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सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोपों के बाद CJI गोगोई बोले- न्यायपालिका खतरे में है

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2019, 18:03 IST

सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा सीजेआई रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद अदालत शनिवार को एक असाधारण और असामान्य सुनवाई की. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई पर महिला द्वारा लगाए गए इन आरोपों को कुछ ऑनलाइन वीडियो पोर्टलों द्वारा प्रकाशित किया गया था. अपने खिलाफ प्रकाशित यौन उत्पीड़न के आरोपों पर जस्टिस गोगोई ने कहा "अब चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं और न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता.

सीजेआई ने पूछा "आपको क्यों लगता है कि एक व्यक्ति न्यायाधीश बनने का फैसला करता है? प्रतिष्ठा वह सब है जो एक न्यायाधीश के लिए मायने रखती है. अगर वह भी खतरे में होगी तो बचा ही क्या है?" इस बेंच में जस्टिस अरुण मिश्रा और संजीव खन्ना भी शामिल थे. साथ ही अदालत में दोनों अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता सहित सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील राकेश खन्ना के साथ अदालत कक्ष में उपस्थित थे.

सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई पर लगाए आरोपों को बकवास बताया. जबकि वेणुगोपाल ने कहा 'न केवल न्यायाधीश बल्कि वकीलों पर भी उनके क्लाइंट का प्रतिनिधित्व करने के लिए हमला किया जाता है'. शनिवार को कुछ न्यूज़ वेबसाइटों ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व कर्मचारी द्वारा CJI पर यौन शोषण करने का आरोप लगाते हुए एक लेख प्रकाशित किया था. लेख में कहा गया है सीजेआई के कथित आचरण के बारे में 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के 22 न्यायाधीशों को लिखा गयाथा.

वेबसाइटों में छपे लेख के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के महासचिव ने आरोपों से इनकार किया था और इन्हे पूरी तरह से गलत बताया. लेख के प्रकाशन के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुबह 10.30 बजे तत्काल अदालत का सत्र बुलाकर प्रतिक्रिया दी. मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कहा, "इस सुनवाई को बुलाने की जिम्मेदारी मेरी है. हमें यह असाधारण और असामान्य कदम उठाना पड़ा क्योंकि चीजें बहुत दूर जा चुकी हैं. न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता है."

मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कहा कि वह अपने कार्यकाल के अंत तक अपने कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कोई न्यायिक आदेश पारित नहीं करेंगे और आवश्यक पड़ने पर न्यायमूर्ति मिश्रा के पास छोड़ देंगे. मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने न्यायमूर्ति मिश्रा का जिक्र करते हुए कहा, "मेरे सहयोगी यहां हमारे बीच शायद सबसे वरिष्ठ हैं. मैं इस मामले में कोई आदेश पारित नहीं करूंगा. मैं इसे छोड़ देता हूं."

न्यायमूर्ति मिश्रा ने आधे घंटे की सुनवाई के अंत में कहा कि मामले में न्यायिक आदेश पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा 'हम इसे मीडिया की बुद्धिमत्ता पर छोड़ देते हैं' न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि न्यायिक आदेश के बजाय, अदालत इसे मीडिया की बुद्धिमत्ता पर छोड़ देगी ताकि उन्हें आवश्यक संयम दिखाया जा सके. जब मेहता ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें मामले में औपचारिक कार्यवाही दर्ज करने की अनुमति दी जाए, तो सीजेआई सहमत नहीं थे.

उन्होंने कहा, "हम अब ऐसा कुछ नहीं करना चाहते. हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया संयम बरतें, जिम्मेदारी से काम करें और अपनी बुद्धिमत्ता के अनुसार काम करें. "उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो न्यायिक आदेश भविष्य में उचित समय पर पारित किए जा सकते हैं.

First published: 20 April 2019, 14:10 IST
 
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