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फर्जी टॉपरों से ज्‍यादा कसूर इन्‍हें टॉपर बनाने वालों का है

ज्ञानेश्वर | Updated on: 5 June 2016, 0:40 IST
(फेसबुक)

बिहार बोर्ड ने इंटर साइंस के टॉपर सौरभ श्रेष्ठ और तीसरे स्थान पर रहे राहुल कुमार का रिजल्ट रद्द कर दिया है. बिहार बोर्ड ने 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में टॉपर्स विवाद के बाद सात-सात टॉपर्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया था.

बोर्ड ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए हाईकोर्ट के एक रिटायर जस्टिस की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने का निर्णय लिया है. वहीं आर्ट्स की टॉपर रूबी को एक हफ्ते के भीतर दोबारा परीक्षा में बैठने को कहा गया है.

यह सही है कि 2016 में परीक्षा में कदाचार कम हुआ. इसी वजह से परीक्षार्थियों के नतीजे खराब निकले. देश भर में फर्जी टॉपरों को लेकर बिहार की थू-थू हो रही है. कार्रवाई करने में अब भी देर हो रही है. जांच का ढोल जरुर बज रहा है, पर असली दोषी को दंडित करने का इरादा नहीं दिख रहा. अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है.

पूरे मामले में फर्जी टॉपरों से ज्‍यादा कसूर इन्‍हें टॉपर बनाने वालों का है, लेकिन उनके खिलाफ अभी कार्रवाई नहीं होती दिखती. जांच इतनी पेचीदा नहीं है कि दोषियों को गिरफ्तार करने में भी अधिक देर हो. वोट बैंक की कास्‍ट केमिस्‍ट्री आड़े हो रही हो तो दूसरी बात है.

आइए, समझते हैं कि जांच क्‍यों बहुत पेचीदा नहीं है. इंटरव्‍यू कर टॉपर को फर्जी करार देना कार्रवाई की इतिश्री नहीं हो सकती. इसके बावजूद असली दोषी आजाद होंगे.

बिंदुवार समझें, कैसे पहचानें इसके शातिर दोषियों को:

  1. सबसे पहले निर्धारित परीक्षा केन्द्र के लिए आवंटित उत्‍तर-पुस्तिका के क्रम को जानें. मिलान करें कि फर्जी टॉपरों के उत्‍तर-पुस्तिका उनके क्रम से मेल खाते हैं कि नहीं? यदि नहीं, तो आवंटित उत्‍तर-पुस्तिका परीक्षा समित‍ि की ओर से कहां भेजे गये थे?
  2. अब परीक्षा-केन्‍द्र के उस कक्ष को जांच की जद में लें, जिसमें टॉपरों की सिटिंग थी.  देखें, कुल कितने परीक्षार्थी इस कक्ष में थे. अलग-अलग विषयों की परीक्षा के दिनों का ब्‍योरा प्राप्‍त हो. फिर मिलान करें कि फर्जी टॉपरों को मिले उत्‍तर-पुस्तिका क्‍या आसपास बैठे परीक्षार्थियों को मिले उत्‍तर-पुस्तिका के क्रम के ही हैं ? यदि नहीं तो गड़बड़झाले में पूरा परीक्षा-केन्‍द्र प्रशासन शामिल है?
  3. संभव है, तो इसे भी जांचें. फर्जी टॉपरों ने परीक्षा केन्‍द्र के भीतर दूसरे उत्‍तर-पुस्तिका पर जानकारी भर ही जवाब लिखें हों, जिसे बाद में गायब कर अन्‍यत्र टॉपर लायक लिखे उत्‍तर-पुस्तिका को मूल्‍यांकन के लिए भेजे जा रहे बंडल में शामिल कर लिया गया हो? इसमें लेखन की सत्‍यता भी प्रमाणित होगी.  यह उत्‍तर-पुस्तिका पर इनविजिलेटर के दस्‍तखत के मिलान से साफ पता चल जाएगा. लेकिन सवाल और कई खड़े होंगे, जो पाप का दायरा बढ़ायेगा. मसलन खास छात्रों के लिए प्रश्न-पत्र और उत्‍तर-पुस्तिका बाहर गये. ऐसे में, सिर्फ टॉपर ही नहीं बल्कि पूरे केन्‍द्र की परीक्षा पर बड़ा सवाल होगा.
  4. अब परीक्षा केन्‍द्र से आगे मूल्‍यांकन केन्‍द्र और परीक्षा समिति के स्‍तर को देखें. इसका खुलासा होना चाहिए कि अंक देने वाले परीक्ष्‍ाक सच में वे हैं कि नहीं, जो इन टॉपरों के साथ आसपास के क्रमांक वाले परीक्षार्थी की कॉपी भी देख रहे थे?
  5. संदिग्ध परीक्षा केन्‍द्र के कम-से-कम पचास टॉपरों की उत्‍तर-पुस्तिका का गहन मिलान वांछित है. इससे यह स्‍पष्‍ट होगा कि सबों के उत्तर लिखने का क्रम कहीं समान तो नहीं है. यह भी देख लिया जाना चाहिए कि उत्‍तर-पुस्तिका की जांच में कहीं गलत तरीके से नंबर तो नहीं दिए गए हैं.

उपरोक्‍त पांच बिंदुओं की जांच सभी दोषियों की पहचान करा देगा. बगैर समय गंवाये दोषियों को कठोरतम दंड देने की जरुरत है ताकि नजीर बन बने. ऐसा नहीं किया गया तो आगे भी खेल चलता ही रहेगा और बिहार की बदनामी  होती रहेगी.

First published: 5 June 2016, 0:40 IST
 
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