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एलएसी पर भाले-रॉड लेकर चीनी सैनिकों की भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश, भारतीय जवानों ने दिया मुंहतोड़ जवाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 September 2020, 7:26 IST

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन (India-China) के बीच पैदा हुआ तनाव अभी भी जारी है. चीन की ओर से भारतीय सीमा में घुसपैठ की लगातार कोशिश की जा रही है. लेकिन शरहद पर तैनात भारतीय जवान चीन की हर साजिश को हर बार नामकाम कर देते हैं. बताया जा रहा है कि चीनी सैनिकों ने एक बार फिर से पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर के पास अहम चोटियों पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने रेजांग ला के पास घुसपैठ की कोशिश की, जिसे भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक, रेजांग ला के उत्तर में स्थित मुखपरी चोटी और रेकिन ला के पास 50-60 चीनी सैनिक बरछे, भाले और धारदार हथियारों लेकर पूरी तैयारी के साथ गलवां घाटी जैसी किसी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं. सोमवार रात चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने खबर दी की भारतीय सेना ने पैंगोंग-त्सो‌ झील के दक्षिण में एलएसी पार कर शेनपाउ माउंटेन (गॉड-पाउ) पर चीनी सैनिकों पर फायरिंग की. चीन की पीएलए सेना के वेस्टर्न थियेटर कमांड ने भी बयान जारी कर भारत पर फायरिंग का आरोप लगाया है.


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चीनी सेना के मुताबिक, शाम के वक्त चीनी सैनिक जब बातचीत के लिए भारतीय सेना की ओर बढ़ रहे थे तब भारतीय सेना ने चेतावनी देने के लिए वार्निंग-फायर किए. हालांकि, सुबह होने पर पूरी सच्चाई सामनेे आ गई और भारतीय सेना ने चीनी सेना और चीनी अखबार की पोल खोल दी. भारतीय सेना ने बयान जारी कर कहा कि चीनी सेना एलएसी पर भारत की एक फॉरवर्ड-पोजिशन की तरफ बढ़ रही थी, जब इसका विरोध किया गया तो चीनी सेना ने हवाई फायरिंग कर दी. उकसावे की इस कारवाई के बावजूद भारतीय सैनिकों ने संयम रखा और बेहद परिपक्वता और जिम्मेदारी के साथ पूरी स्थिति को संभाला.

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बता दें कि सीमा पर जारी तनाव के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 45 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत और चीन की ओर से गोलीबारी की गई हो. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव बढ़ने के बीच सूत्रों ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लगभग 50-60 सैनिक सोमवार शाम छह बजे के आसपास पैंगोंग झील क्षेत्र के दक्षिणी तट पर स्थित भारतीय चौकी की ओर बढ़े, लेकिन वहां तैनात भारतीय सेना के जवानों ने दृढ़ता से उनका सामना किया और उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर दिया.

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बता दें कि इससे पहले आखिरी बार एलएसी पर साल 1975 में फायरिंग हुई थी, जब चीनी सेना ने अरूणाचल प्रदेश में पैट्रोलिंग कर रहे असम राईफल्स के जवानों पर फायरिंग कर दी थी. इस घटना में भारत के चार जवान शहीद हो गए थे. भारतीय सेना के प्रवक्ता, कर्नल अमन आनंद के मुताबिक सोमवार की घटना के दौरान भारतीय सेना ने ना तो एलएसी पार करने की कोशिश की और ना ही फायरिंग या फिर किसी और तरह का आक्रमक का व्यवहार किया.

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First published: 9 September 2020, 7:26 IST
 
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