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2015 में भारत का सैन्य खर्च पाकिस्तान से 500 पर्सेंट अधिक

अभिषेक पराशर | Updated on: 6 April 2016, 12:56 IST
QUICK PILL
  • थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में सबसे ज्यादा सैन्य खर्च अमेरिका का रहा. अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा सैन्य खर्च चीन, सउदी अरब, रूस और ब्रिटेन ने किया.
  • वहीं 2014 में हथियारों का 10वां बड़ा खरीदार रहा पाकिस्तान 2015 के शीर्ष 15 देशों की सूची से बाहर है. 2015 में पाकिस्तान का सैन्य खर्च 9.5 अरब डॉलर रहा. जबकि भारत का सैन्य खर्च 51.3 अरब डॉलर रहा.

2015 में सैन्य खर्च के मामले में भारत छठे पायदान पर रहा. वहीं अमेरिका, चीन, सउदी अरब, रूस और ब्रिटेन टॉप 5 देशों में शुमार हैं.

थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों के मुताबिक सैन्य खर्च के मामले में 2014 और 2015 की सूची में कोई बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि टॉप 15 देशों के पायदान जरूर बदल गए हैं. 

2015 में दुनिया का सैन्य खर्च 1,676 अरब डॉलर रहा जो 2014 के मुकाबले 1 फीसदी अधिक है.

एशिया में भारत दूसरा बड़ा देश

2015 में एशिया और ओसेनिया के सैन्य खर्च में 5.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इस क्षेत्र में सबसे अधिक सैन्य खर्च चीन का रहा. 

चीन ने करीब 215 अरब डॉलर खर्च किया जो इस क्षेत्र के कुल सैन्य खर्च का 49 फीसदी और भारत के सैन्य खर्च के मुकाबले 400 फीसदी से भी अधिक है. चीन ने अपनी कुल जीडीपी का 1.9 फीसदी हिस्सा सैन्य खर्च  में लगाया.

एशिया और ओसेनिया में भारत चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक सैन्य खर्च वाला देश रहा. 2015 में भारत का सैन्य खर्च 51.3 अरब डॉलर रहा जो पिछले साल के मुकाबले 0.4 फीसदी अधिक है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत की योजना 2016 में अपने सैन्य खर्च में करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी की है. इसकी वजह कई बड़ी जारी खरीद योजनाएं हैं.

2015 में पाकिस्तान के मुकाबले भारत का सैन्य खर्च करीब 500 पर्सेंट से भी अधिक रहा

पिछले साल दुनिया का 10वां बड़ा हथियार खरीदार पाकिस्तान सैन्य खर्च के मामले में टॉप 15 देशों की सूची में शामिल नहीं है.  2015 में पाकिस्तान के मुकाबले भारत ने 500 पर्सेंट अधिक रकम सैन्य खर्च में लगाया.

सिपरी के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में पाकिस्तान का सैन्य खर्च 9.5 अरब डॉलर रहा जो 2014 के मुकाबले अधिक है. 2014 में पाकिस्तान ने 8.7 अरब डॉलर की रकम सेना पर खर्च की थी. 

सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य खर्च में होने वाली बढ़ोत्तरी की सबसे बड़ी वजह दुनिया में लगातार बढ़ रहा तनाव है. लगातार चार सालों के दौरान सैन्य खर्च में गिरावट के बाद पहली बार 2015 में सैन्य खर्च में बढ़ोतरी हुई है.

World Military Expenditure.

1988 से 2015 के बीच दुनिया के सैन्य खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है. ग्राफिक्स सिपरी

कटौतियों के बावजूद अमेरिका सबसे आगे

अमेरिका 596 अरब डॉलर के साथ दुनिया का सबसे ज्यादा सैन्य खर्च वाला देश रहा वहीं 2015 में चीन का सैन्य खर्च 215 अरब डॉलर रहा. अमेरिका का सैन्य खर्च चीन के मुकाबले 300 फीसदी अधिक रहा.

हालांकि 2006-15 के बीच अमेरिका के सैन्य खर्च में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई है वहीं चीन के सैन्य खर्च में 132 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में आई तेजी के बाद अमेरिका के सैन्य खर्च में 21 फीसदी की कमी आई है. इसकी प्रमुख वजह अफगानिस्तान और इराक से अमेरिकी सेना की वापसी है. 

इसके साथ ही 2011 के बजट कंट्रोल एक्ट की वजह से भी अमेरिका को सैन्य खर्च में कटौती के लिए मजबूर होना पड़ा है. हालांकि इन कटौतियों के बावजूद अमेरिका अभी भी दुनिया में सबसे ज्यादा सैन्य खर्च वाला देश बना हुआ है.

Military Expenditure.

2015 में सबसे ज्यादा सैन्य खर्च अमेरिका ने किया. इसके बाद चीन, सउदी अरब, रूस और ब्रिटेन ने सैन्य खर्च में पैसा लगाया. ग्राफिक्स सिपरी

सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में अमेरिका का सैन्य खर्च स्थिर रहने की उम्मीद है.

वहीं 2015 में चीन के सैन्य खर्च में 7.4 फीसदी की तेजी आई है. हालांकि चीन की अर्थव्यवस्था में आई मंदी की वजह से सैन्य खर्च की वृद्धि दर में गिरावट आई है.

वहीं आतंक प्रभावित अफगानिस्तान के रक्षा खर्च में 19 फीसदी की गिरावट आई. 2015 में अफगान सरकार ने 19.9 करोड़ डॉलर सैन्य खर्च किया. 

2015 में आतंक प्रभावित अफगानिस्तान के सैन्य खर्च में 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई

रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान के सैन्य खर्च में आई कमी की वजह शायद विदेशी सैनिकों की जगह स्थानीय सेना की तरफ से देश की सुरक्षा जिम्मेदारी संभालना है. अफगानिस्तान से अधिकांश विदेशी टुकड़ियां वापस जा चुकी हैं.

अफगानिस्तान सेना की फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा विदेशी चंदे के तौर पर आता है. 2015 में यह रकम 5.35 अरब डॉलर रही. 

रूस से आगे निकला सउदी

सैन्य खर्च के मामले में 2015 में सउदी अरब पिछले साल के मुकाबले एक पायदान ऊपर उठकर तीसरे पायदान पर जा पहुंचा. 2015 में सउदी अरब ने कुल 87.2 अरब डॉलर खर्च किए. 

सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी करेंसी रूबल की कीमत में आई गिरावट की वजह से रक्षा खर्च के मामले रूस सउदी अरब से पिछड़ गया. इसके अलावा यमन में सैन्य अभियान पर किए गए अतिरिक्त खर्च की वजह से भी सउदी के सैन्य खर्च में बढ़ोतरी हुई है. 

तेल की कीमतों में आई गिरावट की वजह से सउदी अरब के सैन्य खर्च की वृद्धि दर में हालांकि गिरावट आई है.

रूस पिछले साल सैन्य खर्च के मामले में जहां तीसरे पायदान पर था लेकिन 2015 में वह खिसकर चौथे पायदान पर चला गया. रूस का सैन्य खर्च 66.4 अरब डॉलर रहा जो ब्रिटेन के सैन्य खर्च 55.5 अरब डॉलर से ज्यादा है.

यूरो की कीमत में आई गिरावट की वजह से ब्रिटेन सैन्य खर्च के मामले में फ्रांस से आगे निकलने में सफल रहा. ब्रिटेन सैन्य खर्च के मामले में पांचवां बड़ा देश है वहीं फ्रांस फिसलकर सातवें पायदान पर जा पहुंचा.

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First published: 6 April 2016, 12:56 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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