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छत्तीसगढ़: थर्ड जेंडर ने मांगा दो प्रतिशत आरक्षण

शिरीष खरे | Updated on: 12 January 2016, 23:14 IST
QUICK PILL
  • छत्तीसगढ़ में थर्ड जेंडर (किन्नर) ने समाज में बराबरी के लिए सरकार से शिक्षा और नौकरी में आरक्षण मांगा है.
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले डेढ़ सालों से इस समुदाय के लिए सरकार का प्रयास न के बराबर हैं.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाली प्रिया (बदला नाम) एक ट्रांस जेंडर हैं. उनके अपने सपने थे, वो बाकी बच्चों की तरह स्कूल जाना चाहती थीं, लेकिन पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी. केवल इसलिए कि उन्हें बाकी बच्चों जैसा सामान्य नहीं माना गया. उनसे कहा गया कि नाच-गाना ही उनका पेशा है.

इस तरह के भेदभाव के खिलाफ छत्तीसगढ़ में थर्ड जेंडर ने समाज में बराबरी का दर्जा हासिल करने के लिए आवाज उठाई है. इस समुदाय ने सरकार से शिक्षा और नौकरी में आरक्षण मांगा है. तृतीय लिंग कल्याण मंडल की सदस्य विद्या राजपूत ने पिछड़ा वर्ग के तहत इस तबके के लिए दो प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की है. इसके लिए थर्ड जेंडर के सदस्यों ने मुहिम चलाने का निर्णय लिया है.

इस समुदाय के लोग अपनी पहल को लेकर मुख्यमंत्री रमन सिंह और मुख्य सचिव से मुलाकात करने वाले हैं. इसके अलावा जनप्रतिनिधियों से अपील करेंगे कि उनकी मुहिम का साथ दें. मुहिम के साथ ही यह समुदाय लोगों को बताएगा कि उनके तबके के लोग भिक्षावृत्ति, वेश्यावृत्ति और नाच-गाने की दुनिया से बाहर आना चाहते हैं.

आरक्षण से ही आएगा जिंदगी में स्थाई बदलाव

इस तबके से जुड़ी रबीना का कहना है, 'आरक्षण से ही उनकी जिंदगी में स्थाई बदलाव आएगा. यदि आरक्षण के लिए 2-5 साल की समयसीमा निर्धारित करके भी छोटी-छोटी नौकरियां दी गई तो हमारे समुदाय की नई पीढ़ी पढ़ाई के लिए आगे आएगी. उन्हें यहां मुख्यधारा में लाने के अनुकूल माहौल बनेगा.'

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रबीना और उनके साथी सबसे पहले गृह विभाग के अफसरों के साथ जल्द ही कार्यशाला आयोजित करके पुलिस के छोटे पदों पर भर्ती की गुहार लगाने जा रही हैं.

गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों को शैक्षिणक संस्थाओं और नौकरी में थर्ड जेंडर को वरीयता देने के लिए निर्देश दिए थे. साथ ही छह महीने में सिफारिशें लागू करने को कहा था. हालांकि सरकारों की ओर से इस दिशा में कोई कदम देखने को नहीं मिला है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के डेढ़ साल बीतने के बावजूद सरकारी दस्तावेजों में महिला व पुरुष के साथ थर्ड जेंडर का कॉलम नहीं जोड़ा गया है. गौरतलब है कि समाज कल्याण विभाग के ताजा सर्वे के मुताबिक प्रदेश में 2900 से ज्यादा थर्ड जेंडर हैं.

थर्ड जेंडर के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में शहरी क्षेत्रों में दुकानों और आवासों के लिए 2-2 प्रतिशत कोटा निर्धारित कर चुकी है. वहीं, इस तबके के लोगों को उनकी मर्जी से लिंग प्रत्यारोपण कराने के लिए रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में सर्जरी केंद्र स्थापित किया जा रहा है.

अब थर्ड जेंडर सरकारी खर्चे पर पुरुष या स्त्री बनने के लिए अपना ऑपरेशन करा सकते हैं. इसके लिए प्रदेश में एड्स अवेयरनेस के लिए स्वास्थ्य विभाग ने किन्नर अमृता सोनी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है.

मधु बनी महापौर

छत्तीसगढ़ में जनवरी 2016 को आए नगरीय निकाय चुनाव में थर्ड जेंडर ने महापौर के पद पर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया. रायगढ़ सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी और थर्ड जेंडर मधु ने महापौर पद पर जीत हासिल की है. मधु की जीत से प्रदेश के थर्ड जेंडर समुदाय में खासी खुशी देखने को मिल रही है.

90 फीसदी थर्ड जेंडर महिला बनना चाहते हैं

यह बात एक अक्टूबर को रायपुर में दो दिनों तक चली ‘सेक्स री-एसाइनमेंट सर्जरी’ (एसआरएस) कार्यशाला में सामने आई है. सेक्स चेंज करने के लिए सरकार सर्जरी की सुविधा मुहैया करवाने जा रही है. स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने इसका जिम्मा संभाला है. स्वास्थ्य विभाग 90 दिन के अंदर इसका पूरा फुलप्रूफ प्लान बनाकर शासन को भेजेगा. इसे मंजूरी मिलते ही एसआरएस शुरू हो जाएगी.

सर्जरी में चेन्नई, कोलकाता के चिकित्सा विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अहम भूमिका अदा करेंगे. सर्जरी के लिए रायपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल को चुना गया है, जहां सर्जरी विभाग की भागीदारी होगी. इसलिए सर्जरी विभाग और मनोरोग विभाग के डॉक्टर्स के साथ मिलकर विशेषज्ञ थर्ड जेंडर की तीन बार काउंसिलिंग करेंगे और फिर सहमति के बाद उनकी सर्जरी की जाएगी.

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इस मामले में राज्य शासन के स्वास्थ्य सेवा संचालक आर. प्रसन्ना का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग थर्ड जेंडर्स की सर्जरी का प्लान तैयार कर रहा है. जल्द ही हम शासन को प्लान भेज देंगे, उसके बाद शासन को फैसला लेना है. रायपुर मेडिकल कॉलेज को सर्जरी के लिए फाइनल कर लिया गया है.

थर्ड जेंडर उत्थान के निर्देशों की अनदेखी

थर्ड जेंडर के व्यक्तियों के उत्थान के लिए राज्य शासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन विभागों द्वारा नहीं किया जा रहा है. सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव केआर मिश्रा ने सभी विभाग प्रमुखों को एक बार फिर इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने थर्ड जेंडर के व्यक्तियों के उत्थान को लेकर राज्य सरकारों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे.

इसके बावजूद सार्वजनिक उपक्रम के सरकारी दस्तावेजों में तृतीय लिंग का विकल्प नहीं दिया जा रहा है. विभागों से कहा गया था कि इसके अलावा इस वर्ग के व्यक्तियों को जारी परिचय पत्र सभी कार्यालयों में मान्य हो.

First published: 12 January 2016, 23:14 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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