Home » इंडिया » Clutching at straws? Jammu kashmir govt goes after 'employee instigators' of unrest
 

कश्मीर हिंसा: पत्थरबाजों में 300 से ज्यादा सरकारी मुलाज़िम, केस दर्ज

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 October 2016, 7:27 IST
(एएफ़पी )
QUICK PILL
  • जम्मू-कश्मीर सरकार के मुताबिक विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल या हिंसा भड़काने वाले कर्मचारियों की संख्या 300 से अधिक है.
  • एक पुलिस अधिकारी ने कहा है कि इनके खिलाफ इनकी गतिविधियों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी कि वे किस हद तक हिंसा भड़काने में शामिल थे.

जम्मू कश्मीर सरकार ने ऐसे सरकारी कर्मचारियों की लिस्ट बना ली है, जिन्होंने कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में ‘आजादी आंदोलन’ में भाग लिया. अब उनके खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया जा रहा है.

कश्मीर में पिछले 92 दिन से चले आ रहे तनाव के बीच अब तक राज्य सरकार ने 310 लोगों के खिलाफ पीएसए के तहत मुकदमें दर्ज किए हैं, इनमें ज्यादातर युवा हैं. अब सरकार अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती दिखा कर संदेश देना चाहती है कि वह कश्मीर में हिंसा भड़काने वालों के साथ सख्ती से निपटेगी.

इन आरोपी कर्मचारियों की सूची सुरक्षा एजेंसियों की मदद से बनाई गई है और संबंधित जिलों के उपायुक्तों को भेज दी गई है, वे इनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे. अगस्त महीने में बारामुला के जिला मजिस्ट्रेट ने विभिन्न विभागों के मुखियाओं को आदेश दिए थे कि वे विरोध प्रदर्शनों में शामिल अपने कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें. इस आदेश के साथ ही आरोपी कर्मचारियों की सूची भी सौंपी गई थी.

ज़िला मजिस्ट्रेट ने दिया था आदेश

आदेश में कहा गया, ‘सूची में आपके विभाग के उन कर्मचारियों के नाम हैं, जो हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के विरोध में कश्मीर में हो रहे प्रदर्शन और हिंसा भड़काने में शामिल थे. इन कर्मचारियों के खिलाफ बारामुला जिले के विभिन्न थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.’

साथ ही यह भी कहा गया ‘इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर विभागीय कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि इनके खिलाफ मामले में कोई कानून सम्मत फैसला लिया जा सके.’

पत्थरबाज़ी में बड़े अधिकारी भी शामिल

सूची में शिक्षा विभाग के दस कर्मचारियों के नाम हैं. दो-दो पीएचई और सिंचाई व खाद्य नियंत्रण विभाग के हैं और एक कृषि विभाग से. कुल 139 कर्मचारियों के खिलाफ ऐसे ही आदेश जारी किए गए हैं. उनका वेतन पहले ही रोक दिया गया है.

नामजद कर्मचारियों में से 5 गैजेटेड अधिकारी हैं. इनमें से एक कश्मीर यूनिवर्सिटी के हैं. 40 शिक्षा विभाग के हैं, जबकि बाकी कृषि विभाग, कुछ श्रीनगर नगरपालिका और कई अन्य शहरी स्थानीय निकायों में कार्यरत हैं; इनमें से कई को गिरफ्तार किया जा चुका है.

हालांकि एक पुलिस अधिकारी ने कहा, कश्मीर में विध्वंसकारी गतिविधियों में लिप्त या हिंसा भड़काने वाले इन कर्मचारियों की संख्या 300 से अधिक है. अधिकारी ने कहा, इनके खिलाफ इनकी गतिविधियों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी कि वे हिंसा भड़काने में किस हद तक लिप्त थे.

हिंसक भाषण का भी आरोप

उन्होंने बताया कम से कम दस कर्मचारियों को पीएसए के तहत नामजद कर लिया गया है. इनमें से कुछ पर उत्तेजक भाषण देने और कुछ पर हिंसा भड़काने का आरोप है. हमने अब तक 30 कर्मचारियों की लिस्ट बनाई है, जिनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे. ऐसे ही कुछ अन्य आरोपी और नामजद किए जाएंगे और उनकी संलिप्तता के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

ईजैक ने सरकार पर लगाए आरोप

अगस्त में पुलिस ने प्रेस एन्क्लेव श्रीनगर में निर्दोषों को मारे जाने के खिलाफ कार्रवाई कर रहे कर्मचारी संयुक्त कार्य समिति (ईजैक) के कर्मचारी नेताओं को गिरफ्तार किया. इनमें अब्दुल कयूम वानी, तारिक अहमद सोफी, मंजूर अहमद पम्पोरी और फयाज अहमद शबनम को कुपवाड़ा की सब जेल में बंद कर दिया गया. बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया.

राज्य कर्मचारियों के खिलाफ दायर एफआईआर को ईजैक गंभीरता से जांच रहा है. समिति ने सरकार के इस कदम को कर्मचारियों के प्रति प्रताड़ना बताया और कहा कि अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सरकार कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रही है.

ईजैक अध्यक्ष ने कैच से कहा कि हम इसकी निंदा करते हैं और इसे तुरंत रोकने की मांग करते हैं. अगर सरकार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो हम इसका सिरे से विरोध करेंगे और संगठित हो कर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.

ईजैक प्रवकता फारुक अहमद ट्राली ने बताया आगे की कार्यवाही तय करने के लिए समिति शीघ्र ही अपने पदाधिकारियों की एक बैठक बुलाएगी. ‘अब तक हम यह नहीं जानते कि आरोपी कर्मचारी हिंसा में शामिल थे भी या नहीं. हम सरकार की बात नहीं मानते.

सरकारी सेवा नियमों के अनुसार, 24 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस हिरासत में रहने वाले सरकार कर्मचारी को स्वतः निलम्बित मान लिया जाता है. कुछ ट्रेड यूनियन नेता हालांकि यह मानते हैं कि कुछ कर्मचारियों को जबरन इस हिंसा में धकेला गया.

कर्मचारी भी समाज का हिस्सा

नाम न बताने की शर्त पर एक कर्मचारी नेता ने कहा, सरकारी कर्मचारी भी समाज का एक हिस्सा हैं. इसलिए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ युवाओं के बहकावे में आकर वे इस हिंसा में शामिल हो गए हों. कुछ मामलों में हो सकता है वे जानबूझ कर प्रदर्शन करते नजर आ गए हों जब उन्हें दिखा कर हिंसा में सरकारी प्रतिनिधित्व दर्शाने की कोशिश की गई हो. हो सकता है यह उन्हें और उनके परिवारों को बचाने के लिए किया जा रहा हो.

उन्होंने कहा क्या कुछ प्रमुख राजनेता सरकारी सुरक्षा के बीच प्रदर्शन में भाग लेते नहीं दिखे. क्या उनके पड़ोसी आजादी के नारे नहीं लगा रहे थे? फिर केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करने से क्या होगा? सरकार को शांति कायम करने दो तभी सामान्य स्थिति बहाल हो सकेगी.

First published: 8 October 2016, 7:27 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी