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मोदी सरकार सोती रही और दाऊद की पत्नी मुंबई आकर लौट गई

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 September 2017, 12:11 IST

कांग्रेस ने शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि फरार डॉन दाऊद इब्राहिम की पत्नी महजबीं शेख पिछले साल जब मुंबई अपने पिता से मिलने आई थी, तब किसी को इसकी कानों कान खबर क्यों नहीं हुई. कांग्रेस ने कहा कि इससे केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ है. कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, "इब्राहिम की पत्नी महजबीं शेख 2016 में अपने पिता से मिलने मुंबई आई थी और मोदी सरकार सोती रही."

सुरजेवाला की यह टिप्पणी दाऊद के भाई इकबाल इब्राहिम कासकर द्वारा जांचकर्ताओं को यह बताने के एक दिन बाद आई है कि उसकी भाभी महजबीं शेख 2016 में अपने पिता सलीम कश्मीरी से मिलने आई थी और फिर चुपचाप लौट गई.

सरकार की जांच एजेंसियों पर निशाना साधते हुए सुरजेवाला ने सवाल उठाया, "सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) क्या कर रही थी? रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) क्या कर रहा था?"

सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "कई आतंकवादी घटनाओं में वांछित एक अपराधी की पत्नी अपने पिता से मिलने भारत आती है और फिर चली जाती है. उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? उसके खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया?" उन्होंने कहा कि चौंका देने वाला यह खुलासा मुंबई की ठाणे पुलिस ने किया है.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी), रक्षा मंत्री (निर्मला सीतारमण) और गृह मंत्री (राजनाथ सिंह) को इस पर निश्चित ही जवाब देना चाहिए." पूर्व एंकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा के नेतृत्व वाली ठाणे एंटी-एक्सटॉर्शन सेल की एक टीम ने मंगलवार तड़के इकबाल को फिरौती मामले में उसके घर से गिरफ्तार किया था.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने इस मामले को गंभीर करार दिया है और कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है. उन्होंने पूछा, "दाऊद की पत्नी महजबीं शेख 2016 में 15 दिनों के लिए भारत आई. मुंबई पुलिस क्या कर रही थी? केंद्र और महाराष्ट्र सरकार क्या कर रही थी? अन्य एजेंसियां क्या कर रही थीं?"

शुक्ला ने कहा, "यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है. यह 'दीया तले अधेंरा' जैसा है. राज्य सरकार, मुंबई पुलिस और सभी केंद्रीय एजेंसियों को यह जवाब देना चाहिए कि यह कैसे हुआ, क्योंकि यह उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है."

First published: 24 September 2017, 10:30 IST
 
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