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सोनी सोरी पर हमला: पुलिस खुद ही पुलिस को कैसे पकड़ेगी?

हिमांशु कुमार | Updated on: 17 March 2016, 17:51 IST
QUICK PILL
  • पुलिस आईजी एसआरपी कल्लूरी ने सोनी सोरी पर हमले की जांच के लिए अपने ही मातहत काम करने वाले अफसरों की एक एसआईटी का गठन किया
  • इसी एसआईटी ने सोनी सोरी के बहनोई अजय को घर से उठा लिया और दो दिन तक उनकी पिटाई की. इसके अलावा एसआईटी ने सोनी सोरी की छोटी बहन को उठा लिया और उसके हाथ पांव तोड़ डालने की धमकी दी

पांच फरवरी को छत्तीसगढ़ पुलिस ने मारडूम गांव में एक आदिवासी नेता हिड्मो को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया. पुलिस ने घोषणा कर दिया कि मारा गया आदिवासी एक लाख का इनामी नक्सली था.

गांव वालों ने मदद के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी से गुहार की. सोनी ने गांव में जाकर पता किया तो सामने आया कि मारे गए व्यक्ति के सात बच्चे हैं. उसके पास अपना राशन कार्ड है और आधार कार्ड भी है. मारा गया व्यक्ति रोज़ाना खेती बाड़ी करता था.

इसी साल उसे पंचायत ने इंदिरा आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए पैसा दिया था. हिड्मो आस पास के गांव में बहुत लोकप्रिय था और आदिवासी उसकी बात मानते थे क्योंकि वह सबकी बहुत मदद करता था.तो क्या हिड्मो को इसलिए मारा गया क्योंकि वह सरकार द्वारा आदिवासियों की जमीन छीन कर निजी कंपनियों को देने का विरोध कर रहा था? शायद यह सच है. कोई भी आदिवासी नेता जिसकी बात लोग सुनते हों उसे रास्ते से हटाया जा रहा है.

सोनी सोरी ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक प्रेस वार्ता करके पुलिस के झूठ का पर्दाफाश कर दिया

सोनी सोरी ने 16 फरवरी को हिड्मों की विधवा और बच्चों को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ले जाकर एक प्रेस वार्ता की और पुलिस के झूठ का पर्दाफाश कर दिया.पुलिस विभाग सोनी की पत्रकार वार्ता से घबरा गया. सोनी को धमकियां मिलने लगीं. पुलिस ने कहा कि हमारे पास सबूत है कि मारा गया व्यक्ति एक लाख का इनामी था.

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सोनी ने कहा कि मैंने तो सारे सबूत दे दिए हैं कि मारा गया व्यक्ति एक सामान्य आदिवासी था. यह आपको साबित करना है कि वह नक्सली था. पुलिस की स्थिति डावांडोल हो गई. मारे गए आदिवासी के खिलाफ पुलिस के पास कहीं एक एफआईआर तक दर्ज नहीं है. मारे गए व्यक्ति के खिलाफ़ कभी कोई वारंट जारी नहीं हुआ था. उसे कभी फरार तक घोषित नहीं किया गया था.

पुलिस पूछताछ के नाम पर उस व्यक्ति को घर से बुला कर ले गयी और एक दिन बाद उसकी लाश की बरामदगी दिखाई एक मुठभेड़ में. पुलिस दावा करने लगी कि उसने एक लाख का इनामी नक्सली मार गिराया है, उसे ही इनाम मिलना चाहिए.

सोनी सोरी के खुलासे और सवालों से पुलिस बुरी तरह फंस गयी थी. पुलिस वालों ने मारे गए व्यक्ति के गांव से अन्य आदिवासियों को पकड़ कर थाने ले जाकर टार्चर करना शुरू कर दिया.

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ठीक उसी दिन सोनी पर भी हमला हुआ. हमले वाले दिन यानी बीस फरवरी को सोनी के पास दिन में दो बज कर बारह मिनट पर एक आदिवासी का फोन आया. उस आदिवासी नें सोनी से कहा- सोनी दीदी आप कहां हैं, मैंने कुछ पुलिस वालों को बात करते हुए सुना है. वे लोग आपके ऊपर हमला करने की योजना बना रहे हैं. आप संभल कर रहना.

फोन पर बात करते समय सोनी के साथ मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील शालिनी भी मौजूद थीं. सोनी ने यह बात शालिनी को बताई. शालिनी ने उसी वक्त पांच एसएमएस अन्य महिला संगठनों से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं को भेज कर इस बात की सूचना दे दी.

उसी रात सोनी पर हमला हो गया. सोनी के मुंह पर एसिड जैसा कोई केमिकल मल दिया गया जिससे सोनी का चेहरा जल गया. सोनी को जगदलपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में सोनी का बयान लेने तहसीलदार आया.

सोनी ने तहसीलदार को बताया कि मेरे पास हमले के बारे में दो बज कर बारह मिनट पर एक फोन आया था जिसमें मुझे बताया गया था कि पुलिस आप पर हमला करने की योजना बना रही है और हमलावरों ने भी कहा था कि तुम मारडूम वाला केस उठाना बंद कर दो और आईजी साहब के खिलाफ़ बोलना बंद कर दो.

सोरी पर हमला करने वाले हमलावरों ने कहा कि तुम आईजी साहब के खिलाफ़ बोलना बंद कर दो

यह जानकारी मिलते ही उसी दिन पुलिस ने सोनी के फोन कंपनी के आफिस से काल रिकार्ड निकाले. दो बजकर बारह मिनट पर आये हुए फोन वाले नम्बर के मालिक का पता लगाया और उस आदिवासी के घर पहुंच गई. पुलिस ने उस फोन करने वाले आदिवासी को बहुत मारापीटा.

पुलिस वाले उस आदिवासी को जीप में डाल कर ले जाने लगे. इस पर उसकी पत्नी जीप के आगे लेट गई, गांव के आदिवासी भी जमा हो गए. दबाव में पुलिसवाले उस आदिवासी को वहीं छोड़ कर चले गए. सोनी सोरी को इलाज के लिए दिल्ली लाया गया. हमले की जांच के लिए पुलिस आईजी कल्लूरी ने एक एसआईटी का गठन कर दिया. एसआईटी में कल्लूरी ने अपने ही मातहत काम करने वाले अफसरों को रखा है.

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एसआईटी ने सोनी के भतीजे और आदिवासी पत्रकार लिंगा कोडोपी को बयान देने के लिए बुलाया. लिंगा कोडोपी ने बयान दे दिया इसके बाद एसआईटी ने सोनी सोरी के बहनोई अजय को घर से उठा लिया और दो दिन तक उसकी पिटाई की. एसआईटी ने सोनी सोरी की छोटी बहन को उसके कालेज से उठा लिया और उसके हाथ पांव तोड़ डालने की धमकी दी.

सोनी के पारिवारिक मित्र मनोज बघेल को एसआईटी ने उठा लिया और उसकी दिन भर पिटाई की और धमकी दी कि इसके बारे में किसी को बताना मत. सोनी के पिता कल्लूरी से मिलने गए तो कल्लूरी ने उनसे कहा कि तेरी बेटी सोनी सोरी के साथ हमने थाने में बलात्कार किया और छोड़ दिया फिर भी तेरी बेटी को शर्म नहीं आती.

कल्लूरी ने सोनी सोरी के पिता को धमकी दी कि मैं सोनी और लिंगा को जान से मार डालूंगा. सोनी के भतीजे लिंगा कोडोपी को पुलिस अधिकारियों ने फोन कर मां-बहन की गालियां दी.

लिंगा कोडोपी ने कहा कि मैं अपना बयान दे चुका हूं अब अगर मैं पुलिस के पास जाऊंगा तो मेरे वकील मेरे साथ रहेंगे. अगले दिन ही तहसीलदार ने लिंगा कोडोपी को एक नोटिस दे दिया.

तहसीलदार ने कहा कि आप पर आरोप है कि पुलिस ने आपको बुलाया और आप नहीं गए. तहसीलदार के कार्यालय में बड़ी संख्या में पुलिस लिंगा को पकड़ कर जेल में डालने के लिए पहले से मौजूद थी. लिंगा की वकील ने कहा कि आपने जो नोटिस भेजा है उसमें आपने कोई आरोप ही नहीं बताया इसलिए आपका नोटिस ही गलत है.

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तहसीलदार ने कहा कि मैं लिंगा से अकेले में बात करना चाहता हूं. लिंगा ने कहा कि नहीं मेरी वकील मौजूद रहेंगी.

सभी लोग कोर्ट से बाहर चले गए और लिंगा ने तहसीलदार के सवालों का जवाब देना शुरू कर दिया. तभी वहां मौजूद एक व्यक्ति ने वीडियो रिकार्डिंग शुरू कर दी.

लिंगा की वकील शालिनी ने पूछा कि यह वीडियो रिकार्डिंग क्यों की जा रही है? तहसीलदार ने कहा कि मैंने आदेश दिया है. लिंगा की वकील ने पूछा कि आपने किस कानून के तहत कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग का आदेश दिया है?

इसके बाद तहसीलदार ने वीडियो रिकार्डिंग बंद करने को कहा. एसआईटी ने आज तक सोनी का बयान नहीं लिया है.

एसआईटी ने आज तक सोनी पर हुए हमले की सूचना देने वाले व्यक्ति के फोन की जानकारी नहीं मांगी है. एसआईटी ने आज तक महिला वकीलों से हमले की सूचना का एसएमएस भेजने का सबूत नहीं मांगा है. एसआईटी को पता है कि हमला पुलिस ने ही करवाया है.

First published: 17 March 2016, 17:51 IST
 
हिमांशु कुमार

Himanshu Kumar is an activist who works for the rights of Adivasis. His Vanvasi Chetana Ashram in Dantewadawas razed by the state in 2009.

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