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छत्तीसगढ़ में हर दिन तीन बच्चे यौन शोषण के शिकार

शिरीष खरे | Updated on: 9 February 2016, 15:30 IST

छत्तीसगढ़ में बच्चों के यौन शोषण की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां हर दिन औसतन तीन बच्चे किसी न किसी तरह के यौन शोषण के शिकार होते हैं. 

चौंकाने वाली बात है कि बीते तीन साल से भी कम अवधि में यहां पॉक्सो (यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण) एक्ट के तहत दो हजार 708 प्रकरण दर्ज हुए हैं. इनमें महज 193 प्रकरणों में ही सजा सुनाई गई है. सभी जिलों के पुलिस मुख्यालयों में दर्ज मामले इस बात की हकीकत बयान करते हैं. 

एक्ट लागू होने की तारीख यानी 14 नवंबर 2012 से 31 मार्च 2015 तक राजधानी रायपुर में बच्चों के यौन शोषण के 288 मामले उजागर हुए. इस लिहाज से दुर्ग में 256, रायगढ़ में 190, कोरिया में 165 और जशपुर में 157 मामले दर्ज हुए. कुल 13 जिले संवेदनशील श्रेणी में माने गए हैं.

पुलिस के अनुसार एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत इनमें दुराचार, अपहरण, छेड़छाड़ और अश्लील बातचीत के मामले शामिल हैं.

लंबित प्रकरणों का अंबार

पाक्सो के तहत विशेष अदालतों के जरिए त्वरित सुनवाई की व्यवस्था है. इसके बावजूद न्यायालय में प्रस्तुत 2377 प्रकरणों में 1732 मामले लंबित हैं. सबूतों के अभाव में 452 आरोपी दोषमुक्त भी किए जा चुके हैं. जागरुकता के अभाव के चलते एक्ट की अनदेखी हो रही है.

सामान्यत: धारा 23 का पालन नहीं होता, जिसमें लैंगिक अपराध होने पर किसी भी स्थिति में बच्चे की पहचान प्रकट नहीं की जा सकती. अभी कुछ दिनों पहले एक खिलाड़ी पर एक चिकित्सक ने गंभीर आरोप लगाए थे. चिकित्सक ने खिलाड़ी बच्चों के खेलकूद के सामान्य से वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल भी किया. 

पुलिस ने चिकित्सक के खिलाफ पाक्सो एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध तो किया लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया. नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी आसाराम बापू को भी पाक्सो के तहत ही गिरफ्तार किया गया है.

न्यायालय में प्रस्तुत 2377 प्रकरणों में 1732 मामले लंबित हैं. सबूतों के अभाव में 452 आरोपी दोषमुक्त भी किए जा चुके हैं

यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा के लिए 2012 को संसद में पारित यह विशेष कानून 18 वर्ष से कम व्यक्ति को बच्चे के तौर पर परिभाषित करता है. इसमें आरोप साबित होने पर 7 से लेकर 10 वर्ष तक कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है.

लोग अभी अनजान हैं

सुप्रीम कोर्ट के अदिवक्ता विक्रम श्रीवास्तव बताते बैं, 'पास्को नया कानून होने के चलते लोग अभी अनजान हैं. यह इतना सख्त है कि जानकारी न देने पर भी व्यक्ति को सजा हो सकती है. वहीं, विशेष पुलिस इकाई को भी सशक्त तरीके से काम करने के लिए प्रशिक्षिण देने की जरुरत हैं. 

कानून में विशेष न्यायालय गठित करने का प्रावधान बढिया है, लेकिन इसे बच्चों के हित में इस प्रकार तैयार करना होगा कि वे खुलकर अपनी बात रख सकें. छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अलग-अलग बोली बोलने वाले बच्चों के लिए अनुवादक की सुविधा देनी होगी.'

होंगे प्रशिक्षिण कार्यक्रम

छत्तीसगढ़ सीआईडी को ओएसडी पीएन तिवारी के शब्दों में, 'पुलिस विभाग हर रेंज के पुलिस कर्मचारियों को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षिण कार्यक्रम करेगी. यह कार्यक्रम बस्तर और बिलासपुर से शुरु होंगे. हर साल पास्को एक्ट के बारे में 600 से 700 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसीलिए इस एक्ट के तहत सभी जिलों से मुकद्दमें कायम हो रहे हैं.'

First published: 9 February 2016, 15:30 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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