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चीफ जस्टिस: कार्यपालिका के फेल होने पर न्यायपालिका का दखल

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 June 2016, 9:35 IST
(फाइल फोटो)

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा है कि न्यायपालिका केवल तब हस्तक्षेप करती है, जब कार्यपालिका अपने संवैधानिक दायित्व निभाने में विफल रहती है. एक टेलीविजन चैनल से इंटरव्यू के दौरान चीफ जस्टिस ने ये बात कही.

चीफ जस्टिस के बयान को वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस बयान का जवाब माना जा रहा है, जिसमें जेटली ने न्यायपालिका पर कार्यपालिका के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया था. 

'सरकार दायित्व निभाए तो जरूरत नहीं'

चीफ जस्टिस ने कहा कि केंद्र सरकार को दोषारोपण करने की बजाए अपने काम पर ध्यान देना चाहिए. चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि अदालतें केवल अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करती हैं, यदि सरकार अपना दायित्व पूरा करे, तो न्यायपालिका को दखल देने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.

पढ़ें: अरुण जेटली: न्यायपालिका की बढ़ती दखलंदाजी लोकतंत्र पर हमला

कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव के तेज होते स्वरों के बीच चीफ जस्टिस ने कहा, "यदि सरकार के स्तर पर विफलता या उपेक्षा दिखाई देगी, तो न्यायपालिका निश्चित रूप से अपनी भूमिका निभाएगी." 

जेटली ने लगाया था आरोप

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने न्यायपालिका पर कार्यपालिका के काम में दखल देने का आरोप लगाया था.

जेटली के आरोप के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "हम केवल संविधान द्वारा तय किए गए दायित्वों का पालन कर रहे हैं. लोग शिकायत लेकर तभी अदालतों में आते हैं जब कार्यपालिका की ओर से उनका अनादर होता है या उपेक्षा की जाती है."

न्यायपालिका में बड़ी संख्या में पद खाली होने के सवाल पर न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा, "मैं प्रधानमंत्री को इस बारे में कई बार अवगत करवा चुका हूं. इसी मुद्दे पर अब केंद्र सरकार को रिपोर्ट भी भेजने जा रहा हूं."

First published: 7 June 2016, 9:35 IST
 
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