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कांग्रेसी सांसद का खुलासा- मनमोहन सरकार के समय जमकर बंटे लोन, जिससे बैंकों को हुआ करोड़ों का घाटा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 June 2018, 11:29 IST

कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने खुलासा किया कि यूपीए यानी मनमोहन सिंह के शासनकाल के दौरान आक्रामक तरीके से लोन दिए जाने के कारण एनपीए बढ़ता गया. जिससे बैंकों को हजारों करोड़ों का घाटा उठाना पड़ा. खास बात यह है कि कांग्रेसी सांसद ने यह बात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सामने कही.

दरअसल, सोमवार (4 जून) को वित्त मंत्रालय से संबंधित स्टैंडिंग कमेटी के साथ सोमवार बैंकों और बैंकिंग एसोसिएशन के सीनियर अधिकारी की बैठक थी. इस दौरान कमेटी के सदस्यों ने बढ़ते NPA और उससे निपटने के उपायों पर अधिकारियों से सवाल-जवाब पूछे.

सदस्यों ने बैंक अधिकारियों से लोन देने संबंधी नियमों का पुनर्मूल्यांकन और एनपीए का वर्गीकरण करने की बात कही. कई सदस्यों ने कहा कि एनपीए को पुन:परिभाषित किया जाए. कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि एनपीए को लेकर आरबीआई की भूमिका को भी पुनर्मूल्यांकित किए जाने की जरूरत है.

इसी समय कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद सदस्य ने बैठक में माना कि यूपीए शासनकाल के दौरान बहुत आक्रामक तरीके से लोन बांटे गए थे. गौर करने वाली बात है कि कमेटी के कई सदस्यों ने भी इस पर सहमति जताई. सदस्यों ने कहा कि एनपीए बढ़ने में यह एक बड़ी वजह रही है.

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आपको बता दें कि एनपीए यानि नॉन परफॉर्मिंग एसेट वह होता है जब कोई व्यक्ति या संस्था अपने कर्जदायी बैंक को ईएमआई देने में नाकाम रहता है, तब उसका कर्ज एनपीए कहलाता है. ऐसे में जब किसी लोन की ईएमआई, प्रिंसिपल या इंटरेस्ट चुकाने वाली तारीख के 90 दिन के भीतर नहीं आती है तो उसे एनपीए में डाल दिया जाता है. यही घाटा बैंकों को काफी नुकसान पहुंचाता है.

First published: 5 June 2018, 11:23 IST
 
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