पलटन भेजिए सबको सम्मान मिलेगा."

उपेक्षितों को जोडऩे पर जोर

पत्रिका

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नाम की नई पार्टी के गठन के बाद जोगी यही कर रहे हैं. फिलहाल उनका और उनकी पार्टी से जुड़े सारे लोगों का जोर इस बात पर हैं कि कौन किस पार्टी से खफा है और उसे कैसे जनता कांग्रेस का हिस्सा बनाया जा सकता है. 

रायपुर के जिस सागौन बंगले में जोगी रहते हैं वहां कांग्रेस-भाजपा से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है. जोगी का दावा है कि पहले वे रोज सौ-दो सौ लोगों से मिलते थे, लेकिन अब दो हजार लोगों से मेल-मुलाकात करनी पड़ रही है. 

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हालांकि कांग्रेस और भाजपा के अधिकृत प्रवक्ताओं का दावा है कि पार्टी में सब कुछ ठीक-ठाक है और कार्यकर्ताओं के असंतुष्ट होने की खबर महज मीडिया की उपज है, मगर जोगी के बंगले में उमड़ रही भीड़ कुछ अलग ही कहानी बयां करती हैं. 

जगदलपुर जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव पद से इस्तीफा देकर जोगी की पार्टी पर भरोसा जताने वाले नवनीत चांद कहते हैं, "कांग्रेस को अब भी नेताओं के पीछे झोला लेकर चलने वाले कार्यकर्ताओं की जरूरत हैं. जो लोग धरातल पर काम कर रहे हैं पार्टी ने ऐसे सभी लोगों को भुला दिया है."

नवनीत कहते हैं, "पार्टी छोड़ने के पहले मैंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल से भी चर्चा की थी, मगर मुझे इस बात का जवाब नहीं मिल पाया कि पार्टी में मेरी हैसियत क्या रहेगी? क्या जीवनभर मैं दरी बिछाने वाला कार्यकर्ता रहूंगा या मुझे भी कोई महत्व मिलेगा?"

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जोगी की पार्टी का दामन थामने वाले बस्तर इलाके के एक प्रमुख कांग्रेसी बोमड़ा राम का भी कहना है कि वे बैकफुट में नहीं बल्कि फ्रंट में रहकर काम करना चाहते हैं. 

जबकि स्वाभिमान मंच के एक प्रमुख स्तंभ रहे महेश देवांगन का कहना है कि उनका और उनके साथियों का जुड़ाव इसलिए संभव हो पाया क्योंकि जोगी छत्तीसगढ़ की अस्मिता को बढ़ावा देने की बात करते हैं. 

चार फार्मूले पर जोर

जोगी कहते हैं कि कांग्रेस में जब तक इंदिरा गांधी की प्रभावी मौजूदगी कायम थीं तब तक यह कहा जाता था कि किसी ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरे को भी चुनाव में खड़ा कर दोगे तो वह जीत जाएगा, लेकिन अब स्थितियां काफी बदल गई है. अब सबसे पहले यह देखा जाता है कि जो चुनाव लड़ रहा है उसकी व्यक्तिगत इमेज कैसी है? उसका बूथ प्रबंधन कैसा है? 

जोगी पूछते हैं, जिस शख्स को लोग वोट देंगे क्या वह अपने राज्य और देश के लिए विजन रखता है? उसकी जीत से राज्य और देश को कैसा नेतृत्व मिलेगा? प्रत्याशी की अपने समाज में कितनी पैठ है और उसकी पार्टी की छवि कैसी है.

जोगी कहते हैं, "कांग्रेस अब एक दबी हुई पार्टी है जबकि उनकी जनता कांग्रेस नए और ऊर्जावान लोगों को जोड़कर एक नया समीकरण तय करने में जुटी हुई है. उनका मानना है कि दिल्ली के आवाम ने भी आम आदमी पार्टी पर सिर्फ इसलिए भरोसा जताया क्योंकि वहां के लोग अपने आसपास की सड़ांध से उब चुके थे और एक नई संरचना देखना चाहते थे."

जोगी बताते हैं, "पार्टी के गठन से पहले कुछ निजी एजेंसियों ने सर्वे किया. जब यह पता चला कि लोग सत्ता बदलना चाहते हैं और जोगी को एक बार फिर मुख्यमंत्री देखने के इच्छुक हैं तब नई पार्टी बनाई गई."

अब तक साढ़े तीन लाख सदस्य

जोगी की नई पार्टी के एक प्रमुख स्तंभ योगेश तिवारी का दावा है कि कुल 11-12 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन पार्टी की घोषणा के एक महीने के भीतर साढ़े तीन लाख लोग सदस्य बन गए हैं.

तिवारी कहते हैं कि जोगी जब कांग्रेस में थे तब उन्होंने और उनके सहयोगियों ने ही साढ़े सात लाख सदस्य बनाए थे. जोगी अपने सदस्यों के दम पर संगठन के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते थे मगर कांग्रेस के बड़े नेताओं सहित राहुल गांधी को यह रास नहीं आया और चुनाव आगे बढ़ा दिया गया.

अजित जोगी ने दावा किया कि उनकी पार्टी छत्तीसगढ़ की सभी 90 सीटों से चुनाव लड़ेगी

कांग्रेस से निष्कासित जोगी के पुत्र अमित जोगी अपने पिता की पार्टी को सजाने-संवारने में लगे हैं. उनका जोर इस बात पर है पार्टी हर रोज कोई एक्शन जरूर हो जिसकी चर्चा लंबे समय तक कायम रहे. 

जोगी की पत्नी रेणु जोगी फिलहाल कांग्रेस में हैं और कई मौकों पर यह सफाई दे चुकी हैं कि पार्टी की प्रति उनकी निष्ठा को लेकर शक न किया जाए. कांग्रेस के 39 विधायकों में से 11 विधायक ऐसे हैं जो जोगी के करीबी माने जाते हैं. इनमें से दो विधायक आरके राय और सियाराम कौशिक हर मौके पर जोगी के साथ ही खड़े हुए दिखाई देते हैं.

विधायक राय यहां तक कह चुके हैं कि वे जोगी के साथ हैं और उनके साथ रहेंगे. कांग्रेस में दम हैं तो उन्हें पार्टी से निकालकर दिखाए. राय की इस चुनौती के बाद भी कांग्रेस उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है. 

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जोगी कहते हैं, "फिलहाल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को सांप सूंघ गया है. सब जानते हैं कि अगर किसी को बाहर का रास्ता दिखाया गया तो बगावत हो जाएगी. इससे बेहतर है कि सबके नखरे को सह लिया जाय. जोगी का दावा है कि अभी चुनाव को ढाई साल बाकी है."

इन दो सालों में उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह गांव-गांव तक पहुंच जाएगा. पार्टी की दमदार उपस्थिति के बाद वे सभी लोग कांग्रेस और भाजपा को छोड़कर उनके साथ आ जुड़ेंगे जो किसी न किसी स्तर पर उपेक्षित होते रहे हैं.

नई पार्टी बनने के साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जोगी के प्रत्याशी छत्तीसगढ़ की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे? 

जोगी ताल ठोकते हैं, "यदि प्रदेश में 180 सीट भी हो जाएगी तो भी उनका प्रत्याशी एक योद्धा बनकर चुनाव समर में जरूर उतरेगा. कितनी सीटों पर जीत की उम्मीद है? इसपर जोगी कहते हैं, सबको हमसे ही उम्मीद है. 

First published: 6 July 2016, 8:10 IST
 
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