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छत्तीसगढ़: आधार और राशनकार्ड रखने वाले मजदूर भी माओवादी बना दिए गए

राजकुमार सोनी | Updated on: 20 April 2016, 8:31 IST

प्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले राजनांदगांव से महज 60 किलोमीटर दूर स्थित गांव अड़जाल के चार युवक फिलहाल जनसुरक्षा अधिनियम के तहत जेल में बंद हैं.

इसकी तहकीकात के लिए जब हमने गांव में दस्तक दी तो ग्रामीणों ने बताया कि सभी युवक गोदावरी खदान में मजदूरी का काम करते थे, लेकिन विगत सात मार्च को सारडा एनर्जी की पल्लेमाड़ी खदान के एजीएम कुमार नायर की हत्या के बाद पुलिस ने खुद को मुस्तैद दिखाने के लिए युवकों को बलि का बकरा बना दिया हैं.

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ग्रामीणों ने बताया कि जिन युवकों को पुलिस ने माओवादी बताकर जेल में बंद कर दिया है उनके पास आधार और राशनकार्ड दोनों हैं. अड़जाल और उसके आसपास का इलाका लौह खदानों के लिए मशहूर है. यहां भिलाई इस्पात संयंत्र को लीज में दी गई डुलकी खदान भी मौजूद है, जहां का लौह अयस्क सबसे अच्छा माना जाता है. यह खदान बालोद जिले के डौंडी, कांकेर के भानुप्रतापपुर और राजनांदगांव के मानपुर विकासखंड के बड़े हिस्से में फैली हुई है.

युवकों को जनसुरक्षा अधिनियम 2005 की धारा 8(3) और (5) के तहत गिरफ्तार किया गया है

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पकड़े गए युवकों के दस्तावेज

इसके अलावा गोदावरी और सारडा एनर्जी जैसी निजी कंपनियां भी उत्खनन के काम में लगी हुई हैं. पुलिस का मानना है कि निजी कंपनियों के खदान संचालन करने के तौर-तरीकों से इलाके में संघर्ष पनपा है और माओवादी गतिविधियों में इजाफा हुआ है.

बेकसूरों को फंसाने का आरोप

अड़जाल में रहने वाले पटेल चिन्ताराम ने बताया कि पुलिस गांव के युवक ईश्वर, सरजा, श्रीराम और पतिराम को जंगल से गिरफ्तार बता रही है, जबकि घटना के दिन सभी युवक रोजी-रोटी के सिलसिले में खदान गए हुए थे. सरजाराम के भाई जगतराम ने बताया कि एजीएम की हत्या के बाद पुलिस ने दो-तीन दिनों तक सघन सर्चिंग की थी. इस दौरान पुलिस ने गांववालों से कहा था कि उन्हें थाने में कामकाज के लिए कुछ लोगों की जरूरत है.

ग्रामीणों का कहना है कि युवक माओवादी या उनके सहयोगी होते तो दिहाड़ी मजदूर बनकर काम क्यों करते?

जब ग्रामीण थाने पहुंचे तो पुलिस ने उन में से चार युवकों को बंधक बना लिया. बाद में गांव के दो ग्रामीण लक्ष्मण और चिन्ताराम को मानपुर थाने से यह सूचना भिजवाई गई कि युवकों को जनसुरक्षा अधिनियम 2005 की धारा 8(3) और (5) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है.

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ग्रामीणों का कहना है कि यदि युवक माओवादी या उनके सहयोगी होते तो दिहाड़ी मजदूर बनकर काम क्यों करते? और थानेदार के बुलावे पर थाने क्यों जाते? गांव में अधिकांश लोग गोंड जनजाति के हैं और मेहनत-मजदूरी के जरिए अपना पेट पालते हैं. युवकों की गिरफ्तारी के बाद उनके परिजन इस बात के लिए चिन्तित हैं कि अब आगे कोर्ट-कचहरी की लड़ाई कैसे लड़ पाएंगे.

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अड़जाल गांव, खड़गांव थाने के अंतर्गत आता है. यहां के थाना प्रभारी दयाकिशोर बरवा का कहना है कि कोई माओवादी है या नहीं यह कोर्ट में साबित होगा.

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उनके मुताबिक माओवादियों को सहयोग करना भी एक बड़ा अपराध है. उन्होंने कहा कि जिन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें लेकर इस बात की सूचना मिली थी कि वे माओवादी गतिविधियों में लिप्त हैं. बरवा ने कहा कि ग्रामीण अपने गांव के युवकों को बचाने के लिए झूठ बोल रहे हैं. उन्हें थाने बुलाकर गिरफ्तार नहीं किया गया है. हकीकत यह है कि सभी युवक जंगल से पकड़े गए हैं और उनके पास से पुलिस ने 8 मीटर लाल कपड़ा, परचे, माओवादी साहित्य और नारा लिखने वाला ब्रश भी बरामद किया है.

First published: 20 April 2016, 8:31 IST
 
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