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चिदंबरम का मोदी पर हमला: नेता को सिर्फ जनता की ओट नहीं लेनी चाहिए, उसे राह भी दिखाना चाहिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 December 2016, 7:54 IST
QUICK PILL
  • भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने अपनी किताब के लोकार्पण के मौक़े पर कहा कि मुंबई हमला बड़ी ख़ुफ़िया नाकामी का नतीजा था. 
  • यहां मौजूद पूर्व गृहमंत्री चिदंबरम ने कहा कि मुंबई हमले के बाद भारत ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की थी, इसके लिए भारत की दुनिया भर में सराहना हुई थी. 

पाकिस्तान के मुद्दे पर पूर्व गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां तक कि उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक को भी पीएम का राजनीतिक फैसला ही बताया. इसका मकसद आतंक के खिलाफ जन भावनाओं को भुनाना था और वही हुआ. चिदंबरम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके शिवशंकर मेनन की किताब ‘च्वाइसेज़: इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियाज़ फॉरेन पॉलिसी’ के लोकार्पण में शामिल हुए थे.

इस मौक़े पर उन्होंने कहा, 'नेताओं को जनता की आवाज़ सुन कर ही इतिश्री नहीं कर लेनी चाहिए बल्कि ज़रूरत पड़ने पर जनमानस की राय के मुताबिक भी काम करना चाहिए. किताब का लोकार्पण पूर्व प्रधामंत्री मनमोहन सिंह ने किया.

मोदी सरकार पर बरसे

केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए चिदंबरम ने कहा, इस सरकार के मंत्री जोर-जोर से चिल्लाते हैं, जिसका नतीजा कुछ भी नहीं निकलता. चूंकि पड़ोस के साथ ही रहना पड़ता है, इसलिए बेहतर होगा कि इस सरकार को भी पाकिस्तान के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की नीति अपनाते हुए पाक से वार्ता जारी रखी जानी चाहिए. 

चिदम्बरम ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में जनता के सामने बयानबाजी करने से भारत ने खुद अपने लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए. इस वजह से हम इस दिशा में आगे बढ़ ही नहीं पाए. उन्होंने कहा इस तरह की कार्रवाई से पाक के एक धड़े से समर्थित आतंकी गुट भारतीय सेना पर हमला करने से तो बाज नहीं आएंगे. मुंबई हमले के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 2016 में हमारे पास 2008 की बजाय ज्यादा विकल्प हैं.

चिदम्बरम ने कहा, पाक पर सरकार की नीति एक ओर तो इतनी अधिक झुकी हुई दिखाई देती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाहौर में ठहरते हैं तो दूसरी ओर एलओसी पर घुसपैठ और आतंकी हमलों के साथ तनाव बढ़ता नज़र आता है. 

शिवशंकार मेनन ने कहा, 'यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारत वार्ता के जरिये पाकिस्तान के साथ कुछ मसले सुलझाने के करीब पहुंच चुका था लेकिन मौजूदा हालात ऐसे नहीं लगते. मेनन ने खुलासा किया है कि 2003 में पाकिस्तान ने संघर्ष विराम की इकतरफा घोषणा की थी, क्योंकि वह जानता था कि भारत इस पर राजी हो जाएगा. यह एक तरह से दोनों देशों के बीच अनौपचारिक समझ का संकेत है. चिदम्बरम ने कहा इसी संघर्ष विराम की बदौलत 2004 से 2014 के बीच सीमा पर आपसी लड़ाई में काफी कमी देखी गई.

मुंबई हमला

2008 के मुंबई हमले को भारतीय गुप्तचर एवं सुरक्षा तंत्र की बड़ी खामी बताते हुए मेनन ने कहा, 'आंतरिक सुरक्षा में बड़ी खामियों के चलते ही मुंबई हमला हुआ. इस हमले के चार दिन बाद ही चिदम्बरम ने गृहमंत्री का पद संभाला था. उन्होंने कहा, मुंबई हमले के बाद भारत ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की थी, इसके लिए भारत की दुनिया भर में सराहना हुई थी. 

हालांकि मुंबई हमले के तुरंत बाद भावनाओं के अनुरूप तो मेनन भी जवाबी कार्रवाई करने के ही पक्षधर थे लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि अगर ऐसा होता तो इसका नतीजा ठीक नहीं होता. चिदम्बरम ने कहा उस वक्त जवाबी कार्रवाई करना न तो उपयुक्त था और न ही जरूरी.

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और गृहमंत्री दोनों ने हाल ही में नगरोटा आर्मी बेस पर हुए हमले की मिसाल देते हुए कहा कि यह हमला सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हुआ और गौर करने लायक बात यह है कि यह हमला पिछले कई हमलों से अलग था लेकिन तनाव और दुस्साहस में कोई कमी नहीं आई है. उन्होंने कहा पठानकोट से नगरोटा तक जितने भी हमले हुए हैं, वे एक ही तरह के हैं. इन हमलों में रात में घुसपैठ और अलसुबह हमला किया गया.

चिदम्बरम ने कहा, 'मुंबई हमलों के बाद भारत ने अपना गुप्तचर व सुरक्षा तंत्र मजबूत कर लिया था और 2008 से 2013 तक पाक की ओर से एक भी हमला नहीं हुआ था. इस दौरान दिल्ली हाईकोर्ट और पुणे व मुंबई की छिटपुट घटनाएं हमारे अपने ही देश के आतंकियों की करतूत थी.'

मेनन ने यह भी खुलासा किया कि हमले के बाद भारत अमेरिका को संदेह की नजर से देखने लगा था. इसका कारण डेविड हेडली था. कोई नहीं जानता कि हेडली ने अमेरिका के लिए काम करना कब छोड़ा? वह लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के लिए भी काम कर रहा था.

कश्मीर की भी चर्चा

चिदम्बरम ने दावा किया कि यूपीए सरकार की नीतियों के चलते घाटी में बरसों तक शांति बनी रही. आज घाटी में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए राज्य की पीडीपी-भाजपा के बेमेल गठबंधन की सरकार जिम्मेदार है, जिसे जनता स्वीकार ही नहीं कर पाई है.

2010 के बारे में याद करवाने पर उन्होंने उसके लिए तत्कालीन राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा युवा राजनेता उमर अब्दुल्ला की नाकारा सरकार के कारण यह हाल हुआ. यूपीए सरकार इसके लिए तैयार नही थी और न ही पथराव को झेलने के लिए तैयार थी. हालांकि बाद के सालों में उसके लिए यह सामान्य सी बात थी. उन्होंने माना कि यूपीए सरकार ने भी कश्मीर के मामले में कुछ गलतियां की हैं. इसका मुख्य कारण अंदरूनी रिपोर्टों को नजरंदाज करना रहा.

First published: 5 December 2016, 7:54 IST
 
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