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'पीयूष गोयल ने मंत्री बनने के बाद बिजनेस की बात छिपाई, पीएम करें कैबिनेट से बाहर'

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 April 2018, 11:17 IST

कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल पर शक्तियों का दुरुपयोग करके निजी फायदा उठाने का आरोप लगाया है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने शनिवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनपर कई आरोप लगाए. इसके अलावा पवन खेड़ा ने पीयूष गोयल से कई सवाल पूछे.

दरअसल, नवंबर 2004 से साल 2014 में मोदी सरकार में मंत्री बनने तक पीयूष गोयल फ्लैशनेट इन्फो सॉल्यूशंस इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी के निदेशक थे. साल 2009 से साल 2014 तक गोयल की पत्नी सीमा गोयल भी कंपनी की निदेशक थीं. कंपनी में 99.99 फीसदी हिस्सेदारी के साथ गोयल दंपत्ति का स्वामित्व था. इसी को लेकर शनिवार को मीडिया में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी.

 

रिपोर्ट के अनुसार, पीयूष गोयल ने इस कंपनी में अपनी और अपनी पत्नी की हिस्सेदारी की बात न केवल साल 2010 में राज्यसभा सांसद बनते वक्त बल्कि साल 2014 में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी छिपाई. उन पर इस कंपनी में स्वयं और अपनी पत्नी दोनों के निदेशक होने की बात छिपाने का भी आरोप लगा है.

नियम कहता है कि अगर आप संसद के किसी भी सदन के चुनाव में नामांकन दायर करते हैं, तो उस वक्त अपनी संपत्ति, निवेश और कारोबारी हितों की सही जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है. इसके अलावा हर वित्त वर्ष के अंत में संपत्ति में हुए बदलावों की जानकारी भी सांसदों और मंत्रियों को देनी होती है. राज्यसभा के नियमों के अनुसार ऐसी किसी भी जानकारी को छिपाना या गलत जानकारी देना दंडनीय अपराध है और इसके साबित होने पर सदन की सदस्यता तक जा सकती है.

लेकिन केंदीय मंत्री पीयूष गोयल पर लगे ताजा आरोपों के अनुसार उन्होंने अपने कुछ निवेशों और सौदों की जानकारी इनमें से किसी भी मौके पर नहीं दी. इसके अलावा गोयल पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहने के दौरान हितों के टकराव और ‘क्रोनी कैपटलिज्म (नेताओं और कारोबारियों की सांठगांठ)’ का भी आरोप लग रहा है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी द्वारा किया गया वित्तीय लेन-देन लाभ पहुंचाने की दागदार कथा, नियमों का घोर उल्लंघन और हितों का टकराव है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री का पदभार संभालने के चार महीने बाद गोयल ने फ्लैशनेट इन्फो सॉल्यूशन्स (इंडिया) लिमिटेड की अपनी पूरी हिस्सेदारी पीरामल ग्रुप को बेच दी. खेड़ा ने कहा कि पूरी हिस्सेदारी पीरामल समूह की कंपनी को करीब 1,000 प्रतिशत प्रीमियम पर बेचा गया. खेड़ा ने पीरामल एस्टेट्स प्राइवेट लि. द्वारा घोषित सूचनाओं का हवाला देते हुए यह दावा किया.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गोयल ने अपनी जिस फ्लैशनेट इन्फो सॉल्यूशंस (इंडिया) लिमिटेड कंपनी को अजय पीरामल के नेतृत्व वाले पीरामल समूह के हाथों बेचा, उसकी पीरामल एस्टेट्स नामक कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी सक्रिय है. पीरामल समूह ने पीयूष गोयल को उनके 10 रुपये अंकित मूल्य वाले एक शेयर की कीमत 9,586 रुपये लगाई है.

इस तरह उनकी कंपनी के शेयरों को करीब एक हजार फीसदी का प्रीमियम मिला है. इसलिए कांग्रेस पार्टी ने व्यंग्य किया है कि पीयूष गोयल को मिला यह लाभ कुछ और नहीं ‘जय शाह (भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र) मॉडल’ का दोहराव मात्र है. आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार किसी भी कंपनी के शेयर को एक हजार फीसदी का प्रीमियम मिलना ‘असामान्य’ बात मानी जाती है.

कांग्रेस ने पूछा है कि जब यह साफ है कि पीरामल समूह की अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में रुचि रही है तो क्यों 2014 में यह मामला देख रहे पीयूष गोयल और उनकी पत्नी सीमा गोयल ने अपनी कंपनी को उन्हें बेच दिया? उन्होंने इस सौदे को ‘हितों का संघर्ष’ करार दिया है.

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पार्टी ने यह भी पूछा है कि जब फ्लैशनेट इन्फो सॉल्यूशंस (इंडिया) लिमिटेड नामक इस कंपनी ने बिक्री के छह महीने बाद अपनी संपत्ति 11 करोड़ बताई तो आखिर क्यों पीरामल समूह ने पीयूष गोयल से इसकी 48 करोड़ रुपये में खरीद की? कांग्रेस ने तत्कालीन ऊर्जा मंत्री की कंपनी के 10 रुपये के शेयर की कीमत करीब 10,000 रुपये (करीब एक हजार फीसदी का प्रीमियम) मिलने को भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला करार दिया है.

First published: 29 April 2018, 11:17 IST
 
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