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अखिलेश यादव जी हत्या की आशंका से पहले का यह खत पढ़ लीजिए!

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2016, 15:51 IST
(फाइल फोटो)
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राम प्रकाश ने सीएमओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है.
  • 25 जुलाई को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश को डॉक्टर राम प्रकाश ने खत लिखकर बदले की भावना से जिला जेल में ट्रांसफर का आरोप लगाया है.
  • मार्च से डॉक्टर राम प्रकाश को वेतन नहीं मिला है. इसके अलावा गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद उन्हें चिकित्सा अवकाश से वंचित रखा गया है.
  • चिकित्साधिकारी ने आशंका जाहिर की है कि अगर उनके साथ किसी तरह की दुर्घटना घटती है, तो इसके लिए मुख्य चिकित्साधिकारी जिम्मेदार होंगे.

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में तैनात चिकित्साधिकारी डॉक्टर राम प्रकाश ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर संगीन आरोप लगाते हुए एक पत्र लिखा है. इस समय राम प्रकाश फिरोजाबाद जिला जेल में तैनात हैं.

25 जुलाई को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश को संबोधित इस खत में डॉक्टर राम प्रकाश ने मुख्य चिकित्साधिकारी पर बदले की भावना से जिला कारागार में ट्रांसफर करने का आरोप लगाया है. चिकित्साधिकारी ने आशंका जाहिर की है कि अगर उनके साथ किसी तरह की दुर्घटना घटती है, तो इसके लिए मुख्य चिकित्साधिकारी जिम्मेदार होंगे.

डॉक्टर राम प्रकाश का आरोप है कि उन्हें अपने दर्जे से नीचे की पोस्ट पर जिला जेल में तैनाती दी गई है. यही नहीं बिना किसी वजह के मार्च महीने से उनका वेतन रुका हुआ है. राम प्रकाश डायबिटीज समेत कई बीमारियों से भी पीड़ित हैं, इसके बावजूद उन्हें चिकित्सा अवकाश तक नहीं मिला.

कैच को उनका वह खत मिला है, जिसमें उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को कठघरे में खड़ा किया है. यहां हम हूबहू उनके खत की प्रति प्रकाशित कर रहे हैं: 

चिकित्साधिकारी का दर्द

सेवा में,                                                                             दिनांक-  25.07.2016

                महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य

                महानिदेशालय स्वास्थ्य भवन लखनऊ उ. प्र.

विषय - हत्या की आशंका से पूर्व का बयान.

महोदय ,

                 सविनय निवेदन है कि मैं जिला कारागार फिरोजाबाद में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हूं. मैं डायबिटीज का मरीज़ हूं और सुबह-शाम इन्सुलिन लेता हूं. जनवरी 2016 में जब मैं नवीन प्रा. स्वास्थ्य केंद्र इटौली पर तैनात था, तब मुझे पैनिक एंग्जायटी की समस्या हो गई थी. ढाई महीने तक नियमित दवा लेने और 21 फरवरी से 22 मार्च तक स्वास्थ्य लाभ हेतु अर्जित अवकाश लेने के बाद में पूरी तरह ठीक हो गया.

        मैं छुट्टी से वापस लौटा तो मुझे पता चला कि मुख्य चिकित्साधिकारी ने बदले की भावना से मेरा ट्रांसफर जिला कारागार में कर दिया है. जिला कारागार में लेवल 3 की पोस्ट खाली थी. जबकि मैं लेवल 1 में हूं. जबकि लेवल 1 की जिले में 45 पोस्ट खाली हैं और 35 चिकित्साधिकारी कार्यरत हैं और लेवल-2 की ग्यारह पोस्ट हैं और सभी भरी हैं. मैंने मुख्य चिकित्साधिकारी को 15.02.16 को आशु लिपिक रामजीलाल गुप्ता के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था जो एसीआर भेजने के पैसे लेता था और उसके द्वारा एसीआर न भेजने के कारण 2014 में सात चिकित्साधिकारियों का प्रमोशन लेवल-1 से लेवल -2 में नहीं हो सका.

मुख्य चिकित्साधिकारी ने बजाय जांच करने के उसकी पेंशन सुनिश्चित कर दी. 19 मई को मैंने एक पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखा, जिसमें अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर अपनी मूल तैनाती नवीन प्रा. स्वास्थ्य केंद्र इटौली पर करने का निवेदन किया. मैंने आरटीआई के माध्यम से आशु लिपिक रामजीलाल गुप्ता पर हुई कार्रवाई के बारे में पूछा.

मुख्य चिकित्साधिकारी महोदय ने आरटीआई का जवाब तो आज तक नहीं दिया, तीन दिन बाद जेल से डॉक्टर धर्मेंद्र हरजानी का ट्रांसफर पर दिया. इससे मेरा ड्यूटी शिड्यूल और मुश्किल हो गया और नियमित दवा लेने के बावजूद मेरी स्वास्थ्य समस्या सुधरने के बजाय बढ़ गई. 22 जून को मैंने पुनः चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर अपनी स्वास्थ्य समस्या बताई और चिकित्सा अवकाश के लिए कहा. महोदय ने स्पष्ट शब्दों में कहा- हम तुम्हें चिकित्सा अवकाश नहीं दे सकते. 10 जुलाई को डॉक्टर अमित जिंदल का जेल से ट्रांसफर कर दिया और डॉक्टर संजीव कुमार को उनकी जगह जेल में ट्रांसफर कर दिया.

12 जून को मैंने पुनः जिला अस्पताल के सीनियर कंसलटेंट डॉ अजय अग्रवाल से परामर्श लिया. उन्होंने मुझे दो हफ्ते का रेस्ट लिखा है. दांत में अक्सर दर्द होता रहता है, इसके लिए जिला अस्पताल के डेंटिस्ट ने आरसीटी कराने के लिए लिखा है. मैंने स्वास्थ्य संबंधी नए-पुराने प्रपत्रों के साथ 15 जुलाई को चिकित्सा अवकाश के लिए लिखित फॉर्म भरकर चिकित्साधिकारी को दिया है. मगर महोदय ने अवकाश देने से मना कर दिया है.

          बिना किसी वजह के मेरा मार्च के बाद से वेतन भी मुख्य चिकित्साधिकारी ने रोक रखा है. मौखिक रूप से कई बार और 09.06.16 को मैंने लिखित पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को दिया पर मार्च के बाद से मेरा वेतन अभी तक नहीं निकल सका है.

                                  मैं 23.06.16 को अपर निदेशक आगरा व महानिदेशक महोदय को अपने स्वास्थ्य,चिकित्सा अवकाश व वेतन के बारे में लिख चुका हूं पर कहीं से कोई राहत नहीं मिली.

       महोदय  इनसोम्निया व एंग्जायटी के लिए सरटालिन, क्लोनेज़ीपाम व ज़ोल्पिडेम मुझे नियमित लेनी पड़ती हैं. रात में नींद बहुत देर से आती है और दिन में दोपहर तक नींद आती रहती है. मैं अकेला  रहता हूं. जेल शहर से पांच किलोमीटर दूर है. माचिस, आटा, सब्जी तक लेने शहर से पांच किलोमीटर जाना पड़ता है. एंग्जायटी के समय शुगर लेवल तेज़ी से नीचे गिरता है. 15.05.16 को मेरा शुगर लेवल 48 और 23.05.16 को 52 और 10.06.16 को 56 था.

ऐसे में भी मुख्य चिकित्साधिकारी शाम पांच से सुबह नौ बजे तक कारागार की ड्यूटी. दिन में नौ से पांच तक पोस्टमॉर्टम ड्यूटी और पांच से सुबह नौ बजे तक फिर कारागार ड्यूटी की उम्मीद करते हैं. 29 मई को मैंने सात पोस्टमॉर्टम किए. सड़ी हुई लाशें जहां खड़ा होना दुश्वार था. मोरचरी ऐसी जगह पर है जहां का तापमान 45 डिग्री से ऊपर रहा होगा. बैठकर खाना खाने तक की जगह नहीं है.

पंखा चलवाने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक को कई फोन किए. डेढ़ घंटा पंखा चला कर बंद कर दिया. अगर पानी की बोतल और मीठा मेरे साथ न होता और जब तक आधा किलोमीटर से पानी लेकर व्यक्ति आएगा, तब तक किसी भी इन्सुलिन लेने वाले व्यक्ति की हाइपोग्लाइसीमिया से मौत हो सकती है.

           मेरी स्वास्थ्य समस्या ऐसी है जिसके साथ मैं काम तो कर सकता हूं, परंतु उससे तात्कालिक रूप से वह मेरे लिए जानलेवा हो सकता है और  लंबे समय में मेरे स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डाल सकता है.

           मेरे साथ भी कहीं पर किसी भी तरह से ऐसी दुर्घटना घटती है तो इसके लिए सीधे तौर पर मुख्य चिकित्साधिकारी को ज़िम्मेदार ठहराया जाए. मेरा वेतन निकलवा दिया जाए. मेरा एनपीएस का और एसीपी का पैसा मेरे मां-बाप को दे दिया जाए (रामजीलाल गुप्ता द्वारा एसीआर न भेजने के कारण मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और एसीपी की पहली लिस्ट में मेरा नाम नहीं है). 2014 में मेरे जवान भाई की मृत्य के बाद उसकी आठ साल व चार साल की बच्चियां मुझ पर आश्रित हैं. सरकार उनके पालन-पोषण व अध्ययन की व्यवस्था करे. जिन-जिन अधिकारियों को मैंने पत्र लिखे हैं वे सब मेरी फाइल में उपलब्ध हैं.

                                               सधन्यवाद.                    

प्रार्थी-डॉक्टर राम प्रकाश, चिकित्साधिकारी, जिला कारागार फिरोजाबाद, उ.प्र.,वरिष्ठता क्रमांक-13517

First published: 5 September 2016, 15:51 IST
 
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