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छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्कूलों के लिए आंध्र-तेलंगाना में शिक्षकों की तलाश

शिरीष खरे | Updated on: 8 August 2016, 9:00 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं. लिहाजा छत्तीसगढ़ सरकार अब पड़ोसी राज्य आंध्र-प्रदेश और तेलगांना से इन विषयों के शिक्षकों की तलाश कर रही है. दरअसल, राज्य सरकार पिछले कुछ सालों से माओवाद प्रभावित बस्तर और सरगुजा संभाग में आउट-सोर्सिंग के जरिए जंगल और जनजातीय इलाकों में शिक्षकों की कमी दूर करने का प्रयास कर रही है.

इसके लिए सरकार निजी कंपनियों की भी मदद ले रही है. स्कूली शिक्षा अधिकारियों की मानें तो इसके बावजूद उन्हें छत्तीसगढ़ और इसके बाहर आदिवासी स्कूलों के लिए शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं. अकेले बस्तर संभाग में 400 से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं. पूरे राज्य के आदिवासी जिलों की बात की जाए तो 3,000 से ज्यादा शिक्षकों की कमी बनी हुई है.

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यह हाल तब है जब राज्य शासन ने बीते साल आदिवासी अंचलों के करीब 3,000 स्कूलों को बंद कर दिया था. शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक कई स्कूलों में सौ से ज्यादा बच्चे न मिल पाने के कारण उन्होंने इन स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया था.

आदिवासी जिलों की बात की जाए तो 3,000 से ज्यादा शिक्षकों की कमी बनी हुई है

स्कूली शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कैच को बताया, 'बीते लंबे समय से कंपनियों के माध्यम से दूसरे राज्यों के शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं. इसके कारण करीब 1,700 से ज्यादा पद भर भी गए हैं. मगर विभाग को इसके बाद एक नई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. धीरे-धीरे इनमें से कई शिक्षक नौकरी छोड़कर जा चुके हैं.' यह सिलसिला चलता रहा तो समस्या का स्थाई समाधान निकलना मुश्किल हो जाएगा.

दूसरे राज्यों के लोगों को बड़े पैमाने पर शिक्षकों के पद पर भर्ती कराने के प्रयासों की दिशा में सफलता हासिल न हो पाने के कारण अब विभाग ने एक नई योजना पर काम करने का निर्णय लिया है.

इसके लिए आदिवासी अंचलों से लगे आंध्र-प्रदेश और तेलंगाना के शिक्षित युवकों को लक्ष्य बनाकर उन्हें छत्तीसगढ़ में शिक्षक बनाने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए दोनों राज्यों में शिक्षकों की तलाश भी शुरू हो चुकी है.

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राज्य साक्षरता मिशन के संचालक केसर हक कहते हैं, 'आंध्र-प्रदेश और तेलंगाना में अलग-अलग विषयों के शिक्षकों के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं. इस वर्ष 400 से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है.'

इन पदों को अगस्त, 2016 के अंत तक भरने की कोशिश की जाएगी.

हक ने यह भी बताया कि बस्तर के साथ ही सरगुजा संभाग के ज्यादातर जिलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों के शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है. लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं कि राज्य के ही बेरोजगार युवा वहां जाकर आदिवासी बच्चों को पढाएं, लेकिन शहरी और मैदानी क्षेत्रों के युवा पहाड़ी-जंगली क्षेत्रों में जाने को तैयार नहीं हैं.

बीते साल आदिवासी अंचलों के करीब 3,000 स्कूलों को बंद कर दिया था

छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के जो युवा वहां पढ़ाने को किसी तरह से तैयार हुए भी तो जल्द ही नौकरी छोड़ कर वापस आ गए. अब कंपनियों के माध्यम से भर्ती शुरू की गई है, लेकिन इसे भी अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो पा रहे हैं. भर्ती में बीएड और डीएड प्रशिक्षित शिक्षक लिए जा रहे हैं. हक के मुताबिक प्रदेश में योग्य शिक्षक न मिल पाने के कारण राज्य सरकार को आंध्र-प्रदेश और तेलंगाना में विज्ञापन जारी करने पड़े हैं.

दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की ग्राम-पंचायत कुटरेम में शासकीय प्राथमिक स्कूल सरकारी दावों की पोल खोल रहा है. कैच की पड़ताल में पता चला है कि आदिवासी बच्चे सिर्फ मध्यान्ह भोजन के लिए ही स्कूल आते हैं. खाना खाने के बाद वे अपने घर लौट जाते हैं.

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गणित, विज्ञान और अंग्रेजी तो बहुत दूर की बात है छात्रों को हिन्दी की शुरुआती वर्णमाला अ, आ, इ, ई तक नहीं पता. धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र होने के कारण अधिकारी इन इलाकों में जांच के लिए नहीं जाते. लिहाजा शिक्षक भी सामान्य ज्ञान से कोसों दूर हैं.

स्कूल में पदस्थ विज्ञान की शिक्षिका लक्ष्मी पोयाम से जब जिला शिक्षा अधिकारी का नाम पूछा गया तो उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री केदार कश्यप का नाम बता दिया.

First published: 8 August 2016, 9:00 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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