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उत्तराखंड: राष्ट्रपति शासन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2016, 15:21 IST

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ हरीश रावत सरकार ने सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने यह याचिका दायर की है. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए टाल दी है.

दूसरी ओर कांग्रेस के बागी विधायक भी निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे. रविवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद ही कांग्रेस ने कहा था कि वह इसके खिलाफ कोर्ट में जाएंगे.

इससे पहले शनिवार रात को उत्तराखंड के राजनीतिक संकट पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की आपात बैठक प्रधानमंत्री ने बुलाई थी. इस बैठक में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की गई.

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन: 'लोकतंत्र की हत्या'

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने देर रात राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राज्य के हालात से अवगत कराया था.

इसके बाद राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सिफारिश को मानते हुए राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी. हालांकि, अभी विधानसभा को भंग नहीं किया है, अभी इसे निलंबित रखा गया है.

उत्तराखंड के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है. कांग्रेस के नौ विधायकों के बागी होने के बाद राज्य की हरीश रावत सरकार मुश्किलों में घिर गई थी. सरकार को 28 मार्च को सदन में बहुमत साबित करना था.

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राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के निर्णय को सही ठहराते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'मेरा मानना है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता. पिछले नौ दिनों से उत्तराखंड में संविधान का उल्लंघन किया जा रहा है.'

कांग्रेस ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को 'लोकतंत्र की हत्या' बताया है.

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल उठाया है कि जब राज्यपाल ने कांग्रेस सरकार से कहा था कि वह 28 मार्च को बहुमत साबित करे. फिर सदन में बहुमत साबित करने से 24 घंटे पहले राष्ट्रपति शासल लगाने का क्या औचित्य था? इससे साबित होता है कि प्रधानमंत्री के भीतर संविधान के प्रति बिल्कुल सम्मान नहीं है.'

First published: 28 March 2016, 15:21 IST
 
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