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जीएसटी बिल: कांग्रेस गरम, बीजेपी नरम

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 January 2016, 18:02 IST
QUICK PILL
  • वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक समेत कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पारित कराने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस तक पहुंच बनाने के प्रयास में जुटी है. लेकिन यह संभव होता नहीं दिख रहा.
  • करीब दो माह में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चार में से कांग्रेस केरल और असम में सत्ता बनाए रखने के लिए लड़ रही है. साथ ही बाकी दोनों राज्यों में भाजपा के सिमटने की प्रार्थना कर रही है.

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक समेत कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पारित कराने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस तक पहुंच बनाने के प्रयास में जुटी है. लेकिन यह संभव होता नहीं दिख रहा.

इस सिलसिले में 7 जनवरी को संसदीय मामलों के मंत्री वेंकैया नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. प्रमुख विपक्षी दल के पास भाजपा दूसरी बार सार्वजनिक रूप से यह प्रस्ताव ले गई है. इससे पहले नवंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर जीएसटी बिल पर कांग्रेस की आपत्तियों पर चर्चा की थी.

लेकिन उससे भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा और संसद के शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच गतिरोध बना दिखा. अब तक भाजपा कुछ भी प्राप्त करने में सफल साबित नहीं हुई.

शीतकालीन सत्र की ही तरह कांग्रेस मौजूदा स्वरूप में विधेयक का विरोध करने पर जुटी हुई है. आधिकारिक तौर पर कांग्रेस पार्टी की तीन प्रमुख आपत्तियां हैं, जिन्हें पार्टी प्रवक्ताओं द्वारा दोहराया जा रहा है.

करीब दो माह में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चार में से कांग्रेस केरल और असम में सत्ता बनाए रखने के लिए लड़ रही है. साथ ही बाकी दोनों राज्यों में भाजपा के सिमटने की प्रार्थना कर रही है.

यह चुनाव संसद के बजट सत्र के साथ या इसके बिल्कुल बाद आयोजित होने की संभावना है. इस मोड़ पर संसद में भाजपा का सहयोग करने और उसे अपने हितों की पूर्ति करने देना कांग्रेस के लिए बेहतर नहीं होगा. भाजपा के खिलाफ कांग्रेस द्वारा उठाए गए सभी कदमों से मिलने वाला लाभ इससे खत्म हो जाएगा. सोनिया द्वारा ऐसा होने की संभावना नहीं है.

यह प्रस्ताव महज छलावा है

सभी संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि जब तक विधेयक कांग्रेस के मुताबिक नहीं होगा पार्टी के इसका समर्थन करने की संभावना नहीं है. कथित रूप से सोनिया ने बैठक में नायडू से कहा कि वह अपने पार्टी के लोगों के साथ इस मामले पर चर्चा करने के बाद उन्हें सूचित करेंगी जिसे शायद ही एक सकारात्मक प्रतिक्रिया समझा जाए.

रणनीतिक रूप से किसी भी बहाने से राज्यसभा में जीएसटी को रोकना पार्टी द्वारा लोकसभा में अपनी लाचारी को आसान बनाता है. इससे पार्टी अपने समर्थकों को यह संदेश देती है कि वो अभी भी मौजूदा सरकार को समर्थन मांगने के लिए विवश करने में सक्षम है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि पार्टी ने अपनी स्थिति को बहुत स्पष्ट कर दिया गया है और अब यह सरकार को बताना है कि वो क्या स्वीकार करती है और क्या नहीं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष से बैठक में प्रस्ताव लाना महज छलावा था.

जब जेटली ने एक नई खाई खोद दी

भाजपा के कार्यों और इरादों के बीच के अंतर को बेनकाब करने की कोशिश में सिब्बल ने कहा कि यदि भाजपा को कांग्रेस के सहयोग की इतनी ही चाह है तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में क्यों कहा कि राज्यसभा में सिमटती कांग्रेस की ताकत के चलते जीएसटी एक वास्तविकता बन जाएगा?

दिसंबर में शीतकालीन सत्र के बाद जेटली ने कहा था कि राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के अगले दौर में कांग्रेस की संख्या कम हो जाएगी. इस बयान ने भाजपा द्वारा कांग्रेस को समझाने की सारी संभावनाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया था.

कांग्रेस ने इस बयान पर गंभीर आपत्ति जताई थी. सिब्बल ने कहा कि इस बयान से पता चलता है कि भाजपा की समझौते की कोई इच्छा नहीं है और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ बैठक सिर्फ एक रणनीति भर थी.

उन्होंने इसके बाद विधेयक पर कांग्रेस की आपत्तियों के दायरे को बढ़ाने का प्रयास करते हुए कहा कि अब कुछ और मुद्दे भी जुड़ गए हैं. जैसे नगर निगमों और पंचायतों के लिए पैसा कहां से आएगा? क्यों सरकार जीएसटी के दायरे से शराब और तंबाकू (जब यह राज्य सरकार के राजस्व में 35 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं) को बाहर रखने का प्रस्ताव लाई है?

बैक फुट पर सरकार

2015 की सर्दियां कांग्रेस के लिए एक के बाद एक खुशियां लाती दिखी. सबसे पहले बिहार में जद (यू) और राजद के साथ अपने गठबंधन से उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा को पराजित किया. इसके बाद शीतकालीन सत्र आया जिसमें यह सरकार के विधायी एजेंडे को रोकने में सफल रही. 

इसके बाद नए साल की शुरुआत के साथ ही पठानकोट के एयरफोर्स बेस पर भयंकर आतंकी हमला हो गया. इस हमले ने कांग्रेस को वह गति बनाए रखने का सुनहरा मौका दे दिया है जो उसने पिछले साल पाई थी.

राष्ट्रीय सुरक्षा भाजपा के लिए एक ऐसा घाव बन गया है जिसे कांग्रेस बार-बार कुरेद रही है. इस दौरान सरकार निश्चित रूप से बैक फुट पर नजर आ रही है.

First published: 10 January 2016, 18:02 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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