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जानिए क्या है वीटो पावर ? जिसका इस्तेमाल कर चीन ने भारत के सबसे बड़े दुश्मन 'मसूद अजहर' को बचाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 March 2019, 16:14 IST

भारत के नंबर एक दुश्मन और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में एक बार फिर चीन ने अड़ंगा डाल दिया है. सुरक्षा परिषद के पांच सदस्यों में से चार अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का समर्थन किया, लेकिन चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर इसका विरोध किया. जिसके बाद एक बार फिर मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित होने से बच गया.

इसके बाद एक बार फिर लोगों को यह जानने में दिलचस्पी बढ़ गई है कि वीटो पॉवर में ऐसा क्या है जिसका इस्तेमाल कर हर बार चीन मसूद अजहर को बचा लेता है?

वीटो पावर

लैटिन भाषा के शब्द Veto का मतलब होता है 'मैं अनुमति नहीं देता'. प्राचीन रोम में कुछ अधिकारियों के पास यह पावर होती थी कि वे इन शक्ति का इस्तेमाल करके रोम सरकार की किसी कार्रवाई को रोक देते थे. यह शब्द तभी से किसी चीज को करने से रोकने की शक्ति के लिए इस्तेमाल होने लगा.

आज यूएन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और यूके के पास वीटो पॉवर है. वीटो का मतलब यहा है कि अगर पाचों स्थायी सदस्य में से कोई भी सदस्य किसी बात से सहमत नहीं है तो वो वीटो का इस्तेमाल कर सकता इसे रोक सकता है. चीन ने मसूद के मामले में यही किया है.

वीटो पावर का प्रस्ताव

यूक्रेन के शहर क्रीमिया, याल्टा में साल 1945 के फरवरी महीने में एक सम्मेलन हुआ. इस सम्मेलन में सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसफ स्टालिन ने वीटो पावर का प्रस्ताव रखा. ये सम्मेलन युद्ध के बाद की योजना बनाने के लिए हुआ था. इसमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, सोवियत संघ के प्रधानमंत्री जोसफ स्टालिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डी. रूजवेल्ट ने हिस्सा लिया था. इस सम्मेलन को क्रीमिया सम्मेलन कहा जाता है.

हालांकि यह भी कहा जाता है कि वीटो का कॉन्सेप्ट 1920 में ही आ गया था. तब लीग काउंसिल के स्थायी और अस्थायी सदस्य दोनों के पास वीटो पावर था. वीटो का सबसे पहली बार इस्तेमाल 16 फरवरी 1946 को सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (यूएसएसआर) ने किया था. तब यूएसएसआर ने सीरिया और लेबनान से विदेशी सैनिकों की वापसी के प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल किया था.

सबसे ज्यादा इस्तेमाल रूस ने किया

वीटो का अब तक 291 बार इस्तेमाल हो चुका है. शुरुआती सालों में सोवियत रूस ने इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया. सोवियत रूस अब तक यह 141 बार वीटो का इस्तेमाल कर चुका है. यह अब तक के कुल वीटो का करीब आधा है. वहीं अमेरिका ने भी अब तक 83 बार वीटो का इस्तेमाल किया है. अमेरिका ने सबसे पहली बार 17 मार्च 1970 को वीटो का इस्तेमाल किया था.

1970 के बाद से अब तक अमेरिका अन्य स्थायी सदस्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा बार वीटो का इस्तेमाल कर चुका है. अमेरिका ने इजरायल के हितों की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा बार वीटो किया है. वहीं ब्रिटेन ने 32 बार वीटो का इस्तेमाल किया है. ब्रिटेन ने सबसे पहली बार 30 अक्टूबर, 1956 को स्वेज संकट के दौरान इसका इस्तेमाल किया था.

इसके अलावा फ्रांस ने पहली बार 26 जून, 1946 को वीटो इस्तेमाल किया था. फ्रांस अब तक 18 बार वीटो का इस्तेमाल कर चुका है. जबकि चीन ने 15 बार वीटो का इस्तेमाल किया है. चीन ने पहली बार 13 दिसंबर, 1955 को वीटो का इस्तेमाल किया था.

First published: 14 March 2019, 16:11 IST
 
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