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छत्तीसगढ़ के पत्रकार प्रभात सिंह फिर से लापता

वरीशा सलीम | Updated on: 18 September 2016, 7:51 IST

छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में काम करने वाले पत्रकार प्रभात सिंह शुक्रवार की शाम से लापता बताए जा रहे हैं. उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ बता रहा है. प्रभात के करीबियों और साथी पत्रकारों का आरोप है कि एक बार फिर बस्तर पुलिस ने प्रभात को गैरकानूनी तरीके से उठा लिया है.

इसी साल मार्च महीने में प्रभात सिंह को बस्तर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उन पर आईटी एक्ट की धारा 67 और 67(a) और पैसों के लेनदेन में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. इस मामले में प्रभात को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. फिलहाल वो जमानत पर जेल से बाहर थे.

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शुक्रवार शाम सात बजे के बाद से पत्रकार प्रभात सिंह का मोबाईल फोन बंद है. इस वजह से उनके परिवार के लोग और साथी पत्रकार चिंतित हैं. दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर प्रभात ने एक वाट्सअप ग्रुप में संदेश लिखा था कि उन्हें कोतवाली प्रभारी जगदलपुर का धमकी भरा फोन आया है.

एफआईआर, अग्नि और समाजिक एकता मंच के लोगों से सुरक्षा दिलाने के दरखास्त लेकर काफी दिनों से भटक रहा हूं

प्रभात सिंह अपने केस के सिलसिले में अपने वकील से मिलने जगदलपुर कोर्ट गए हुए थे. जब वो वहां से लौट रहे थे तब उनके पास कोतवाली प्रभारी जगदलपुर का फोन आया था. शुक्रवार शाम चार बजे प्रभात ने व्हाट्स एप पर एक दूसरा मैसेज भेजा. इस मैसेज में प्रभात ने विस्तार से बताया कि कैसे पूरे बस्तर संभाग के किसी पुलिस थाने में उसकी शिकायत दर्ज नहीं की जा रही है.

वो लिखते हैं, ’बस्तर संभाग के किसी पुलिस थाने में मेरी शिकायत नहीं ली जा रही है. कुछ मामलों में एफआईआर, अग्नि और समाजिक एकता मंच के लोगों से सुरक्षा दिलाने के दरखास्त लेकर काफी दिनों से भटक रहा हूं.’ प्रभात सिंह की तरफ से यह आखरी मैसेज था. इसके बाद उनका कोई मैसेज नहीं आया और जब साथियों ने उन्हें फोन करना शुरू किया तो उनका फोन बंद मिला.

प्रभात के लापता होने और पुलिस द्वारा उसके उठाए जाने की आशंका के चलते गुजरात से शहनाज मलिक ने (अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समीति की महासचिव) बस्तर रेंज के आईजी शिव प्रसाद कल्लूरी को फोन मिलाया. उन्होंने कल्लूरी से पूछा कि बस्तर से हमारा एक पत्रकार गायाब है तो कल्लूरी तपाक से बोले, 'वो पत्रकार नहीं, नक्सली है. गुजरात में बैठे-बैठे आपको कैसे सपना आ गया कि वो पत्रकार है.’

कल्लूरी और शहनाज के बीच हुई इस बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है. कुछ समय पहले प्रभात ने कैच से बात करते हुए भी यह साफ-साफ कहा था कि बस्तर पुलिस से उसे अपनी जान को खतरा है. पुलिस उसे कभी भी दोबारा उठा सकती है.

मैसेज में प्रभात लिखते हैं, 'मेरे पास कोतवाली प्रभारी जगदलपुर का धमकी भरा कॉल आया है और वह मुझे कह रहे हैं कि तू जल्दी जगदलपुर थाने आ नहीं तो तुझे दंतेवाड़ा से उठाकर लाएंगे.’ इस बातचीत की रिकॉर्डिंग भी प्रभात ने व्हाट्स एप ग्रुप में शेयर किया था.

प्रभात ने इसी मैसेज में यह अदेंशा भी जाहिर किया है कि सरकार के इशारे पर एक बार फिर पुलिस के लोग उसे उठा सकते हैं. प्रभात लिखते हैं, ’मुझे लगता है कि फिर छत्तीसगढ़ सरकार के इशारे पर शिव राम प्रसाद कल्लूरी के लोग मुझपर फर्जी मामला बनाकर अगवा कर सकते हैं.’

आज जगदलपुर में अग्नि की बड़ी रैली है और उसी रैली में उसे भीड़ के हवाले किया जा सकता है

अभी तक प्रभात सिंह के बारे में कोई साफ-साफ जानकारी नहीं मिल सकी है. न तो अभी तक पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी दिखाई है और ना ही उनका कुछ पता ही चला है. 

प्रभात के साथ ही बस्तर में काम करने वाले पत्रकार कमल शुक्ला बताते हैं, ’पुलिस के कुछ सूत्रों से पता चला है कि प्रभात को पकड़कर भीड़ के हवाले करने की कोशिश की जा रही है. आज जगदलपुर में अग्नि की बड़ी रैली है और उसी रैली में उसे भीड़ के हवाले किया जा सकता है. ऐसा मुझे कुछ पुलिस सूत्रों ने बताया है. इन्हीं पुलिस वालों ने मुझे यह भी बताया है कि प्रभात के फोन का आखरी लोकेशन कल शाम सात बजे, दंतेवाड़ा का था.’

हालांकि कैच शुक्ला के दावे की पुष्टि नहीं कर सका है, लेकिन जिस तरीके से ऑडियो रिकॉर्डिंग में पुलिस अधिकारी प्रभात को धमका रहे हैं और कल्लूरी उसे नक्सली बता रहे हैं वह इस बात की ओर इशारा जरूर करता है कि प्रभात के साथ कभी भी, कुछ भी बुरा घटित हो सकता है.

First published: 18 September 2016, 7:51 IST
 
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