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चिदंबरम: इशरत जहां की फाइलों में मामूली बदलाव किया था

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 March 2016, 12:34 IST

इशरत जहां मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस बात को स्वीकार किया है कि सुप्रीमकोर्ट में दाखिल किये गये हलफनामों में उन्होंने कुछ मामूली बदलाव किए थे.

चिदंबरम ने यह बात अपनी किताब 'स्टैंडिंग गार्ड - अ ईयर इन अपोजिशन' के लॉन्च के वक्त एक सवाल के जवाब में कही. उन्होंने स्वीकार किया कि भाषा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए उन्होंने हलफनामें में केवल मामूली तौर पर बदलाव किया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चिदंबरम ने कहा कि मुझे यह नहीं समझ में आ रहा है कि हलफनामे का कौन सा हिस्सा या वाक्य गलत है. इशरत जहां मामले में मेरे खिलाफ आरोप नहीं लगा है. जिस अधिकारी ने यह कहा कि वह हलफनामे के बारे में कुछ नहीं जानता है, उसकी यह बात 13 जुलाई 2013 को दर्ज रिकॉर्ड में है कि दूसरा हलफनामा पूरी तरह से न्यायसंगत है.

चिदंबरम ने कहा कि पूरे मामले में उसने अपना नजरिया बदल लिया है. एक आजाद देश में किसी व्यक्ति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह नजरिया बदल ले. दूसरा हलफनामा अटार्नी जनरल के द्वारा दायर किया गया था. दूसरे हलफनामे का कोई हिस्सा गलत नहीं है.

चिदंबरम ने कहा कि तत्कालीन गृह सचिव जी के पिल्लई ने इशरत जहां मामले से जुड़े कागजात कम से कम तीन बार देखे थे और आश्चर्य जताया कि केवल वही कागजात क्यों गुम हो गए जिनसे साफ हो जाता कि जी के पिल्लई इस मामले में अब झूठ बोल रहे हैं.

पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि इशरत की फाइल तत्कालीन गृह सचिव पिल्लई के पास कम से कम तीन बार गयी और अब वह कह रहे हैं कि वे कागजात गायब हैं. जांचे गए मसौदे के गायब होने से किसका फायदा है? मैं चाहता था कि मसौदा अटार्नी जनरल जांचें.

उन्होंने कहा कि अटार्नी जनरल देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी होते हैं. इसलिए मैं चाहता था कि देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी अटार्नी जनरल उस मसौदे को देखें. मैंने इस पूरे मामले में कुछ भी नहीं छिपाया है और मैं उम्मीद करता हूं कि सारे रहस्यों से पर्दा उठ चुका है.

गौरतलब है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इशरत जहां मामले में दायर शपथ पत्र से जुड़ी गुम कागजों के मामले 'आंतरिक जांच' का आदेश दिया था.

गृह मंत्रालय के अपर सचिव बी. के. प्रसाद की अध्यक्षता में गठित आंतरिक जांच कमेटी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस मामले में दर्ज दूसरे शपथ पत्र के मसौदे से जुड़े कागजात कैसे गुम हो गए. राजनाथ सिंह ने लोकसभा में पिछले हफ्ते इशरत जहां मामले में गुम हुए कागजों के बारे में आंतरिक जांच कराने की घोषणा की थी.

वर्तमान समय में भाजपा और गृह मंत्रालय के अधिकारियों का आरोप है कि यूपीए सरकार साल 2004 में हुए इस कथिक मुठभेड़ के मामले में बार-बार अपना रुख बदलती रही है.

इशरत मुंबई कॉलेज की छात्रा थी और कथित रूप से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करती थी. गुजरात पुलिस के साथ हुए एक मुठभेड़ में वह आतंकियों के साथ मारी गई थी.

First published: 15 March 2016, 12:34 IST
 
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