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अनार पटेल भूमि विवादः कांग्रेस ने पूछे नरेंद्र मोदी से 12 सवाल

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

कांग्रेस अनार पटेल भूमि विवाद को लेकर एक बार फिर नए सवालों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को घेरने के लिए तैयार है. आरोप है कि 2010-11 में आनंदीबेन पटेल के राजस्व मंत्री रहते उनकी बेटी को कौड़ियों के भाव जमीन दी गई.

कांग्रेस ने अपने बयान में नरेंद्र मोदी पर गुजरात का सीएम रहने के दौरान भाई-भतीजावाद करने और सरकारी जमीन की लूट होने देने का आरोप लगाया.

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कांग्रसी नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, राजीव गौड़ा और पीएल पुनिया ने कहा है कि गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने अपने परिवार से जुड़े लोगों के कारोबारी हितों को बढ़ावा दिया था.

कांग्रेस ने ये भी आरोप लगाया है कि अनार पटेल को जमीन देने के लिए गिर अभयारण्य के दो किलोमीटर के दायरे में किसी रिसॉर्ट को अनुमति न देने के नियम की भी अनदेखी की गयी है.

कांग्रेस का आरोप है कि गुजरात के राजस्व मंत्री के रूप में आनंदीबेन ने "अपने करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिए खेती की जमीन का लैंड-यूज बदलकर खरीदने की इजाजत दी थी."

बाजार भाव तो दूर सरकारी दर भी नहीं मिली जमीन की


कांग्रेस ने कुछ दस्तावेज पेश करते हुए कहा है कि अनार पटले को जो 250 एकड़ जमीन दी गयी उसका बाजार भाव 50 लाख रुपये प्रति एकड़ था. यानी वो कुल 125 करोड़ रुपये की जमीन थी.

जबकि गुजरात सरकार ने कथित तौर पर अमरेली जिले के पाटला गांव में वाइल्डवुड्स रिसॉर्ट्स एंड रियल्टीज प्राइवट लिमिटेड (डब्ल्यूडब्ल्यूआर) को 60 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से ये जमीन दे दी. यानी कंपनी को इस बड़े भूभाग के लिए बस 1.5 करोड़ रुपये चुकाने पड़े थे.

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कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उस समय उस इलाके में सरकारी दर 180 रुपये प्रति वर्गमीटर थी, जबकि इस कंपनी को 15 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन दी गयी.

सरकार ने ये भी आरोप लगाया है कि इस रिसॉर्ट का निर्माण कार्य सौदे के पांच साल के अंदर पूरा करना था लेकिन वो अब तक पूरा नहीं हुआ है.

गोशाला से भी कई गुना सस्ते दर पर रिसॉर्ट को दी गयी जमीन


कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2008 में अमरेली जिले की लैंड वैलुवेशन कमेटी के पास दो प्रस्ताव विचाराधीन थे, एक डब्ल्यडब्ल्यूआर का और दूसरा एक गोशाला का. कमेटी ने जहां डब्ल्यूडब्ल्यूआर को 15 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन दी वहीं गौ सेवा चैरिटेबल ट्र्स्ट को 671 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन दी.

ये भी आरोप है कि डब्ल्यूडब्ल्यूआर के पास रिसॉर्ट बनाने का कोई अनुभव नहीं था फिर उसे जमीन दी गयी.

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कांग्रेस के अनुसार अनार पटेल के डब्ल्यूडब्ल्यूआर और उसके साझीदार दक्षेस आर शाह तथा अमोल श्रीपाल सेठ रिश्ते जगजाहिर हैं.

250 एकड़ जमीन मिल जाने के बाद डब्ल्यूडब्ल्यूआर ने उसस सटी 172 एकड़ खेती की जमीन भी खरीद ली. इसके बाद कंपनी के पास 422 एकड़ जमीन हो गयी.

गुजरात में गैर-किसानों को खेती की जमीन खरीदने की इजाजत नहीं है. गुजरात सरकार ने डब्ल्यूडब्ल्यूआर द्वारा खरीदी गयी जमीन का लैंड-यूज बदल दिया जिसके बाद ये सौदा हुआ.

गिर के शेरों का भी नहीं रखा ख्याल


तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार ने 2010 में शेरों के गिर अभयारण्य की दो किलोमीटर की परिधि में किसी भी तरह के होटल या रिसॉर्ट के निर्माण पर रोक लगायी थी. जबकि डब्ल्यूडब्ल्यूआर को दी गयी जमीन गिर अभयारण्य से महज 1.5 किलोमीटर दूर है.

कांग्रेस का दावा है कि 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद आनंदीबेन ने दो किलोमीटर की सीमा को घटाकर एक किलोमीटर कर दिया है.

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इन आरोपों के मद्देनजर कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी से 12 सवाल पूछे हैंः

  • गिर अभयारण्य के करीब स्थित 250 एकड़ जमीन निजी कंपनी को देना क्या जनहित में था?
  • जिस डब्ल्यूडब्ल्यूआर के पास रिसॉर्ट बनाने का कोई अनुभव नहीं था उसे किस आधार पर जमीन दी गयी?
  • क्या रिसॉर्ट को बनाने के लिए पब्लिक टेंडर निकाला गया था या उसका सार्वजनिक विज्ञापन किया गया था, या ये सबकुछ गुपचुप हुआ?
  • क्या गुजरात सरकार आदमी का चेहरा देख कर नीति तय कर रही थी?
  • डब्ल्यूडब्ल्यूआर को 15 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर जमीन क्यों दी गयी जबकि सरकारी दर 180 रुपये प्रति वर्गमीटर थी?
  • सरकारी दर में 92 फीसदी कमी करके डब्ल्यूडब्ल्यूआर को जमीन देने का क्या आधार था?
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिभाषित प्रक्रिया के तहत खुली नीलामी या निविदा द्वारा जमीन का मूल्य जानने की कोशिश की गयी?
  • राजस्व विभाग के अधिकारियों की आपत्तियों को क्यों नजरंदाज किया गया? क्या तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को इस मामले में होने वाले राजस्व के नुकसान के बारे में पता नहीं था?
  • आखिर गोशाला ट्रस्ट जैसे चैरिटेबल संस्था को 671 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन दी गयी लेकिन कारोबारी इस्तेमाल करने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूआर को 15 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन क्यों दी गयी?
  • गिर अभयारण्य के दो किलोमीटर की सीमा के अंदर जब होटल/रिसॉर्ट बनाने की इजाजत नहीं थी तो डब्ल्यूडब्ल्यूआर को जमीन क्यों दी गयी?
  • क्या नरेंद्र मोदी को तत्कालीन राजस्व मंत्री आनंदीबन पटेल के कारोबारी हितों की टकराहट से परिचित थे?
  • क्या कैबिनेट की सहमति से जमीन देने का फैसला लिया गया था? क्या इसे तत्कालीन सीएम की अनुमति प्राप्त थी? क्या संबंधित मंत्री ने अपने हितों के टकराव की बात जाहिर की थी?
कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से जांच कराने की मांग की है. ताकि इन सवालों का जवाब मिल सके. पार्टी ने ये भी मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आनंदीबेन पटेल को तत्काल पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
First published: 4 March 2016, 10:33 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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