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छत्तीसगढ़: बालोद में माफिया और नशे की लत के खिलाफ ‘महिला कमांडो’ की ललकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 August 2016, 12:26 IST
(एजेंसी)

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पुलिस प्रशासन ने शराब और अन्य सामाजिक बुराइयों से लड़ने के लिए महिला कमांडो की नियुक्ति की है.

पुलिस प्रशासन की ओर से इन ‘महिला कमांडो’ की तैनाती इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. ये समूह जिले के गुंडरदेही, गुरूर और बलोद विकासखंड के लगभग तीन सौ गांवों के साथ-साथ पड़ोसी जिले दुर्ग के पाटन क्षेत्र के लगभग 150 गांवों में सक्रिय हैं.

8 हजार महिलाओं की मुहिम

ये महिला कमांडो लाल पोशाक और लाल टोपी में पूरे क्षेत्र में सक्रिय बताई जा रही हैं. महिला कमांडो विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) बनकर इन सामाजिक बुराइयों से लड़ने का प्रयास कर रही हैं. इस समूह में लगभग आठ हजार महिलाएं साथ मिलकर क्षेत्र में शराब माफिया से लोहा ले रही हैं.

बताया जा रहा है कि करीब 40 महिलाएं रोज शाम समूह में लाठी और टॉर्च से लैस होकर शराब माफिया के खिलाफ गश्त करती हैं. इस दौरान महिलाएं माफिया के खिलाफ कार्रवाई भी करती हैं और शराब पीने वालों को इसकी बुराइयों से अवगत कराती हैं.

इस मामले में बलोद जिले के पुलिस अधीक्षक शेख आरिफ हुसैन ने बताया कि इन महिला कमांडो की काम करने की लगन को देखते हुए हमने जिले में ‘मिशन पूर्ण शक्ति’ नाम से इस परियोजना की शुरुआत की है.

पुलिस अधीक्षक ने इन महिला कमांडो को एसपीओ बनाने का फैसला किया है. ये पुलिस के साथ मिलकर समाजिक बुराइयों का मुकाबला करेंगी.

पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख हुसैन ने कहा, "इस परियोजना के तहत पांच विकासखंड की लगभग 12 सौ महिला कमांडो को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए हैं. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को ‘रेडी टू रियक्ट’ नाम दिया गया था. इस परियोजना के तहत पहले एक सौ महिला कमांडो को एसपीओ बनाया गया है."

2006 से शमशाद बेगम की पहल

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में साल 2006 में सामाजिक कार्यकर्ता शमशाद बेगम ने महिलाओं को साथ जोड़कर ‘महिला कमांडो’ का गठन किया था.

इस समूह ने क्षेत्र में शराब और अन्य सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का बीड़ा उठाया और आज इसमें लगभग आठ हजार महिलाएं साथ मिलकर क्षेत्र में शराब माफिया से लोहा ले रही हैं.

इस उल्लेखनीय कार्य के लिए भारत सरकार ने बेगम को साल 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया था. बेगम कहती हैं कि महिला कमांडो में शामिल महिलाओं ने शराब की बुराइयों के कारण बहुत कुछ झेला है. अब वे चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी इस बुराई से दूर रहे.

शमशाद बेगम ने कहा, "मैं दावा नहीं करती कि महिला कमांडो ने कितने गांवों को शराब मुक्त करवाया है लेकिन विश्वास है कि आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम होंगे."

उन्होंने कहा कि "बालोद जिले के पुलिस अधीक्षक ने इन महिला कमांडो को एसपीओ बनाने का फैसला किया है. ये पुलिस के साथ मिलकर समाजिक बुराइयों का मुकाबला करेंगी."

महिला कमांडो को एसपीओ बनाने का फैसला

पुलिस अधीक्षक आरिफ हुसैन ने कहा, "जिले में इन महिलाओं को एसपीओ बनाने का फैसला किया गया है, जिससे यह सरकार के साथ मिलकर और भी बेहतर काम कर सकें. इस परियोजना के तहत पहले एक सौ महिला कमांडो को एसपीओ बनाया गया है."

उन्होंने बताया कि "जिले में 10 हजार महिला कमांडो को एसपीओ के रूप में चयन करने के लिए राज्य शासन को 40 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है. हुसैन ने कहा महिला कमांडो के कारण जिले में कुछ हद तक शराब के अवैध कारोबार पर लगाम लगा है, इसके साथ ही अन्य अपराधों में भी कमी आई है."

First published: 13 August 2016, 12:26 IST
 
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