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कांग्रेस की राज्यसभा लिस्ट: पुराने चेहरों की भीड़ में कुछ चौंकाने वाले नाम

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2016, 7:36 IST

पांच राज्यों में निराशाजनक परिणामों के बाद भी कांग्रेस पार्टी के लिए बीता हफ्ता काफ़ी सक्रियता भरा रहा. चर्चाओं और ढेर सारे कयासों के बीच शनिवार को कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए. राज्यसभा के लिए 11 जून को चुनाव होना है. उम्मीदवारों की लिस्ट में बाकी नेताओं के साथ पार्टी के तमाम पुराने चेहरे भी शामिल हैं. 

इस बार चिदंबरम महाराष्ट्र से, जयराम रमेश कर्नाटक से, कपिल सिब्बल उत्तर प्रदेश से और अम्बिका सोनी पंजाब से चुनाव लड़ेंगी. इसके साथ ही ऑस्कर फर्नांडिस को कर्नाटक से, प्रदीप टम्टा को उत्तराखंड से, विवेक तन्खा को मध्य प्रदेश से और छाया वर्मा को छत्तीसगढ़ से कांग्रेस का उम्मीदवार नाया गया है.

कर्नाटक से एक नाम को पार्टी राज्य इकाई की इच्छा पर छोड़ दिया गया है. कई हफ़्तों से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दावेदार माने जा रहे नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला चल रहा था. तमाम चर्चाओं के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने आठ नामों पर अपनी मुहर लगाई है.

पार्टी ने बिहार से सिब्बल के लिए आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद से भी बातचीत की थी

इनमें से चिदंबरम का नाम चौंकाने वाला है, क्योंकि ये कयास लगाए जा रहे थे कि सुशील कुमार शिंदे महाराष्ट्र से उम्मीदवार होंगे. ये कहना गलत नहीं होगा कि चिदम्बरम का चुनाव, राज्यसभा में बीजेपी के आक्रामक तेवर को टक्कर देने की मंशा से किया गया है. कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक चिदंबरम, शिंदे से ज्यादा अच्छे वक्ता हैं, शायद इसी हुनर को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इनके नाम का चुनाव किया है.

शिंदे का नाम कर्नाटक से भी चला लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या और बाकी नेताओं को ये मंज़ूर नहीं था. उनकी राय थी कि राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व किसी स्थानीय नेता को करना चाहिए. इसीलिए पार्टी को चिदंबरम के लिए सीट तलाशने की मशक्कत करनी पड़ी और आखिरकार महाराष्ट्र से शिंदे पर उनका नाम भारी पड़ गया.

कपिल सिब्बल के नाम पर भी आम सहमति नहीं बन पा रही थी. लेकिन राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजीत सिंह को मनाने के लिए पार्टी को कोशिश करनी पड़ी क्योंकि अजीत सिंह खुद राज्यसभा जाना चाहते थे.

पार्टी ने बिहार से सिब्बल के लिए आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद से भी बातचीत की थी. लालू अपने कोटे से दो लोगों की उम्मीदवारी पर अड़े थे. इसमें से एक नाम राम जेठमलानी का था और दूसरे नाम पर सहमति नहीं बनी थी. सूत्रों की मानें तो लालू अपनी पत्नी राबड़ी देवी को राज्यसभा भेजना चाहते थे लेकिन बेटी मीसा भारती खुद राज्यसभा जाने के लिए अड़ गई थीं. 

लालू परिवार में यह नई खींचतान है. लालू यादव ने दोनों बेटों को बिहार में स्थापित कर दिया है लिहाजा अब मीसा खुद के लिए अहम रोल चाहती थी. इस पारिवारिक लड़ाई के बीच कांग्रेस सिब्बल का नाम आगे नहीं बढ़ा पाई.

उम्मीदवारों के लिस्ट में अंबिका सोनी, जयराम रमेश और ऑस्कर फर्नांडीस का नाम हैरान करने वाला नहीं है

उत्तराखंड से भी सिब्बल के नाम पर सहमति नहीं बनी. हाल ही में राष्ट्रपति शासन मामले में सिब्बल ने अभिषेक मनु सिंघवी के साथ मिलकर रावत सरकार को राहत दिलवाई थी. इसीलिए उत्तराखंड से सिब्बल की उम्मीदवारी की उम्मीद थी लेकिन वहां से भी एक स्थानीय चेहरे की मांग थी.

उत्तराखंड के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सिब्बल ने रावत सरकार पर कोई व्यक्तिगत अहसान नहीं किया बल्कि भारी फीस लेकर ये केस लड़ा था. इन्हीं तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी प्रदीप टम्टा के नाम पर मुहर लगा दी. हालांकि टम्टा के नाम पर भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के समर्थकों को एतराज हो सकता है.

उम्मीदवारों के लिस्ट में अंबिका सोनी, जयराम रमेश और ऑस्कर फर्नांडीस का नाम हैरान करने वाला नहीं है. बीजेपी नेताओं को ज़ुबानी जंग में करारा जवाब देने में जयराम रमेश का नाम हमेशा आगे रहा है. 

खासकर सुब्रमण्यम स्वामी को. राज्यसभा के अपने पिछले कार्यकाल में रमेश ने जीएसपीएस घोटाले, आधार बिल, पनामा कांड और भूमि अधिग्रहण बिल पर बहस में बीजेपी को जमकर घेरा था.

वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा के नाम पर कोई विवाद नहीं था. छत्तीसगढ़ से छाया वर्मा का नाम थोड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि उनको अनुभवी और वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई की जगह पर वरीयता दी गई है. मोहसिना का कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है.

इसीलिए राज्यसभा में चिदंबरम की मौजूदगी निश्चित ही पार्टी की अहम रणनीति है

जून से लेकर अगस्त के बीच में कांग्रेस के 14 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा हैं. इनमे से पार्टी सिर्फ 9 नए नेताओं को ही वापस राज्यसभा में ला पाएगी, लेकिन फिर भी उच्च सदन में बीजेपी पर उसकी आंकड़ों की बढ़त बनी रहेगी.

संसद के अगले सत्र में कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे. इसीलिए राज्यसभा में चिदंबरम की मौजूदगी निश्चित ही पार्टी की अहम रणनीति है.

अभी से ही कड़े तेवर दिखाते हुए, नामांकन के बाद चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पर टिप्पणियों के लिए सुब्रमण्यम स्वामी को आड़े हाथ लिया. राजन को दुनिया के अच्छे अर्थशास्त्रियों में से एक बताते हुए उन्होंने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया. पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ही राजन के लायक नहीं है.

First published: 30 May 2016, 7:36 IST
 
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