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हिमाचल प्रदेश: चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार करेगी रामदेव ट्रस्ट की लीज बहाल!

राजीव खन्ना | Updated on: 26 March 2017, 7:32 IST


हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह सरकार बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ को आवंटित जमीन की लीज फिर से बहाल करना चाहती है. अचरज की बात है कि इसी सरकार ने 2012 में सत्ता संभालते ही यह लीज निरस्त कर दी थी. पूर्ववर्ती प्रेम कुमार धूमल की भाजपा सरकार ने बाबा रामदेव को इस लीज पर भूमि आवंटित की थी. प्रदेश में इस साल के अंत तक चुनाव होने वाले हैं. इसीलिए जनता कांग्रेस सरकार के इस यू टर्न पर अचम्भित है. यही सवाल है कि जो लीज अब तक अवैध थी, वह कैसे वैध हो गई?

 

कांग्रेस का यू टर्न

17 फरवरी को प्रदेश कैबिनेट ने हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ के आग्रह पर लीज निरस्त करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का फैसला किया. इसके बदले ट्रस्ट राज्य के उच्च न्यायालय में दायर अपनी जनहित याचिका वापस ले लेगा. मामला सोलन जिले में साधुपुल के पास केहलोग स्थित 96 बीघा (28 एकड़) जमीन का है. ट्रस्ट इस जमीन पर योग व आयुर्वेद संबंधी चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान एवं स्वास्थ्य पर्यटन संस्थान की एक शाखा खोलना चाहता है. संस्थान में हर्बल चिकित्सकीय पौधे भी लगाए जाने का प्रस्ताव है.

 

99 साल के इस लीज अनुबंध के तहत कथित तौर पर ट्रस्ट द्वारा 17 लाख रूपए का भुगतान किया जाना है. साथ ही लीज की अवधि के दौरान 1 रूपए प्रतिवर्ष का भुगतान किया जाना है. ट्रस्ट ने फरवरी 2013 में लीज निरस्त करने तक उक्त जमीन पर 11 करोड़ रूपए का निवेश कर चुका था. सरकार को अभी भी यह तय करना है कि ट्रस्ट को जमीन दोबारा आवंटित की जाए या नहीं. कसुमपति से सरकार के अपने ही विधायक अनिरुद्ध सिंह ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह ट्रस्ट को जमीन न लौटाए. इस जमीन पर गौ सदन, अनाथालय या खेल परिसर बनाया जाए.

 

बड़ा है मुद्दा


ट्रस्ट को लीज पर जमीन देने का मुद्दा 2012 में बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है. कांग्रेस ने धूमल सरकार के खिलाफ इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ा था. पार्टी का तर्क था कि ट्रस्ट को भूमि आवंटन में भू अधिनियमों का उल्लंघन किया गया और 35.4 करोड़ रूपए की लागत वाली जमीन ट्रस्ट को कौडि़यों के भाव दे दी गई.


इस मामले पर सरकार के यू टर्न ने राजनीति को गरमा दिया है और सरकार अचानक बदले अपने फैसले के पक्ष में कोई वाजिब तर्क भी नहीं दे पा रही. यह कदम पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. इस समय दो तरह की विचारधाराएं चल रही
हैं. पहली यह कि प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत रामदेव के करीबी माने जाते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि सरकार के इस फैसले में उन्हीं की भूमिका अहम् है.


दूसरी यह कि वीरभद्र अगला विधानसभा चुनाव जीतना चाहते हैं. इसलिए वे तोहफों की बौछारें करने में लगे हैं. जनता जो मांग कर रही है, वीरभद्र पूरी कर रहे हैं, भले ही यह तहसील की हो या कॉलेज खोलने की. वे बिना यह विचारे मांगें पूरी करने में लगे हैं कि इसका राज्य पर क्या वित्तीय प्रभाव पड़ेगा.


पूर्व भाजपा विधायक और अब आम आदमी पार्टी के नेता मोहिन्दर नाथ सोफाट कहते हैं-मुख्य सवाल यह है कि जो चीज कल तक अवैध थी और पुलिस की मदद से उस पर कब्जा किया गया, वह आज वैध कैसे हो गई? सोलन के पत्रकार संजय हिंदवान का कहना है कि सरकार ने पहले लीज रद्द करने का ढोंग ही क्यों किया? क्या वे जनता को बेवकूफ समझते हैं? इस बात की जांच होनी चाहिए कि सरकार की बाबा रामदेव के साथ क्या डील हुई है.

 

चुनावी फायदा


भाजपा ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि 50 करोड़ रूपए के शुरूआती निवेश वाला ट्रस्ट करीब 1,000 स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया करवाएगा. हो सकता है कांग्रेस के यूटर्न का यह भी एक कारण हो. इसीलिए वह लीज बहाल कर चुनावी फायदा उठाना चाह रही हो. साधुपुल क्षेत्र के एक स्थानीय किसान सभा के नेता योगेश ने कहा, ‘‘जिस वक्त रामदेव के इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुई थी तो स्थानीय जनता बहुत खुश थी लेकिन जब सरकार ने लीज निरस्त की थी तब यही जनता काफी दुखी हुई थी. इस प्रोजेक्ट से सोलन एवं शिमला जिलों की 5 ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा. इस क्षेत्र में बहुत सी विधानसभा सीटें आती हैं.’’


उन्होंने कहा, साधुपुल पहले ही पर्यटक स्थल का दर्जा पा चुका है. यह प्रोजेक्ट आ जाने से क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा. गांव वालों ने पास ही के इलाके वाकनघाट के विकास के बारे में बताया कि वहां दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन गई हैं. इससे वहां पहले ही आर्थिक परिवर्तन आ चुका है.


शिमला में एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, कांग्रेस शायद रामदेव के अनुयायियों या उनके चाहने वालों को नाराज नहीं करना चाहती प्रदेश के हर गली-नुक्कड़ पर पतंजलि की दुकानें हैं. इसके अलावा सेब उत्पादकों को भी अपने बचे हुए सेब खपाने का जरिचया मिल जाएगा. अब तक सरकारी स्वामित्व वाला बागवानी उत्पाद विपणन संघ(एचपीएमसी) इन लोगों की समस्या सुलझाने में सफल नहीं रहा है.’’

यहां बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि रामदेव के अनुयायियों वाला विधानसभा क्षेत्र तो वैसे ही भाजपा का है. इसलिए उम्मीद कम ही है कि कांग्रेस को अपने इस कदम का राजनीतिक लाभ मिलेगा. खैर, देखना यह है कि कांग्रेस कब यह लनीज बहाल करेगी?

 

First published: 26 March 2017, 7:32 IST
 
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