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छत्तीसगढ़ बना नागलोकः सांप काटने से अब तक 494 की मौत

शिरीष खरे | Updated on: 1 September 2016, 7:49 IST

छत्तीसगढ़ में बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही सांपों के काटने और लोगों की अकाल मौतों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है. इस साल भी मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

महज तीन महीनों के दौरान प्रदेश के सभी संभागों के सरकारी अस्पतालों से राजधानी रायपुर के स्वास्थ्य विभाग को भेजी पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक सर्पदंश से अब तक 494 लोगों की मौत हो चुकी है. गौरतलब है कि प्रदेश के कुल 27 में दो जिलों ने सर्पदंश से होने वाली मौतों के आंकड़े नहीं भेजे हैं. यह जिले हैं गरियाबंद और मुंगेली.

इन मौतों की मुख्य वजह जिला अस्पतालों में एंटीवेनम का अभाव बताया जा रहा है. इसके अलावा मानक यंत्र और विशेषज्ञों की कमी भी लोगों की अकाल मौत का कारण है.

रायगढ़ जिले में बीते तीन महीने के भीतर सांप काटने से 74 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के गृह जिले राजनांदगांव में 48 लोगों की मौत हो चुकी है. इनके अलावा जांजगीर-चांपा, महासमुंद, कबीरधाम, सरगुजा, कोरबा, नारायणपुर और धमतरी सहित कई जिलों के सरकारी अस्पतालों से सांपों के काटने के मामले लगातार आ रहे हैं.

बारिश के साथ ही प्रदेश में सांपों का कहर शुरु हो जाता है. चौंकाने वाली बात है यह है कि चार महीने में सांप काटने के एक हजार से ज्यादा प्रकरण दर्ज हो चुके हैं.

मृतकों की तादाद अधिक इसलिए भी हो सकती है क्योंकि जंगली इलाकों में सांपों के बहुत से मामले सामने ही नहीं आ पाते

छत्तीसगढ़ देश का ऐसा राज्य है जहां हर साल सर्पदंश से 500 से ज्यादा लोग अधिकृत तौर पर मौत के शिकार बनते जाते हैं. इस बारिश में दुर्ग, रायपुर और बस्तर संभाग से सर्पदंश के सबसे ज्यादा प्रकरण सामने आए हैं. 

सांप के जहर से होने वाली मौतों में गरियाबंद और मुंगेली जिलों का ब्यौरा नहीं आया है. जाहिर है कि यहां के आकड़े सरकारी रिकार्ड में शामिल नहीं हुए हैं.

मरने वालों की तादाद अधिक इसलिए भी हो सकती है क्योंकि जंगली इलाकों में सांपों के बहुत से मामले सामने ही नहीं आ पाते. इसके बावजूद संभागीय स्तर पर देखें तो दुर्ग में 112, बिलासपुर में 84, सरगुजा में 68, रायपुर में 84 और बस्तर संभाग में 69 लोगों की मौत हो चुकी है.

ऐसे बना नागलोक

जशपुर जिले से आए ब्योरे के मुताबिक चार महीने के भीतर सर्पदंश से चार लोगों के मरने की पुष्टि हुई है. हालांकि हर साल यहां बड़ी संख्या में सर्पदंश से मौत के आकड़े आते हैं. जशपुर जिले के फरसा बहार गांव और उसके आसपास सांपों की संख्या इतनी है कि इस जगह को नागलोक के तौर पर पहचाना जाता है.

यहां सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां हैं. इनमें कोबरा की चार और करैत सांप की तीन अत्यंत जहरीली प्रजातियां भी हैं. यहां की समशीतोष्ण जलवायु और भुरभुरी मिट्टी सांपों के लिए अनुकूल मानी जाती है. जानकार बताते हैं कि जंगलों की कटाई के चलते नागलोक का विस्तार हुआ है.

बीते पांच साल के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां 4,328 लोगों की जान सांप काटने से हुई हैं. इनमें सबसे कम वर्ष 2011-12 में 450 तो वर्ष 2014-15 में सबसे ज्यादा 1166 लोगों की मौत हुई है.

अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल, रायपुर के एमडी डॉ. योगेन्द्र मल्होत्रा छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए सलाह देते हुए बताते हैं, 'सांप काटने के बाद अस्पताल ले जाने से पहले काटे गए स्थान को रस्सी या कपड़े से कसकर बांधे. इससे जहर एक ही जगह ठहर जाएगा. नई ब्लेड से सर्पदंश वाले स्थान को काटकर खून निकाले. इससे जहर निकलेगा. इसके बाद बर्फ के टुकड़े को वहां रखा जा सकता है. मरीज को सीधे अस्पताल ले जाएं. किसी ओझा या तांत्रिक के चक्कर में न पड़ें.'

पुलिस को सूचना क्यों

दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र, रायपुर के निदेशक डॉ. प्रबीर चटर्जी कहते हैं, 'छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश देश के ऐसे राज्य हैं जहां सांप के काटने के बाद पीड़ित का उपचार कराने के लिए पुलिस को सूचना देनी पड़ती है. 

कई बार यह औपचारिकता पूरी करने के चलते पीड़ित की जान चली जाती है. यह बंदिश हटानी चाहिए, क्योंकि जहरीला होने के बावजूद सांप के खिलाफ एफआईआर तो हो नहीं सकती. फिर इसे अपराधिक प्रकरण की श्रेणी में रखने का क्या तुक है?'

जिलेवार बीते तीन महीनों में मृतकों की संख्या

  • रायगढ़ - 74
  • राजनांदगांव - 48
  • जांजगीर-चांपा - 46
  • महासमुंद - 45
  • कबीरधाम - 42
  • सरगुजा - 38
  • कोरिया - 33
  • धमतरी - 27
  • दंतेवाड़ा - 27
  • कोरबा - 21
  • बेमेतरा - 18

साल दर साल यही कहानी

  • 2015-16 – 855 मौतें
  • 2014 -15 116 मौतें
  • 2013-14 771 मौतें
  • 2012-13 592 मौतें
  • 2011-12 450 मौतें

(सभी आंकड़े छत्तीसगढ़ राज्य स्वास्थ्य विभाग से)

First published: 1 September 2016, 7:49 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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