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चीनी छात्रों को यह जानने के लिए भारत आना चाहिए लोकतंत्र कैसे काम करता है : दलाई लामा

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 October 2019, 13:04 IST

गुरु नानक की 550 वीं जयंती पर व्याख्यान देते हुए तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने मंगलवार को कहा कि चीनी छात्रों को अध्ययन करने के लिए भारत आना चाहिए और यह जानना चाहिए कि लोकतंत्र कैसे काम करता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश था और कुछ लोगों और घटनाओं के कारण इसकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए. 84 वर्षीय दलाई लामा चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित कर रहे थे.

चीन की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए दलाई लामा ने कहा कि वहां कोई स्वतंत्र मीडिया नहीं है. उन्होंने कहा “कुछ चीनी छात्रों ने कुछ समय पहले मुझसे संपर्क किया था. मुझसे संपर्क करने से पहले उन्होंने सोचा कि मैं रूढ़िवादी था, लेकिन मुझसे मिलने के बाद उनकी धारणा बदल गई. मेरा दृढ़ता से मानना है कि चीनी छात्रों को भारत आना चाहिए और भारतीय संस्थानों को भी उनका स्वागत करना चाहिए.

चीन और भारत के संबंधों पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और दोनों को एक दूसरे की जरूरत है. दोनों बड़े राष्ट्र हैं उन्हें आर्थिक उद्देश्यों के लिए एक-दूसरे की जरूरत है. भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर दलाई लामा ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान भावुक हैं उन्हें इसके बजाय अधिक तार्किक होना चाहिए. उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके भाषण को देखें. उन्होंने जो कहा वह भावनात्मक था, दूसरी तरफ, भारतीय प्रधानमंत्री का भाषण उपयुक्त था.

दलाई लामा ने म्यांमार में हिंसा भड़कने के बाद रोहिंग्याओं के विस्थापन के बारे में बात करते हुए कहा कि वह वाशिंगटन में थे जब हिंसा भड़की, जिसके बाद उन्होंने म्यांमार के नेताओं से बात की. उन्होंने मुझे बताया कि स्थिति बहुत जटिल थी, लेकिन यह दुखद था. भारत के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर अपने विश्वास को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "कुछ नकारात्मक लोगों या घटनाओं के कारण, हम भारत में धर्मनिरपेक्षता की अनदेखी नहीं कर सकते. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. देश ने दुनिया को सिखाया है कि विभिन्न धर्म एक साथ मौजूद हो सकते हैं.”

इससे पहले, छात्रों और कर्मचारियों की सभा को संबोधित करते हुए, दलाई लामा ने गुरु नानक के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि नानक की शिक्षाएं आज की दुनिया में प्रासंगिक हैं. 21 वीं सदी को 'डायलॉग की सदी' के रूप में उल्लेख करते हुए दलाई लामा ने कहा कि हथियारों का कोई उपयोग नहीं होना चाहिए और देशों को मेज पर मतभेदों को दूर करना चाहिए.

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First published: 17 October 2019, 13:04 IST
 
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