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गांधी हत्या में संघ की भूमिका पर राजनीतिक पार्टियां एकराय

चारू कार्तिकेय | Updated on: 7 February 2017, 8:13 IST
(कैच)

आरएसएस के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर द्वारा 'महात्मा गांधी की हत्या की धमकी देने' की कैच की विशेष रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों ने कहा कि कैच द्वारा किया गया खुलासा 'उस समय मिले अन्य सुबूतों से मेल खाता है जो इस मामले में आरएसएस की तरफ इशारा करते थे.'

कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "आपकी रिपोर्ट उसी बात का अनुमोदन करती है जो इतिहासकारों ने बार बार कही है. न केवल हमारी पार्टी, बल्कि सम्मानित इतिहासकारों ने इसे दर्ज किया है कि आरएसएस को गांधी से गंभीर समस्या है. वो इससे इनकार नहीं कर सकते कि गोडसे उनके संगठन का सदस्य नहीं था. हालांकि उनका इतिहास रहा है कि वो अपने निचले कार्यकर्ताओं से गंदे काम कराते हैं और बाद में उनसे पल्ला झाड़ लेते हैं."

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चतुर्वेदी ने ये भी कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार आरएसएस 'गांधी विरोधी' और 'नेहरू विरोधी' थी और वो 'स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बनने के बजाय उन्हें रास्ते से हटाना' पसंद करती. चतुर्वेदी के अनुसार, "आरएसएस का चरित्र अभी नहीं बदला है और वो अपना असली चेहरा छिपाना चाहती है लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकती."

उन्होंने कहा, "वो अपनी बुनियादी विचारधारा नहीं बदल सकते, जो बीफ के मुद्दों पर दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ है."

गांधी की कल्पना का भारत

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कैच से कहा कि वो उन्हें इस खबर से कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि 'गोलवलकर और आरएसएस की विचारधारा में हिंदुओं के अलावा किसी और के लिए जगह नहीं है.'

सिसोदिया ने कहा, "मुस्लिम, सिख और ईसाई उनके लिए किराएदार से ज्यादा महत्व नहीं रखते. जबकि गांधी जी ने ऐसे देश की कल्पना की थी जहां विभिन्न धर्मों में कोई भेदभाव न हो."

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सिसोदिया के अनुसार, "महात्मा गांधी जैसी बड़ी शख्सियत की हत्या किसी एक व्यक्ति की सोच का नतीजा नहीं हो सकती. जाहिर है कि उस षडयंत्र में दूसरे लोग भी शामिल थे."

नाथुराम के भाई गोपाल गोडसे अंतिम समय तक ये कहते रहे कि नाथुराम एक स्वयंसेवक थे: मणिशंकर अय्यर

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर के अनुसार भले ही नाथुराम गोडसे 30 जनवरी 1948 को आरएसएस का सदस्य नहीं रहा हो लेकिन ये सच है कि वो 1935 में उसका सदस्य था. अय्यर ने कहा कि नाथुराम के भाई गोपाल गोडसे अंतिम समय तक ये कहते रहे कि नाथुराम एक स्वयंसेवक थे.

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अय्यर ने कहा, "तर्क करने के लिए एक बार ये मान लिया जाए कि गोडसे केवल हिंदू महासभा का सदस्य था, तो भी हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बार-बार वीर सावरकर को 'भारत रत्न' देने की मांग करते हैं. जो महासभा के अग्रणी नेताओं में से एक थे."

अय्यर के अनुसार 'इन लोगों' ने आजादी के समय देश का सांप्रदायिक एकदम खराब कर दिया था. यो लोगों के मन में यह बात बार-बार भरते रहे कि जो 'शांति के दूत' गांधीजी को जान से मारेगा वही सच्चा देशभक्त होगा. ये लोगों को हथियार पकड़ा रहे थे.'

पटेल का पत्र

जदयू के सांसद केसी त्यागी ने कैच द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों से सहमति जताते हुए तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और एमएस गोलवलकर को लिखे एक पत्र की याद दिलायी.

त्यागी के अनुसार पटेल ने ये पत्र मुखर्जी और गोलवलकर द्वारा आरएसएस से प्रतिबंध हटाने की अपील की जवाब में लिखा था. त्यागी के अनुसार पटेल ने अपने पत्र में कहा था कि आरएसएस गांधी के खिलाफ 'नफरत फैलाने का अभियान' चलाती थी और उनकी मृत्यु पर उसने मिठाइयां बांटी थीं.

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त्यागी कहते हैं कि आरएसएस की मिलीभगत पर पटेल के बयान से ज्यादा प्रमाणिक कुछ और नहीं है. त्यागी ने बीजेपी से अपील की कि चूंकि वो भी पटेल को अपना आदर्श मानते हैं तो उन्हें इस मुद्दे पर उनकी बात माननी चाहिए.

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कैच की रिपोर्ट पर पूरी सहमति जताई. झा के अनुसार कैच की रिपोर्ट 1940 के दशक के दूूसरे सुबूतों के अनुरूप ही है. झा के अनुसार, "गांधी जी की हत्या से जुड़ी तत्कालीन बहसों से ये साफ हो चुका है कि उनकी हत्या आरएसएस की विचारधारा के कारण ही हुई."

'रिपोर्ट कुछ नहीं कहती'

ऑर्गेनाइजर अखबार के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि कैच की रिपोर्ट कुछ नहीं कहती है. केतकर के अनुसार कैच की रिपोर्ट में दस्तावेज की केवल व्याख्या भर की गई है. 

केतकर ने कैच से कहा, "इन्हीं दस्तावेज में कहा गया है कि ये हमारी परंपरा नहीं है. इसका गांधी की हत्या से सीधा संबंध नहीं है. आम तौर पर ये कहा जाता है कि राष्ट्रिय हितों का विरोध करने वालों से हम जी-जान से लड़ने के लिए तैयार हैं. इस खबर की व्याख्या व्यक्ति सापेक्ष हो सकती है."

केतकर ने आगे कहा, "मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि जब आज (गुरुवार) को अदालत को इस मामले पर सुनवाई करनी थी तो फिर रामचंद्र गुहा से लेकर कैच न्यूज तक इसमें क्यों कूद रहे हैं."

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First published: 28 July 2016, 7:29 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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