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बीजेपी की राह चली कांग्रेस

अतुल चंद्रा | Updated on: 6 June 2016, 23:44 IST
QUICK PILL
  • कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी से प्रेरित दिखाई दे रही है. उत्तर प्रदेश में पार्टी अब उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट देगी जिनके पास कम से कम 25,000 लाइक्स हैं.
  • इसी साल मार्च महीने में बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह ने राज्य में फेसबुक लाइक के आधार पर उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने की घोषणा की थी.

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से प्रेरित दिखाई दे रही है. उत्तर प्रदेश में पार्टी अब उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट देगी जिनके पास कम से कम 25,000 लाइक्स हैं. इसी साल मार्च महीने में बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट अमित शाह ने राज्य में फेसबुक लाइक के आधार पर उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने की घोषणा की थी.

बीजेपी की इस घोषणा के बाद पार्टी की टिकट की उम्मीद में बैठे उम्मीदवारों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई थी क्योंकि अधिकांश बीजेपी नेता फेसबुक फ्रेंडली नहीं है. यहां तक कि मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी और शामली से विधायक सुरेश राणा के पेज को महज 12,856 लोग ही फॉलो कर रहे थे. 

ऐसा समझा जाता है कि कांग्रेस रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने के पहले फेसबुक पर उनकी लोकप्रियता को देखने की रणनीति अपनाई है. हालांकि इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि कांग्रेस खुद फेसबुक पर पिछड़ी हुई है. स्टोरी लिखे जाने तक इसके फेसबुक पेज पर 22,097 लाइक्स थे.

सब सही, कुछ गलत नहीं

जब हम पार्टी के लखनऊ कार्यालय में गए तो चार युवक बरामदे में एक आदमी से यह पूछने में व्यस्त थे कि क्या वह फेसबुक पर है और क्या वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस के फेसबुक पेज को लाइक कर सकता है.

जब हमने फेसबुक पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस की खराब हालत के बारे में पूछा तो एक युवा ने कहा कि पिछली बार के मुकाबले इस बार नंबर में बढ़ोतरी हुई है.

पार्टी के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी और सोशल मीडिया सेल के प्रभारी शिव पांडेय ने कहा, 'हमारी पार्टी महज डेढ़ साल से सोशल मीडिया पर सक्रिय है. जबकि अन्य दल इस मंच पर पिछले 5-6 साल से सक्रिय हैं. फिलहाल हमारे लाइक्स की संख्या 22,000 है. इसमें एक भी फर्जी लाइक नहीं है और हर दिन इस संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.' 

भारत में राजीव गांधी ने कंप्यूटर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया. उस वक्त अन्य दलों को तकनीक की बिलकुल समझ नहीं थी

फेसबुक पर 25,000 लाइक्स के आधार पर बात करते हुए पांडेय ने कहा कि पुराने सिस्टम में लोग न्यूजपेपर की क्लिपिंग दिखाते थे जिससे उम्मीदवारों की लोकप्रियता तय की जाती थी. अब इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है.

पांडेय बताते हैं, 'यह शर्त इसलिए लगाई गई क्योंकि हमारे कार्यकर्ताओं ने बताया कि वह अपने संबंधित क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं और इसलिए टिकट पर उनकी पहली दावेदारी बनती है.' उन्होंने बताया, 'अगर उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में काम किया है तो उन्हें फेसबुक पेज पर 25,000 लाइक्स हासिल करने में कोई पेरशानी नहीं होगी.' लेकिन वैसी स्थिति में क्या होगा जब कोई टिकट पाने के लिए फेसबुक लाइक्स खरीद लें?

पांडेय बताते हैं कि हम ऑनलाइन मॉनिटरिंग कमेटी की मदद से इस मसले पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि इसके अलावा उम्मीदवारों को अपने संबंधित क्षेत्र के एक बूथ स्तरीय कार्यकर्ता का मोबाइल नंबर भी देने के लिए कहा गया है. इसकी मदद से हम उम्मीदवार की तरफ से दी गई जानकारियों को सत्यापित कर सकते हैं.

बीजेपी की नकल नहीं

पांडेय ने बीजेपी की नकल किए जाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा, 'भारत में राजीव गांधी ने कंप्यूटर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया. उस वक्त अन्य दलों को तकनीक की बिलकुल समझ नहीं थी.'

असम और केरल में बुरी तरह हार के बाद कांग्रेस अगले साल उत्तर प्रदेश मेंं होने जा रहे विधानसभा चुनाव मेंं हार से बचना चाहती है. पार्टी सोशल मीडिया में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और साथ ही उसकी योजना चुनाव के पहले मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की भी है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी टीम के साथ तैयार हो चुकी है. वहीं किशोर प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के पक्ष में है. हालांकि पार्टी आलाकमान अभी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहा है.

First published: 6 June 2016, 23:44 IST
 
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