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क्रिस्टिना लैंबः पाकिस्तान में लंबी शांति की उम्मीद नहीं, फिलहाल अफगानिस्तान खतरे में

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 January 2016, 16:50 IST

प्रसिद्ध वॉर जर्नलिस्ट क्रिस्टिना लैंब ने कहा है कि पाकिस्तान में भी लंबे समय तक शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन फिलहाल अफगानिस्तान का भविष्य खतरे में हैं.

लैंब ने गुरुवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2016 में अपनी नयी किताब 'फेयरवेल काबुल: फ्रॉम अफगानिस्तान टू अ मोर डेंजरस वर्ल्ड' पर आोयजित सत्र के बाद राजस्थान पत्रिका से बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान में हालात सरकार के काबू से बाहर होते जा रहे हैं और आने वाले सालों में अफगानिस्तान का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.

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बातचीत के सत्र में लैंब ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ एक बिजनेसमैन हैं, वह चाहते हैं कि पाकिस्तान की डूबती हुई अर्थव्यवस्था सुधरे. इसलिए वह भारत से संबंध सुधारने के इच्छुक हैं.

लैंब ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया लाहौर यात्रा को भारत-पाक संबंध सुधारने की दिशा में एक अच्छा कदम बताते हुए कहा कि लेकिन इसके तुरंत बाद पठानकोठ में हुआ हमला शर्मनाक है.

नवाज शरीफ एक बिजनेसमैन हैं, वह चाहते हैं कि पाकिस्तान की डूबती हुई अर्थव्यवस्था सुधरेः क्रिस्टिना लैंब

पाकिस्तान के अंदरूनी हालात पर टिप्पणी करते हुए लैंब ने कहा कि पाकिस्तान की हालत इतनी उलझी हुई है कि अगर उसे चेस खेलने को कहा जाए तो वह एक साथ 10 दिशा में खेलेगा.

लैंब ने पत्रिका से कहा कि अफगानिस्तान के मौजूदा हालात के लिए पश्चिमी देश भी जिम्मेदार हैं. लैंब ने कहा कि अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं के जाने के बाद अमरीका सहित कई पश्चिमी देशों ने जल्दबाजी में गलत कदम उठा लिए और उसी का नतीजा है कि वहां तालिबान आज भी जिंदा है.

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उन्होंने बताया कि 2004 के बाद अमेरिका ने तालिबान और अल-कायदा को खत्म करने के लिए ड्रोन से हमले शुरू कर दिए थे, लेकिन उसमें ज्यादातर निर्दोष नागरिक मारे गए थे. इन हत्याओं को बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के नोबल शांति पुरस्कार के नीचे ढंक दिया गया.

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने करजई को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के तौर पर सिर्फ इसलिए स्वीकार कर लिया, क्योंकि वह अच्छे दिखते थे और फरार्टेदार अंग्रेजी बोलते थे, जबकि वह भी कभी तालिबान के लिए फंड रेजिंग का काम करते थे.

पश्चिम ने पूर्व राष्ट्रपति करजई को सिर्फ इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वो फरार्टेदार अंग्रेजी बोलते थेः क्रिस्टिना लैंब

लैंब ने कहा, " किसी भी लड़ाई का सबसे बड़ा खमियाजा औरतें भुगतती हैं. वे या तो पीड़ित होती हैं या फिर सैनिकों की पत्नियां. उन्हें बड़े ही संघर्ष से अपने बच्चों को पालना पड़ता है."

लैंब ने कहा कि अफगानिस्तान में सुरक्षा, नौकरी और अन्य सुविधाएं आज भी नदारद हैं.

लैंब ने मां बनने के बाद अपनी जिंदगी में आए बदलाव के बारे में बताते हुए कहा कि चूंकि अब दुनिया भर में लड़ाइयां ज्यादा हो रही हैं तो वह भी बहुत व्यस्त हो गई हैं, लेकिन मां बनने के बाद वह हर जगह खुद को महफूज रखने की कोशिश करती हैं.

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First published: 22 January 2016, 16:50 IST
 
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