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कंडीशन अप्लाई: आप में जाने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू की शर्तें

चारू कार्तिकेय | Updated on: 21 July 2016, 8:20 IST

हाल में ही राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले नवजोत सिंह सिद्धू की आम आदमी पार्टी में जाने की अटकलें हैं. कहा जा रहा है कि पंजाब में सिद्धू को आप की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है. कैच को मिली जानकारी के अनुसार क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू आप के साथ बातचीत में अपने लिए बड़ी भूमिका की मांग कर रहे हैं और पार्टी अभी सिद्धू को कुछ देने के लिए तैयार नहीं है.

पिछले कुछ महीनों से सिद्धू की बीजेपी छोड़ कर आप में जाने की चर्चा हो रही थी. इसी साल अप्रैल महीने में बीजेपी ने सिद्धू को राज्यसभा में भेजा ताकि वह पार्टी में बने रहे. बीजेपी से जुड़े एक सूत्र ने कैच को बताया कि पार्टी में किसी को अंदेशा नहीं था कि सिद्धू बीजेपी छोड़ने जा रहे हैं.

दिलचस्प बात है कि बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने सिद्धू के फैसले के तुरंत बाद संसद परिसर में एक बैठक की जिसमें इस बात पर विचार किया गया कि सिद्धू से अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा जाना चाहिए. यह बैठक इस बात की ओर इशारा करती है कि पूर्व क्रिकेटर के इस्तीफे की खबर पार्टी में सभी लोगों को हैरान कर गई.

पंजाब में बीजेपी लंबे अरसे से शिरोमणि अकाली दल की सहयोगी पार्टी है. यहां सिद्धू के रूप में बीजेपी के पास एक मात्र बड़ा जाट सिख चेहरा था. अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी सिद्धू को वापस लाना चाहती है और उनसे पार्टी के लिए प्रचार करवाना चाहती है.

आप से सिद्धू की मांगें

बीजेपी के सामने सिद्धू ने दो शर्तें रखी थी. पहला शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन तोड़कर बीजेपी अकेले चुनाव लड़े और दूसरा उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए. जाहिर है बीजेपी सिद्धू की इन मांगों को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं थी और दोनों का रिश्ता टूट गया. कहा जा रहा है कि ऐसी ही कुछ शर्तें सिद्धू ने आम आदमी पार्टी के सामने भी रखी हैं.

1.मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार: एक सूत्र ने कैच को बताया कि सिद्धू ने आप से कहा है कि पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे. आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसके लिए मना कर दिया है.

दरअसल आप सिद्धू की छवि का लाभ उठाना चाहती है और पार्टी का स्टार प्रचारक बनाना चाहती है लेकिन मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नहीं.

2. चुनाव प्रचार में फ्री हैंड: कथित तौर पर सिद्धू ने आप के सामने यह मांग भी रखी है कि चुनाव प्रचार के दौरान उनके भाषण को दिल्ली बैठे हाईकमान द्वारा निर्देशित नहीं किया जाएगा. अपने चुनाव रैलियों में सिद्धू कुछ भी कहने की स्वतंत्रता चाहते हैं और किसी की भी आलोचना का अधिकार चाहते हैं. वह चाहते हैं कि उनके दिए भाषणों पर आप द्वारा बाद में खिंचाई ना हो. आप सिद्धू के इस प्रस्ताव से भी असहज है.

3. राज्यसभा सीट पर नजर: सिद्धू ने पंजाब चुनाव में आप की हार की सूरत में भी अपने समीकरणों का ध्यान रखा है. सिद्धू की मांग है कि अगर पंजाब में आप की हार होती है और उसके इतने विधायक जीतते हैं जो राज्यसभा में किसी प्रत्याशी को भेजने की क्षमता रखते हैं तो उस स्थिति में उन्हें ही भेजा जाए.

इस तरह के भारी-भरकम प्रस्तावों के मद्देनजर आप और सिद्धू के बीच डील होने में लंबा वक्त लग सकता है. इस्तीफा देने के बाद सिद्धू ने मौन धारण कर लिया है और आप सिर्फ उनके इस्तीफे को सलाम कर रही है. हालांकि उनके आप में जाने की चर्चाओं के बीच जगहंसाई ज्यादा हो रही है. कुछ उदाहरण यहां पेश हैं:

First published: 21 July 2016, 8:20 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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