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मंत्रियों की बर्खास्तगी, चुनावी साल में छवि सुधार अभियान या कुछ और?

अतुल चंद्रा | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को खनिज मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को बर्खास्त कर दिया. वर्तमान मंत्रिमंडल में उन्हें सबसे भ्रष्ट मंत्री माना जाता था. साथ ही, पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह को भी बर्खास्त कर दिया गया है. सम्भवतः उन पर लगे भूमि हड़पने के आरोपों के कारण ऐसा किया गया है. प्रजापति ने कांग्रेस सांसद संजय सिंह की पत्नी अमीता मोदी को अमेठी से हराया था जबकि राजकिशोर हरैया से विधायक हैं. प्रजापति को 2013 में मंत्री बनाया गया था.

भाजपा ने हाल ही अपनी तिरंगा यात्रा के दौरान आरोप लगाया था कि राजकिशोर ने बाढ़ राहत, राशन सामग्री के वितरण और निर्माण कार्यों में काफी पैसा बनाया है.

प्रजापति की बर्खास्तगी से जैसे भूचाल आ गया है क्योंकि उन्हें सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का बहुत ही करीबी माना जाता है. उन्हें सपा का धन कुबेर समझा जाता रहा है.

आईजी रैंक के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 2015 में पुलिस शिकायत दर्ज कराई थी कि लोकायुक्त अदालत में प्रजापति के खिलाफ चल रहे एक मामले को लेकर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने उन्हें फोन पर धमकाया था.

अमिताभ ठाकुर की आरटीआई एक्टिविस्ट पत्नी नूतन ठाकुर ने प्रजापति के खिलाफ भ्रष्टाचार की एक शिकायत दर्ज कराई थी. प्रजापति की बर्खास्तगी इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के तीन दिन बाद हुई है जिसमें अदालत ने अवैध खनन की सीबीआई जांच का आदेश वापस लेने के राज्य सरकार के आग्रह को ठुकरा दिया था.

सीबीआई जांच का आदेश देने के साथ ही अदालत ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों के शपथ पत्रों को ‘झूठा’ बताकर खारिज कर दिया

मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायाधीश यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने 28 जुलाई को सीबीआई को इस बात की जांच के आदेश दिए थे कि क्या कई खनन पट्टाधारियों की लीज 2012 में समाप्त होने के बाद गैरकानूनी रूप से बढ़ाई गई है.

सीबीआई जांच का आदेश देने के साथ ही अदालत ने उन सभी जिला मजिस्ट्रेटों के शपथ पत्रों को ‘झूठा’ बताकर खारिज कर दिया था जिनमें कहा गया था कि उनके क्षेत्र में कोई भी गैर-कानूनी खनन नहीं हो रहा है. अदालत ने प्रधान सचिव (खनन) के इस शपथ पत्र को भी केवल बहानेबाजी बताया था कि अवैध खनन के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है.

इस मामले में आगे सुनवाई 12 सितंबर को होनी थी लेकिन इद-उल-अजहा के कारण यह सुनवाई अब बाद में किसी तारीख को होगी.

नोएडा के चीफ इंजीनियर यादव सिंह के मामले में जिस प्रकार सरकार ने पूरी बेशर्मी के साथ आगे बढ़कर सीबीआई जांच को रोकने का प्रयास किया उसी प्रकार इस मामले में भी सरकार ने अदालत को यह समझाने का प्रयास किया कि सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है.

प्रजापति की बर्खास्तगी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा अपनी छवि सुधारने के अंतिम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, वहीं कुछ लोग इसे पारिवारिक झगड़े का ही एक और अध्याय मान रहे हैं. गौरतलब है कि बर्ख्स्तगी के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने यह बयान देकर स्थितियों को और जटिल बनाने का काम किया है कि उन्हें इस बर्खास्तगी की खबर ही नहीं थी.

छवि बनाने का यह कदम एक पहेली जैसा है और जाहिरा तौर पर हाईकोर्ट के सीबीआइ जांच के दबाव के कारण यह कदम उठाया गया है क्योंकि दिसंबर 2015 में जब अखिलेश ने एसी ही कलाबाजी दिखाने का प्रयास किया था तब भी प्रजापति उनके कोप से साफ-साफ बच गए थे.

कौन है गायत्री प्रजापति

प्रजापति की कहानी रंक से राजा बनने की कहानी है. अमेठी के परसवा गांव में उन्हें 2002 में बीपीएल कार्ड जारी किया गया था. वर्ष 2012 में जब वे विधायक बन गए तब उन्हें एपीएल कार्ड जारी किया गया. उस समय उनकी घोषित आय 3.71 लाख रुपए थी.

नूतन ठाकुर की शिकायत के अनुसार प्रजापति के पास करीब 942.5 करोड़ की संचित सम्पत्ति है. आज की तारीख में इस सम्पत्ति का अनुमानित मूल्य करीब 2 लाख करोड़ रुपए बताया जाता है.

तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने इस ताकतवर मंत्री के खिलाफ मिली तीन शिकायतों के आधार पर आय से अदिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था. इनमें से एक शिकायत सोनभद्र क्षेत्र में अवैध खनन को प्रश्रय देने की भी है.

लेकिन मुलायम सिंह के मजबूत समर्थन के कारण प्रजापति को कोई आंच नहीं आई और अमिताभ ठाकुर व उनकी पत्नी को हर सम्भव तरीके से परेशान किया गया.

अवैध खनन ने एक के बाद एक आई सरकारों के लिए टकसाल का काम किया है. इससे पर्यावरण को हो रहे भयावह नुकसान की ओर से इन तमाम सरकारों नें आंखें बंद किए रखीं. खनन मंत्री रहते नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर भी अवैध खनन से अकूत संपदा बटोरने के आरोप लगे थे.

अखिलेश यादव का एक चुनावी वादा सिद्दीकी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने का भी था लेकिन मुख्यमंत्री ही जानें कि क्यों इस मुद्दे पर कभी चर्चा तक नहीं हुई.

अवैध खननकर्ताओं को संरक्षण देने के अपने इरादे सरकार ने शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिए थे. 2013 में जब युवा आइएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने यमुना व हिण्डन नदियों से रेत के अवैध खनन को रोकने का प्रयास किया तो स्थानीय सपा नेता नरेन्द्र भाटी की शिकायत पर उन्हें निलम्बित कर दिया गया. नागपाल के निलम्बन के बाद भाटी सत्ता के शीर्ष तक अपनी पहुंच की डींगें हांकते रहे.

एक टीवी चैनल को दिए गए साक्षात्कार में भाटी ने कहा कि मैंने 10.30 बजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह को फोन किया और 11.11 पर नागपाल को निलम्बित कर दिया गया. उन्होंने कहा, ‘यही है लोकतंत्र की ताकत.'

First published: 13 September 2016, 7:42 IST
 
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