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छवि चमकाने चली लहर, गांव-गांव और डगर-डगर

राजकुमार सोनी | Updated on: 13 May 2016, 8:13 IST

माओवाद प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में इन दिनों लोक सुराज यात्रा की चर्चा है. राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा कड़ी गर्मी में निकाली गई यात्रा से जुड़ा एक विज्ञापन इन दिनों लोकप्रिय हो रहा है. विज्ञापन छत्तीसगढ़ी बोली में है जिसमें कहा गया है कि जनहित के सुग्घर योजना, एसी कमरा मं बइठ के नइ बन सकय, एहा चौपाले मं बने बनथे... इसका मतलब है कि जनता के हित की कोई भी योजना एसी कमरे में बैठकर नहीं बल्कि गांव-देहांत के चौपाल में ही बन सकती है.

विज्ञापन में लिखे गए इस स्लोगन को दो तरीके से देखा समझा जा रहा है. राजनीतिज्ञ विश्लेषक मानते हैं कि मुख्यमंत्री एसी कमरे से सिर्फ इसलिए बाहर निकले हैं क्योंकि नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले, विदेश में बैंक खाते और पनामा पेपर्स मामले में उनके परिवार के सदस्यों का नाम किसी न किसी रूप में उछलता रहा है. जानकारों का कहना है कि दो और एक रुपए किलो में चावल बांटने की योजना में हुए फर्जीवाड़े में कई लाख परिवारों के राशनकार्ड निरस्त होने से भी उनकी स्थिति नाजुक हुई है. आज उनकी छवि मिस्टर क्लीन वाली नहीं रह गई है.

एक रुपए किलो में चावल योजना में हुए फर्जीवाड़े में कई लाख परिवारों के राशनकार्ड निरस्त होने से उनकी स्थिति नाजुक हुई है


ऐसे में उनका अपनी छवि को मांजना और चमकाना जरूरी हो गया है, जबकि जल-जंगल-जमीन के मसलों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में गांव को दिए जाने वाले अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं सो यात्रा के जरिए मुख्यमंत्री यह जताने का प्रयास कर रहे हैं कि वे ग्रामीण जनता के साथ है और उनके हितैषी है.

रमन सिंह पिछले 28 अप्रैल से लोक-सुराज नाम की यात्रा पर निकले हैं और उनका यह अभियान 24 मई तक जारी रहेगा. उनके इस अभियान के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कांग्रेस से निष्कासित पुत्र अमित जोगी ने ग्राम आवाज यात्रा नाम की यात्रा निकाली है. साथ ही आम आदमी पार्टी ने भी रमन मुक्ति यात्रा निकालकर मोर्चा खोल रखा है. इस तरह तीन यात्राएं एक साथ जारी हैं.

खुद को तौलने की कवायद

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की है हालांकि उनका ध्यान गांव वालों की छोटी मोटी दिक्कतों को दूर करने पर ज्यादा है. वे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नलकूप, कुंओं और हॉस्टल के लिए राशि तो मंजूर कर ही रहे हैं, पहली बार उनकी टीम गांव की जरूरतों के हिसाब से योजना बनाने पर भी ध्यान दे रही है.

अपनी पहली यात्रा में जब मुख्यमंत्री 28 अप्रैल को माओवादी इलाके अबूझमाड़ के एक गांव बासिन पहुंचे तो ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने तत्काल एक तालाब निर्माण का आदेश दिया. जब उन्हें बताया गया कि लोग रोजगार के अभाव में इधर-उधर भटक रहे हैं तो उन्होंने मनरेगा के तहत गांव की एक उजाड़ भूमि को समतल करने का काम भी ग्रामीणों को तुरन्त सौंप दिया.

उनकी टीम गांव की जरूरतों के हिसाब से योजना बनाने पर भी ध्यान दे रही है


अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ग्रामीणों को प्राकृतिक जल स्रोतों और नदी- नालों के पानी को बचाने की अपील लगातार कर रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह शायद यह भी हैं नदी-नाले, पोखर सूखे हुए हैं और प्रदेश की 149 तहसीलों में से 122 में सूखा पड़ा है. प्रदेश के तीन सौ से ज्यादा किसानों ने भयानक सूखे और कर्ज की वजह से मौत को गले लगा लिया है. हालांकि सरकार इन मौतो की वजह हमेशा पारिवारिक कलह और शराब का सेवन बताती रहती है.

आम आदमी पार्टी के संयोजक संकेत ठाकुर लोक-सुराज यात्रा को ग्रामीण किसानों को अपनत्व का भ्रम देने वाली यात्रा मानते हैं. वे कहते हैं, मुख्यमंत्री यह बताने की जुगत कर रहे हैं कि उनकी सरकार गांव-गरीब और किसानों के साथ खड़ी है और कटिबद्ध है. ठाकुर आगे कहते हैं, 'प्रदेश में शराब की नदियां बह रही है और मुख्यमंत्री पानी बचाने की अपील कर रहे हैं. मुख्यमंत्री और उनके सिपहसलार इस बात को भली-भांति जानते हैं कि प्रदेश के छोटे-बड़े लगभग 36 लाख किसानों की नाराजगी भारी पड़ सकती है और एक सूखा चौथी बार की जीत के लिए की जा रही तैयारियों पर पानी फेर सकता है, इसलिए आगामी चुनाव के मद्देनजर किसानों के जख्मों पर मरहम लगाया जा रहा है.”

लौह नगरी के रुप में विख्यात दल्ली राजहरा क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता कुशल ठाकुर मुख्यमंत्री की यात्रा को सरकारी खर्चें पर पार्टी और खुद की छवि को चमकाने का उपक्रम मानते हैं. वे कहते हैं, यदि लोग-बाग सरकारी योजनाओं से लाभ हासिल कर रहे होते तो राजधानी रायपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री के जनदर्शन कार्यक्रम में शिरकत और शिकायत नहीं करते. लोगों को गांवों में राशन नहीं मिल रहा है. नमक और केरोसीन की कालाबाजारी हो रही है. मुख्यमंत्री यात्रा के जरिए खुद को तौल रहे हैं. शायद उनकी कोशिश जनता के बीच खुद की छवि का आकलन करने की भी है.

ठाकुर की इस बात में इसलिए भी दम दिखाई देता हैं क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि गर्मी में वे अपना पसीना यूं ही नहीं बहा रहे हैं. जैसे चावल का एक दाना देखकर यह पता चल जाता है कि चावल पका है या नहीं वैसे ही वे जनता के बीच जाकर यह जानने की कवायद कर रहे हैं कि उनकी सरकार और योजनाओं पर लोगों का भरोसा कायम है या नहीं?

सवाल दर सवाल

यात्रा के दौरान सरकारी योजनाओं की पुस्तिका बांटी जा रही है तो मुख्यमंत्री किसी बुर्जुग महिला से महुआ और इमली की भेंट भी स्वीकार कर रहे हैं. कहीं बच्चों को वे मीठा दूध पिला रहे हैं तो कभी बच्चों से पहाड़ा सुनने के बाद उन्हें चॉकलेट भी भेंट कर रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल मुख्यमंत्री की इस शैली को एक शिगूफा करार देते हुए कहते हैं, किसी के कंधे पर हाथ रख देने से या किसी गरीब के घर भोजन कर लेने से प्रचार तो मिल जाता हैं लेकिन इससे असल मुद्दे खत्म नहीं हो जाते. प्रदेश की जनता अब भी यह जानना चाहती है कि सरकार अपने 13 सालों के कार्यकाल में माओवाद का खात्मा क्यों नहीं कर पाई? आदिवासियों की मौत क्यों हो रही है? छत्तीसगढ़ एक पिछड़ा और गरीब राज्य क्यों है?

अमित जोगी ने अपनी सात मांगों को लेकर ग्राम आवाज नाम की यात्रा निकाल रखी है


इधर भूपेश के धुर विरोधी अमित जोगी ने अकाल में प्रभावित परिवारों को 35 किलो चावल देने, किसानों का कर्ज माफ करने, गांवों में स्वच्छ पेयजल, निस्तारी और सिंचाई के लिए ग्रामीणों को पानी सहित सात मांगों को लेकर ग्राम आवाज नाम की यात्रा निकाली है. इस यात्रा को जोगी पुत्र ने 20 हजार गांवों की आवाज बताया है, मगर उनकी इस यात्रा में एक संदेश यह भी छिपा हुआ है कि जब वे निष्कासित होकर गांव-गांव तक आंदोलन और सभाएं कर सकते हैं तो फिर विपक्ष के तौर पर कांग्रेस रमन की लोक सुराज यात्रा का जवाब क्यों नहीं दे पा रही है?

आम आदमी पार्टी की यात्रा दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में निकल रही हैं. इस यात्रा में किसानों की आत्महत्या का मसला जोर-शोर से उठ रहा है वहीं प्रदेश में बढ़ती शराबखोरी को लेकर भी हमले किए जा रहे हैं

First published: 13 May 2016, 8:13 IST
 
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