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महान लोकतंत्र: आदिवासियों से पूछे बिना ही बेच दी 800 एकड़ जमीन

शिरीष खरे | Updated on: 23 August 2016, 8:04 IST

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आदिवासी बहुल इलाका है घरघोड़ा विकासखंड. यहां मिड़मिड़ा गांव में मनीराम उरांव बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) कार्डधारी हैं. वे यहां भजिया बेचने का काम करते हैं. हैरत यह है कि उन्हें नहीं पता कि उन्होंने कहीं 13 एकड़ जमीन भी खरीद रखी है.

इसी तरह, भेंगारी गांव के विजय कुमार सिदार का पता लगाया तो जानकारी मिली कि वहां इस नाम का कोई आदमी ही नहीं रहता. वहीं, जिस विजय कुमार सिदार के नाम जमीन की खरीदी की गई उस रजिस्ट्री पत्रक में खरीददार की फोटो भी नहीं लगाई गई.

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मनीराम और विजय ही ऐसे व्यक्ति नहीं हैं. उनकी तरह ही सैकड़ों व्यक्तियों के नाम पर अचानक सरकारी रिकार्ड में जमीनें दर्ज हो गई हैं. अहम तथ्य यह है कि इस तरह की 25 रजिस्ट्रियों में गवाहों के नाम तक नहीं हैं. रजिस्ट्री बिना गवाहों के नहीं हो सकती, लेकिन भू-माफिया का असर है कि बिना नाम और फोटो के रजिस्ट्रियां हो गईं. कुछ रजिस्ट्री तीसरे शनिवार और रविवार को सरकारी छुट्टी के दिन भी हुई है.

यह अंधेरगर्दी औद्योगिकीकरण के बहाने मुआवजा पाने के लिए इस इलाके में धड़ल्ले से चल रही है. दलालों ने यहां तीन टेंडानवापारा, खोखराआमा और भेंगारी गांव के करीब 200 आदिवासी परिवारों की 800 एकड़ जमीन को फर्जी तरीके से दूसरों के नाम दर्ज करवा दिया है.

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यह खेल रायगढ़ में पिछले एक साल से चल रहा है. जब रजिस्ट्री विभाग में नामों की जांच की गई तो कई हैरतअंगेज खुलासे हुए. आदिवासी विकासखंडों में जिस तरह आदिवासियों की जमीनों की बंदरबांट हुई है वह बहुत ही संगठित अपराध का इशारा करती है.

कैच ने जब कुछ कुछ नामों की जांच की तो कई नाम वाले व्यक्ति ही नही मिले, कुछ मिले भी तो उनकी माली हालत इतनी कमजोर थी कि उनकी जमीन खरीदने की हैसियत ही नहीं थी. दरअसल, आदिवासियों के नाम से बेनामी जमीन खरीदकर यहां के कुछ प्रभावशाली लोगों का गिरोह बड़े पैमाने पर जमीनों पर कब्जा कर रहा है.

घरघोड़ा विकासखंड अनुसूचित जनजाति के विकासखंड की श्रेणी में आता है, इसलिए पांचवी अनुसूची में शामिल होने के कारण यहां आदिवासियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पेसा एक्ट लागू हैं. इसके तहत यहां बिना ग्राम-सभा आयोजित किए इतनी भारी मात्रा में आदिवासी जमीनों की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती.

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इस मामले में अधिकारियों को कार्रवाई के लिए पीड़ित किसानों ने कई बार आवेदन भी दिया, लेकिन अधिकारी कार्रवाई करने तैयार नहीं हैं. इनमें नवापारा और खोखरो आमा के 45 आदिवासी किसान संयुक्त रूप से घरघोड़ा विकासखंड के एसडीएम को आवेदन देकर उनकी रजिस्ट्री निरस्त करने की मांग कर चुके हैं. मगर अधिकारियों द्वारा अब तक कार्रवाई की कोई पहल नहीं हुई है.

किसानों ने आवेदन में शिकायत की है कि रजिस्ट्री के कागजात में उन लोगों के जाति प्रमाण पत्र संलग्न नहीं किए गए हैं, जिनके नाम जमीन खरीदी की गई है. कई ऐसे लोग भी हैं जिनका पता पंजीयन कार्यालय में दर्ज हैं, मगर वे बताए गए पते पर नही रहते हैं. इससे पहले रायगढ़ जिले के कलक्टर मुकेश बंसल ने जिले के सभी आदिवासी जमीनों के अंतरण पर रोक लगाकर उसकी जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन यह मामला उस समय सूचीबद्घ नहीं हो सका.

स्थानीय आदिवासियों के नाम पर कई रजिस्ट्रियां कराई गई हैं, लेकिन ज्यादातर आदिवासी जमीन के खरीददार कोरबा जिले के गेवरा गांव के रहने वाले हैं. कोरबा के कई खरीददारों के नाम के आगे जाति का उल्लेख नहीं है. बताया जा रहा है कि गेवरा के जिन लोगों के नाम से जमीन खरीदी गई है उनमें से अधिकतर मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं. सवाल है कि यदि गेवरा के किसी आदिवासी किसान ने जमीन की खरीददारी की है तो उसकी जमीन पर गैर आदिवासी कैसे काबिज है. यहां के आदिवासियों की जमीन की बेनामी खरीदी किसके इशारे पर की गई.

खटखटाएंगे अदालत का दरवाजा

सामाजिक कार्यकर्ता डिग्री चौहान ने बताया, 'वह मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम की धारा-3 तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने के लिए अदालत में गुहार लगाएंगे.' उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को यह ज्ञात हो जाए कि आदिवासियों पर अत्याचार हुआ है तो उन्हें तीन महीने में कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई को तैयार नहीं हैं. इसलिए उन्हें आरोपी बनाएंगे.

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इस प्रकरण में घरघोड़ा विकासखंड के एसडीएम विनीत नंदनवार का कहना है, 'यह मामला हमारे संज्ञान में आया है, इस पर हमने पटवारियों को परिशिष्ट-ई देने कहा है. पटवारियों के प्रतिवेदन के बाद प्रथम दृष्टया यह पाया जाता है कि किसी कंपनी या गैर-आदिवासी की जमीन पर कब्जा है. इसके बाद 170-ख के तहत मामला दर्ज करा सकते हैं.'

राज्य आयोग ने गठित की जांच कमेटी

इस मामले में पीड़ित आदिवासी किसानों की शिकायत के बाद राज्य के अनुसूचित जनजाति आयोग ने चार सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है. शीघ्र ही यह विशेष टीम रायगढ़ के घरघोड़ा विकासखंड के इन गांवों का निरीक्षण करेगी. मामले की जांच के लिए कलक्टर सहित सभी संबंधित अधिकारियों से ब्यौरा मांगा गया है. 

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आयोग के सदस्य विकास मरकाम ने बताया, 'दस्तावेज और निरीक्षण स्थल की जांच के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी.'

First published: 23 August 2016, 8:04 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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