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छुट्टियों में मनाली नहीं जाते जज, पीएम मोदी की सलाह पर बोले चीफ जस्टिस

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2016, 11:11 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने पलटवार किया है. पीएम की ओर से जजों की लंबी छुट्टियों पर दिए गए बयान पर चीफ जस्टिस ने निशाना साधा है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि जज गर्मियों की छुट्टियों का लुत्‍फ उठाने के लिए मनाली जैसे किसी हिल स्‍टेशन पर नहीं जाते, बल्कि वो अपना वक्त मुकदमों के फैसले लिखने में लगाते हैं, जिससे कि लंबित मामलों की सुनवाई हो सके.

रविवार को संबोधन के बाद चीफ जस्टिस जब मीडिया से बात कर रहे थे, तब उन्‍होंने कहा, "क्‍या आपको लगता है कि हम छुट्टियों में मनाली या जाते हैं. संवैधानिक बेंच के जज इस दौरान फैसला लिखते हैं. "

चीफ जस्टिस ने कहा कि जिन छुट्टियों की बात की जा रही है, वो सिर्फ तीन हफ्ते की होती हैं. जस्टिस जेएस शेखर ने एनजेएसी की सुनवाई ब्रेक के दौरान की थी और जजमेंट लिखने के लिए छुट्टी पर गए. 

पीएम के बयान पर निशाना

जस्टिस ठाकुर यहीं पर नहीं रुके. उन्‍होंने कहा कि अगर पीएम को लगता है कि हमें लंबी छुट्टी मिलती है, तो मैं साफ कर दूं कि ये उनके विचार हैं. लेकिन ये तो एक जज की पत्‍नी और बच्‍चे ही बता सकते हैं कि जज कितनी छुट्टियां लेते हैं.

दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और चीफ मिनिस्‍टर्स के सम्‍मेलन के दौरान जजों की गर्मियों की छुट्टी को लेकर सवाल उठाया था. पीएम ने कहा था कि उन्‍होंने ये मुद्दा उस वक्‍त भी उठाया था, जब वो गुजरात के सीएम थे.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भावुक भी हो गए.  मुकदमों की भारी बाढ़ से निपटने के लिए जजों की कमी पर चीफ जस्टिस ने अफसोस जताया था. 


'सारा बोझ न्यायपालिका पर क्यों'


चीफ जस्टिस ने जजों की संख्या को मौजूदा 21 हजार से 40 हजार किए जाने की दिशा में सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए थे. चीफ जस्टिस ने कहा, "आप सारा बोझ न्यायपालिका पर नहीं डाल सकते."

बेहद भावुक नजर आ रहे जस्टिस ठाकुर ने नम आंखों से कहा था कि 1987 में विधि आयोग ने न्यायाधीशों की संख्या प्रति 10 लाख लोगों पर 10 से बढ़ाकर 50 करने की सिफारिश की थी.

लेकिन तब से लेकर अब तक इस पर कुछ नहीं हुआ. इस दौरान मुख्यमंत्रियों और हाई कोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को चीफ जस्टिस ने संबोधित किया. 

भावुक हुए थे चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस ठाकुर ने इस दौरान कहा कि इसमें सरकार की अकर्मण्यता नजर आती है, क्योंकि न्यायाधीशों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ. चीफ जस्टिस जब ये बातें कह रहे थे, उस वक्त उन्हें अपने आंसू पोंछते देखा जा सकता था.

उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां मौजूद थे और पूरी गंभीरता से उनकी बातें सुन रहे थे. चीफ जस्टिस ने आगे कहा, "देश की तरक्की के लिए मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि इस स्थिति को समझें और महसूस करें कि केवल आलोचना करना काफी नहीं है.

First published: 25 April 2016, 11:11 IST
 
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