Home » इंडिया » CIC Pulls Up Arvind Kejriwal Office Over RTI Issue
 

सीआईसी ने केजरीवाल को फटकारा, लगाया 1 लाख का जुर्माना

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 January 2016, 20:30 IST

एक समय में देश के प्रमुख आरटीआई एक्टिविस्ट रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार में लोगों को आरटीआई से जानकारी मिलनी दूभर हो गई है. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक आरटीआई पर हीलाहवाली के लिए उन्हें जमकर फटकारा है और उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मुख्यमंत्री केजरीवाल के ऑफिस ने संवेदनहीनता दिखाते हुए एक वरिष्ठ नागरिक के आरटीआई का सही जवाब नहीं दिया. इसके कारण उन्हें सरकार के 29 विभागों का चक्कर काटना पड़ा.

केंद्रीय सूचना आयोग ने इस मामले में कहा कि यह बेहद दुखद है कि मुख्यमंत्री का ऑफिस आरटीआई को लेकर एक वरिष्ठ नागरिक के साथ इस तरह का अशोभनीय व्यवहार कर रहा है.

आयोग ने इस मामले में निर्देश देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार की सभी प्रकार की पेंशन, पेंशन नहीं दे पाने की वजह, बकाया पेंशन के भुगतान और पेंशन के भुगतान संबंधी मामलों को लेकर एक श्वेत पत्र लाए.

सूचना आयुक्त श्रीधर अचार्युलू ने केजरीवाल के ऑफिस को निर्देश दिया कि आरटीआई के इस मामले में वरिष्ठ नागरिक चरणजीत सिंह भाटिया को एक लाख रुपये मुआवजा दे. इसके साथ ही उन सभी जन सूचना अधिकारियों पर कार्रवाई करें, जिन्होंने बिना किसी कारण संबद्ध आरटीआई को इधर-उधर ट्रांसफर करते रहे.

अचार्युलू ने कहा, 'मुख्यमंत्री दफ्तर आरटीआई के मुद्दे पर अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं करता है और केवल एक पोस्ट ऑफिस की तरह आरटीआई को इधर से उधर करने का काम करता है.'

आरटीआई दाखिल करने वाले चरणजीत सिंह भाटिया ने सरकार से यह जानना चाहा था कि उनकी पत्नी की जुलाई 2014 से अप्रैल 2015 तक की दस महीने से पेंशन क्यूं रुकी है और यह कब तक मिलेगी.

गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वयं सूचना के अधिकार के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी थी. केजरीवाल ने परिवर्तन नामक एनजीओ बनाकर आरटीआई एक्ट को लागू किये जाने की मुहिम चलाई थी. जिसका नतीजतन तत्कालीन यूपीए सरकार को साल 2005 में सूचना का अधिकार कानून पास करना पड़ा.

आरटीआई में उनके योगदान को देखते हुए 2005 में मैगसैसे पुरस्कार दिया गया. लेकिन आज यह कितनी बड़ी विडंबना है कि उसी केजरीवाल के दफ्तर में लोगों को आरटीआई के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.

First published: 27 January 2016, 20:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी