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आप के 27 और विधायकों की सदस्यता पर संकट, चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को भेजा मामला

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:48 IST
(फाइल फोटो)

लाभ के पद के मामले में पहले से संकट में घिरी आम आदमी पार्टी के सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई है. चुनाव आयोग के पास मामला होने से 21 विधायकों की सदस्यता पर पहले से तलवार लटक रही है.

अब आप के 27 और विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ गई है. इन विधायकों पर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट (लाभ के पद) के दायरे में आने का आरोप सामने आया है. कानून के एक छात्र ने जून में इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी.

रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष पर नियुक्ति

आप के लिए मुसीबत की बात यह है कि चुनाव आयोग ने अब शिकायत को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है. 21 संसदीय सचिवों से थोड़ा अलग हटकर यह मामला है. कानून के छात्र विभोर आनंद ने जून में चुनाव आयोग से शिकातय की थी कि 27 आप विधायक रोगी कल्याण समिति में अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किए गए हैं.

विभोर आनंद का आरोप है कि यह पद लाभ के पद के दायरे में आता है. ऐसे में इन 27 विधायकों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए. शिकायतकर्ता विभोर के मुताबिक विधायक रोगी कल्याण समिति में सदस्य के तौर पर शामिल हो सकते हैं, लेकिन बतौर अध्यक्ष उनकी नियुक्ति नहीं हो सकती.   

राष्ट्रपति के पास पहुंची शिकायत

विभोर का कहना है कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायत राष्ट्रपति के पास भेज दी है. अब इस पर राष्ट्रपति को अपना फैसला लेना है. शिकायतकर्ता का कहना है कि रोगी कल्याण समिति अस्पताल के प्रबंधन का काम देखती है.

इस समिति में इलाके के विधायक, सांसद, प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी बतौर सदस्य शामिल होते हैं, जबकि अध्यक्ष को सरकारी सुविधाएं मिलती हैं.

विभोर का आरोप है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 27 विधायकों को अध्यक्ष बना दिया है. इससे यह लाभ के पद के दायरे में आ जाते हैं. लिहाजा उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए. इनमें 11 विधायक ऐसे भी हैं, जो संसदीय सचिव के तौर पर भी काम कर रहे हैं.

37 विधायकों पर संकट

इस मामले के बाद अब आप के कुल 37 विधायकों की सदस्यता कठघरे में है. जहां एक ओर 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति के मामले में चुनाव आयोग को अंतिम फैसला करना है, वहीं दूसरी ओर इन 27 विधायकों के मामले से आप पर दोहरी मार पड़ी है.

70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 67 विधायक हैं. ऐसे में अगर 37 विधायकों की सदस्यता जाती है, तो केजरीवाल सरकार के पास सदन में कुल 30 विधायक की बचेंगे.

हालांकि ऐसी सूरत में भी आप के पास बहुमत होगा, लेकिन अगर सदस्यता जाने के साथ इन सीटों पर दोबारा चुनाव होते हैं, तो आप को पंजाब के साथ-साथ दिल्ली में भी जोर-आजमाइश करनी पड़ सकती है.

First published: 19 September 2016, 7:04 IST
 
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