Home » इंडिया » chhattisgarh labours are most affected on mgnrega low vegas
 

मनरेगा मेहनताने की मार सबसे अधिक छत्तीसगढ़ के मजदूरों पर

शिरीष खरे | Updated on: 22 January 2016, 19:41 IST
QUICK PILL
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने 159 रुपए रोजाना के हिसाब से मनरेगा की मजदूरी तय की है. जबकि हरियाणा में रोजाना मजदूरी की दर 251 रुपए है.
  • मनरेगा\r\n में इतनी कम मजदूरी की वजह से छत्तीसगढ़ के मजदूर अमानवीय परिस्थितियों \r\nमें पलायन और विस्थापन का शिकार हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ के मनरेगा मजदूरों \r\nका मेहनताना पूरे देश में सबसे कम है.
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रदेश के मनरेगा मजदूरों के लिए 159 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित की है. रोजगार की कमी और बेकारों की अधिक संख्या के चलते यहां मजदूरों की मजदूरी सबसे कम कर दी गई है.

इसकी वजह से बड़ी संख्या में मजदूर छत्तीसगढ़ से बाहर जाकर अमानवीय परिस्थितियों में बंधुआ मजदूर बनने को मजबूर हो रहे हैं. अगर दूसरे राज्यों की तुलना करें तो यह अंतर बहुत बड़ा है. हरियाणा में केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी 251 रुपए प्रतिदिन निर्धारित की है.

हरियाणा में केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी 251 रुपए प्रतिदिन निर्धारित की है

इस मामले में चंडीगढ़, केरल, पंजाब, कर्नाटक और गोवा के मजूदरों के लिए भी ज्यादा मजदूरी निर्धारित है. छत्तीसगढ़ में झारखंड से भी सस्ती मजदूरी तय की गई है. 

उत्तराखंड और उड़ीसा में मजदूरी क्रमश: 161 और 174 रुपए प्रतिदिन तय हुई है. इस मामले में उत्तर-प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की स्थिति भी ठीक नहीं हैं. दोनों राज्यों में क्रमश: 161और 174 रुपए प्रतिदिन मजदूरी तय हुई है.

हरियाणा में मजदूरी ठीक

हरियाणा में मजदूर सबसे महंगे हैं, यहां ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मजदूरी की दर 251 रुपए प्रतिदिन तय की है.

गौरतलब है कि हरियाणा के मुकाबले गुजरात और महाराष्ट्र के मजदूरों को सस्ता माना गया है. दोनों राज्यों में मजदूरी क्रमश: 174 और 181 तय हुई है. वहीं, आंध्र प्रदेश से विभाजित नया राज्य तेलंगाना में मजदूरी की दर 180 रुपए प्रतिदिन तय हुई है.

कहां कितनी मजदूरी

     

  प्रदेश                            मजदूरी ( रुपये में )

हरियाणा                               251

निकोबार                               241

चंडीगढ़                                 239

केरल                                    229

पंजाब                                   210

लक्षद्वीप                                210

गोवा                                     208

कर्नाटक                                204

दादर व नगर हवेली                116

मणिपुर                                190

घट रही है मजदूरी

मनरेगा के लिए लंबे समय तक संघर्ष कर चुके निखिल डे कहते हैं, 'इस योजना में एक बड़ी खामी यह है कि महंगाई के साथ मजदूरों की मजदूरी गुजरते हर दिन के साथ घटती जा रही है.

मजदूरी को घटने से रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है. सरकारी कर्मचारी के वेतन को कंज्यूमर प्राईस इंडेक्स से जोड़कर तय किया जाता है, लेकिन खेतिहर मजदूरों की मजदूरी तय करते हुए ऐसा नहीं किया जाता.

'बीते वर्षों में मंत्री, सांसद, विधायक और सरपंचों तक के वेतन में बढ़ोतरी हुई है, जबकि मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की कमाई महंगाई वृद्धि के अनुपात में बढ़ने की बजाय कम होती जा रही है.

इस बारे में राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर का कहना है, 'छत्तीसगढ़ में मजदूरी भले ही कम है लेकिन बीच-बीच में मूल्यांकन होता रहता है.मजदूरी बढ़ाने के लिए हम केंद्र को प्रस्ताव भेजने पर विचार कर रहे हैं. जल्द ही केंद्र को इस बारे में अवगत करा दिया जाएगा.'

First published: 22 January 2016, 19:41 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

पिछली कहानी
अगली कहानी