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जानिए मानसून सत्र में भाजपा को घेरने का कांग्रेसी चक्रव्यूह क्या है

आकाश बिष्ट | Updated on: 20 July 2016, 15:04 IST
QUICK PILL
  • मानसून सत्र का पहला दिन शांत रहा लेकिन आने वाले दिनों में ऐसा रहने की संभावना कम ही है. कुछ विवादित मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिशों के तहत कांग्रेस अपने सभी सांसदों के साथ बातचीत कर रही है.
  • कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी बुधवार को कांग्रेस संसदीय समिति को संबोधित करेंगी. माना जा रहा है कि वह सांसदों को उन मुद्दों के बारे में जानकारी देंगी जिसकी मदद से पार्टी संसद में बीजेपी कोे अलग-थलग करने की कोशिश करेगी. 

मानसून सत्र का पहला दिन शांत रहा लेकिन आने वाले दिनों में ऐसा रहने की संभावना कम ही है. कुछ विवादित मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिशों के तहत कांग्रेस अपने सभी सांसदों के साथ बातचीत कर रही है.

मोर्चे की अगुवाई करते हुए कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी बुधवार को कांग्रेस संसदीय समिति को संबोधित करेंगी. माना जा रहा है कि वह सांसदों को उन मुद्दों के बारे में जानकारी देंगी जिसकी मदद से पार्टी संसद में बीजेपी कोे अलग थलग करने की कोशिश करेगी. सोनिया और राहुल गांधी सोमवार को भी पार्टी के नेताओं से मिल चुके हैं.

इसके अतिरिक्त समान विचारधारा की पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर कांग्रेस यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि संसद में विपक्ष एक सुर में नजर आए. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा साफ कर चुके हैं पार्टी किन मुद्दों पर दोनों सदन में बहस चाहती है. राज्यसभा में सरकार की स्थिति कमजोर है.

शर्मा ने कहा कि भारत की विदेश नीति, जीएसटी बिल, सीएएफ बिल और संगठित एवं गैर संगठित क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी के साथ महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस संसद में बहस चाहेगी. उन्होंने कहा, 'हमने सरकार को महंगाई खासकर दाल और अन्य खाद्य पदार्थों की महंगाई पर चर्चा कराने के लिए नोटिस दिया है. इसे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने स्वीकार कर लिया है.'

सरकार की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने विपक्षी दलों की आपत्ति को देखते हुए एनिमी प्रॉपर्टी बिल को वापस ले लिया है.

मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस ने केंद्र सरकार की तरफ से गैर बीजेपी सरकारों को अस्थिर किए जाने का मुद्दा उठाया. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अरुणाचल प्रदेश के मामले में स्थगन प्रस्ताव लाया. अरुणाचल प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस की सरकार सत्ता में आ चुकी है.

हालांकि लोकसभा में पर्याप्त संख्या और विपक्षी दलों का सहयोग नहीं होने की वजह से कांग्रेस अकेली पड़ गई. उल्टा गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर सरकार को अस्थिर करने का ताना कस दिया.

अब कांग्रेस केवल राज्यसभा में गंभीर बहस की उम्मीद कर सकती है. राज्यसभा में कांग्रेस के जबरदस्त वक्ता हैं और वहां पर पार्टी सरकार को अलग-थलग करने की क्षमता रखती है.

बढ़त में कांग्रेस

मानसून सत्र की शुरुआत में सरकार ने जीएसटी मामले को लेकर कांग्रेस को अलग-थलग करने की नीति अपनाई थी लेकिन बाद में अपने रुख में बदलाव करते हुए पार्टी ने कांग्रेस से संपर्क किया ताकि जीएसटी पर एकराय बनाई जा सके.

जीएसटी को लेकर दोनों दल के नेता कई बार मिल चुके हैं. सरकार ने समझौते के संकेत दिए थे लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सरकार को उसकी सभी मांगों को मानना होगा. कांग्रेस जीएसटी पर 18 फीसदी की लिमिट लगाए जाने की मांग कर रही है, जिसका बीजेपी विरोध कर रही है.

विदेश नीति पर हमला

अन्य मामलों में एनएसजी में भारत की सदस्यता खारिज होना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह लगातार विदेश का दौरा करते रहते हैं लेकिन विपक्ष जानना चाहता है कि उनके इस दौरे से देश को क्या मिला.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत को बराबरी का दर्जा देना शर्मनाक है. यह राष्ट्रीय शर्म का मुद्दा है. सुषमा स्वराज ने कहा था कि भारत एनएसजी की सदस्यता के लिए पाकिस्तान का विरोधी नहीं है. उन्होंने कहा, 'इस मुद्दे को निश्चित तौर पर संसद में उठाया जाएगा.'

विदेश नीति पर विपक्षी दलों से बातचीत नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा वह पाकिस्तान के साथ अन्य देशों के दौरे पर हुई बातचीत के बारे में जानना चाहेगी. साथ ही वह यह जानना चाहेगी कि आखिर किस वजह से एनएसजी में भारत की सदस्यता अटक गई.

अन्य विधेयकों कंपनसेटरी एफॉरेस्टेशन एक्ट पर चर्चा किया जाना है. कांग्रेस इस बिल को लेकर खुश नहीं हैै. पार्टी का कहना है कि जब तक उसकी चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता है तब तक वह इस बिल को संसद में पेश नहीं करे.

शर्मा ने कहा, 'सभी मसले चर्चा के लिए आ रहे हैं और हम मुद्दों पर आधारित समर्थन देंगे. जिन विधेयकों पर सहमति नहीं बनी है उन्हें विपक्ष का समर्थन नहीं मिलेगा.'

First published: 20 July 2016, 15:04 IST
 
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