Home » इंडिया » congress former cm ashok chavan gets relief in adarsh society scam by bombay high court, good news after 2G spectrum c
 

2G घोटाले में राहत के बाद कांग्रेस के लिए आई एक और अच्छी ख़बर

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 December 2017, 15:47 IST

आदर्श सोसायटी घोटाला मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को बड़ी राहत दी है. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर अब आदर्श सोसाइटी घोटाले के मामले में केस नहीं चलेगा.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के गर्वनर सी विद्यासागर द्वारा फरवरी 2016 में अशोक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने के आदेश को रद्द कर दिया है. गौरतलब है कि साल 2010 में इस हाई प्रोफाइल घोटाले के सामने आने के बाद विपक्ष के दबाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को पद से इस्तीफा देना पड़ा था. विपक्ष ने इस मुद्दे को देशभर में उठाया था.

अशोक चव्हाण को राहत मिलने के साथ ही कांग्रेस पार्टी को भी इस आदेश से बड़ी राहत मिली है. गुरुवार को सीबीआई की विशेष अदालत से भी कांग्रेस के लिए राहत की खबर आई थी. दिल्ली मे सीबीआई कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके राज्यसभा सांसद कनिमोझी को 2G स्पेक्ट्रम घोटाले से बरी कर दिया. यूपीए के केंद्र में कार्यकाल के दौरान इस घोटाले से पूरे देश में हंगामा मचा था. 

इस घोटाले के सामने आने के बाद यूपीए की मनमोहन सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे थे. साल 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा 2G स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर अनियमितता की बात सामने आई थी. इस घोटाले का 2010 में कैग की रिपोर्ट के बाद खुलासा हुआ था.

अशोक चव्हाण इस समय महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं. इससे पहले कांग्रेस की सरकार के समय तत्कालीन गवर्नर के शंकरनारायणन ने इस मामले में सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद मोदी सरकार के केंद्र में आने के बाद साल 2016 में गर्वनर सी विद्यासागर ने सीबीआई की सिफारिश को मानते हुए मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी.

क्या है घोटाला?

आदर्श सोसायटी दक्षिण मुंबई के कोलाबा में स्थित 31 मंजिला इमारत है. ये सोसाइटी कारगिल और दूसरे युद्धों में शहीद हुए सैनिकों की पत्नियों के लिए बनाई गई थी. बाद में कई राजनेताओं, नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को इसका सदस्य बनाया गया और उन्हें फ्लैट दिए गए. 

भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की 2011 की रिपोर्ट में इस घोटाले के भ्रष्टाचार का सबसे अच्छा नमूना कहा गया था जिसमें ऊंचे पदों पर बैठे लोग कीमती सार्वजनिक जमीनों को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए नियमों को तोड़-मरोड़ देते हैं. जब ये घोटाला हुआ तब महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार थी और कांग्रेस के अशोक चव्हाण सीएम थे.

साल 2011 में मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जेए पाटिल और एनएन कम्भर का दो सदस्यीय जांच कमीशन बनाया गया. कमीशन ने दो साल तक जांच करके, 182 चश्मदीदों के गवाहों से पूछताछ करने के बाद अप्रैल, 2013 में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी. पाटिल कमीशन के अनुसार आदर्श सोसायटी में 22 फ्लैट गैर-कानूनी तौर पर दिए गए. वहीं 22 फ्लैट जाली नामों से खरीदे गए.

रिपोर्ट में महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशीलकुमार शिंदे और शिवराज पाटिल, दो पूर्व शहरी मंत्रियों राजेश टोपे और सुनील टटकरे और एमसीजीएम के पूर्व प्रमुख जयराज पाठक समेत 12 नौकरशाहों का जिक्र किया गया था.

आदर्श सोसायटी निर्माण में पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी समेत कई अन्य केंद्रीय और राज्य कानूनों का खुला उल्लंघन किया गया था. कई संवेदनशील रक्षा संस्थानों के करीब स्थित होने के बावजूद इमारत के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया गया था. इमारत बनाने के लिए मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के नियम में बदलाव किए गए. कोस्ट रेगुलटरी ज़ोन (सीआरज़ेड) में होने के बावजूद एनओसी नहीं ली गई.

First published: 22 December 2017, 15:47 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी