Home » इंडिया » Congress does a BJP in Uttarakhand: pushes for upper-caste quota
 

उत्तराखंड में गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित

चारू कार्तिकेय | Updated on: 24 July 2016, 13:53 IST
QUICK PILL
  • उत्तराखंड देश का शायद पहला वैसा कांग्रेस शासित राज्य बन गया है जहां आधिकारिक तौर पर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है. 
  • मई में गुजरात सरकार ने भी शैक्षिक संस्थानों और राज्य की नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की अधिसूचना जारी की थी.

उत्तराखंड देश का शायद पहला वैसा कांग्रेस शासित राज्य बन गया है जहां आधिकारिक तौर पर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है. उत्तराखंड विधानसभा ने 22 जुलाई को एक प्रस्ताव पारित कर आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का रास्ता साफ कर दिया है.

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से गरीब सवर्णों को आरक्षण दिए जाने के मामले में प्रावधान बनाने के लिए कहा गया है. मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी सरकार को बताया कि वह केंद्र सरकार से इस प्रावधान के तहत 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने की अपील करेंगे.

गुजरात सरकार ने सालाना 6 लाख रुपये तक की आय वालों को आरक्षण दिया है.

मई में गुजरात सरकार ने भी शैक्षिक संस्थानों और राज्य की नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की अधिसूचना जारी की थी. गुजरात सरकार ने सालाना 6 लाख रुपये तक की आय वालों को आरक्षण दिया है. इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट में कई याचिका दायर कर इस प्रावधान को चुनौती दी गई है.

18 जुलाई को हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. गुजरात कांग्रेस ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर वह सरकार में आई तो इस आरक्षण को बढ़ाकर 20 फीसदी कर देगी. 

रावत सरकार ने इस मामले में सभी कांग्रेसी सरकारों से बढ़त लेे ली है. उत्तराखंड में अगले साल चुनाव होने हैं और वहां के 80 फीसदी सवर्ण मतदाता इस फैसले के लिहाज से अहम साबित हो सकते हैं.

उत्तर प्रदेश पर भी पड़ेगा असर

उत्तराखंड सरकार के इस फैसले से उत्तर प्रदेश कांग्रेस भी संकेत ले सकती है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं और पार्टी अपने घोषणापत्र में सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की घोषणा कर सकती है. 

उत्तर प्रदेश में सवर्ण मतदाताओं की आबादी करीब 20 फीसदी है. कांग्रेस ने राज्य में ब्राह्ण मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नाम की घोषणा की है.

हालांकि सवर्णों को आरक्षण दिए जाने के मामले में दो पेंच हैं. पहला उन्हेंं आरक्षण दिए जाने से एससी, एसटी और ओबीसी को मिले सीटों में कमी आएगी. 

गुजरात सरकार ने ईबीसी के लिए जो कोटा बनाया है वह 49 फीसदी के अलग है. पाटीदारों ने इस कोटे को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि इससे उनका कोटा घटकर 10 फीसदी हो जाएगा जबकि ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण मिला हुआ है.

दूसरा यह सुप्रीम कोर्ट के तय 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं होने की शर्त का उल्लंघन करता है. दूसरा विश्लेषकों का कहना है कि आरक्षण पिछड़ों को मुख्य धारा में लाने का कार्र्यक्रम है न कि यह गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम है. चाहे जो भी यह मामला विवादित होने जा रहा है क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस इसे लेकर एकमत हैं. हालांकि इसका अंजाम क्या होगा, यह देखने लायक है.

First published: 24 July 2016, 13:53 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

पिछली कहानी
अगली कहानी